रुधौली ब्लॉक या भ्रष्टाचार का ‘नरक’? जिला पंचायत अध्यक्ष के सामने ही जनप्रतिनिधियों ने उधेड़ी प्रशासन की बखिया! सब-हेडिंग: जल निगम की खुली पोल, सरकारी कमरों पर अवैध कब्जे और ‘कागजी विकास’ को लेकर जमकर हुआ हंगामा; BDO को मिला एक हफ्ते का अल्टीमेटम।
जल निगम की खुली पोल, सरकारी कमरों पर अवैध कब्जे और 'कागजी विकास' को लेकर जमकर हुआ हंगामा; BDO को मिला एक हफ्ते का अल्टीमेटम।
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती की ‘रुधौली ब्लॉक’ बनी भ्रष्टाचार का अखाड़ा: ज़िला पंचायत अध्यक्ष के सामने ही खुली ‘सफेदपोशों’ की पोल!
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
- बस्ती मंडल का महा-घोटाला? रुधौली ब्लॉक में ‘भ्रष्टाचार बनाम विकास’ की जंग, पूर्व बीडीओ के कार्यकाल पर उठे गंभीर सवाल!
- सफाईकर्मियों से ‘बाबूगिरी’ और बाहरी लोगों को सरकारी आश्रय देने पर भड़के जनसेवक; ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी।
- संजय चौधरी के सामने फूटा आक्रोश: ‘कागजों’ में चमक रहा रुधौली का विकास, जमीन पर जनता बेहाल!
- सड़कें खोदकर गायब हुआ जल निगम, अधिकारियों की तानाशाही के खिलाफ जनप्रतिनिधियों ने खोला मोर्चा।
- रुधौली ब्लॉक की खुली ‘पोल’: तबादले पर बंटी थी मिठाई, अब भ्रष्टाचार की ‘दाल’ गलने पर मचेगा हड़कंप!
- विशिष्ट अतिथि पुष्करादित्य सिंह की दो टूक- लापरवाही बर्दाश्त नहीं, अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे हक।
बस्ती। सुशासन और विकास के तमाम दावों की धज्जियां उड़ाते हुए बस्ती जिले का रुधौली ब्लॉक इन दिनों भ्रष्टाचार के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। हाल ही में हुई बैठक में जो कुछ भी घटा, उसने यह साफ़ कर दिया है कि यहाँ विकास के नाम पर सिर्फ और सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाए जा रहे हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष संजय चौधरी की मौजूदगी में जनप्रतिनिधियों का गुस्सा इस कदर फूटा कि पूरी बैठक ‘भ्रष्टाचार बनाम विकास’ का अखाड़ा बन गई।
बैठक में लगे संगीन आरोपों को देखकर तो यही लगता है कि रुधौली ब्लॉक क्षेत्र में ईमानदारी से कोई काम हुआ ही नहीं है। जल निगम से लेकर ब्लॉक कार्यालय के भीतर तक, भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि जनसेवक अब खुलकर इसके खिलाफ सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।
कार्यालय या निजी सराय? नियमों की धज्जियां उड़ा रहा प्रशासन!
प्रधान संघ अध्यक्ष आशुतोष मिश्रा “सोनू” ने बैठक में ब्लॉक कार्यालय की कार्यशैली पर जो तीखे सवाल उठाए, उसने पूरे प्रशासनिक अमले को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल सीधा और बेहद गंभीर है:
- सफाईकर्मी बाबूगिरी में व्यस्त: आखिर किस हैसियत और अधिकार के आधार पर सफाई कर्मियों से कार्यालय का काम कराया जा रहा है?
- सरकारी कमरों पर अवैध कब्ज़ा: ब्लॉक परिसर के सरकारी कमरों में निजी और बाहरी कर्मचारियों को रहने की अनुमति किसने और क्यों दी?
नियमों के विपरीत चल रही इस ‘सराय’ पर आशुतोष मिश्रा ने तत्काल और सख्त कार्रवाई की मांग कर सोए हुए प्रशासन को झकझोर दिया है।
पूर्व बीडीओ के कार्यकाल पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: कागजों में हुआ विकास!
क्षेत्र पंचायत सदस्य राजकुमार पांडे ने सीधे पूर्व बीडीओ योगेंद्र राम त्रिपाठी के कार्यकाल पर हमला बोलते हुए इसे रुधौली के इतिहास का सबसे उपेक्षित दौर बताया। आरोप है कि उनके समय में ग्राम प्रधानों और क्षेत्र पंचायत सदस्यों की लगातार अनदेखी की गई, विकास कार्य ठप रहे और जनप्रनिधियों को सम्मान तक नहीं मिला। सदन में निंदा प्रस्ताव तक की बात आई, जिसपर भारी सहमति दिखी।
मिठाई बनाम मायूसी का खेल: चर्चा तो यहाँ तक है कि इस पूर्व बीडीओ के तबादले पर कुछ लोगों ने मिठाइयां बांटकर खुशी मनाई थी। हालांकि, बैठक में यह भी तंज कसा गया कि मिठाई वो बांट रहे थे जिनकी ‘भ्रष्टाचार रूपी दाल’ गल नहीं पा रही थी।
जल निगम की ‘खुदाई’ या जनता की ‘तबाही’?
ग्राम पंचायत पचारी के तुलसीराम ने तो जल निगम की पोल खोलकर रख दी। गांवों में पाइपलाइन और खुदाई के नाम पर भारी भ्रष्टाचार का तांडव चल रहा है।
- गांवों की सड़कें खोदकर वैसे ही लावारिस छोड़ दी गई हैं।
- ग्रामीण रोजाना हादसों और भारी परेशानी को झेलने के लिए अभिशप्त हैं।
- काम की गुणवत्ता इतनी घटिया है कि अधिकारी सिर्फ कागजों में ‘चमकता हुआ विकास’ दिखाकर जनता की आंखों में धूल झोंक रहे हैं। तुलसीराम ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
विशिष्ट अतिथि का कड़ा रुख और बीडीओ का ‘एक हफ्ते’ का आश्वासन
इस तीखी बहस के बीच विशिष्ट अतिथि पुष्करादित्य सिंह ने सख्त रुख अपनाते हुए दो टूक कहा कि विकास कार्यों में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगी। योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना ही चाहिए और जहां भी अनियमितता मिलेगी, वहां जांच कर सीधी कार्रवाई होगी।
मामला बढ़ता देख वर्तमान खंड विकास अधिकारी (BDO) अनिल कुमार यादव ने सफाई देते हुए आश्वासन दिया है कि सामने आई सभी शिकायतों की रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर तैयार कर संबंधित उच्च अधिकारियों को भेज दी जाएगी।
ब्यूरो की टिप्पणी:
रुधौली ब्लॉक की यह बैठक सिर्फ एक समीक्षा बैठक नहीं थी, बल्कि यह तंत्र के सड़ चुके हिस्से का वो एक्स-रे है जो बताता है कि नीचे तक भ्रष्टाचार किस कदर हावी है। देखना यह है कि जिला पंचायत अध्यक्ष की मौजूदगी में खुले इस ‘भ्रष्टाचार के पिटारे’ के बाद क्या वाकई भ्रष्टाचारियों पर गाज गिरेगी, या फिर एक हफ्ते में रिपोर्ट तैयार करने का आश्वासन महज एक और प्रशासनिक लीपापोती साबित होगा? जनता की नजरें टिकी हैं!














