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बस्ती: सरकारी आवास में संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से लटका मिला वाल्टरगंज थानाध्यक्ष सूर्यप्रकाश सिंह का शव, पुलिस महकमे में शोक की लहर।

वर्ष 1988 में बतौर आरक्षी (Constable) पुलिस सेवा में कदम रखने वाले सूर्यप्रकाश सिंह ने करीब 38 वर्षों तक पूरी निष्ठा के साथ खाकी की शान बढ़ाई। वर्ष 2008 में वह हेड कांस्टेबल के पद पर और वर्ष 2016 में वरिष्ठता के आधार पर उपनिरीक्षक (Sub-Inspector) पद पर पदोन्नत हुए। बस्ती जनपद में उन्हें पहली बार किसी थाने की पूर्ण कमान मिली थी।

अजीत मिश्रा (खोजी)

वाल्टरगंज थानाध्यक्ष की रहस्यमय मौत: सरकारी आवास में फंदे से लटका मिला शव, पुलिस महकमे में शोक की लहर

  • 38 साल की सेवा के बाद अंत: दिनभर थाने में स्टाफ मीटिंग करने के बाद शाम को सरकारी आवास पहुंचे थे थानाध्यक्ष, मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला।
  • परिवार में छाया मातम: रक्षाबंधन पर भी छुट्टी नहीं ली थी इंस्पेक्टर सूर्यप्रकाश सिंह ने, लखनऊ से बस्ती पहुंचे परिजन; सहकर्मियों के लिए बेटी के फोन का जवाब देना था मुश्किल।
  • जांच जारी: पुलिस के आला अधिकारियों और फॉरेंसिक टीम द्वारा मामले की गहनता से छानबीन की जा रही है, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार।

बस्ती: वर्दी पहनकर वर्षों तक कानून-व्यवस्था की कमान संभालने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले वाल्टरगंज थानाध्यक्ष सूर्यप्रकाश सिंह (57) का शनिवार शाम डीएम कार्यालय के पास स्थित सरकारी आवास में रहस्यमय परिस्थितियों में निधन हो गया। उनका शव कमरे में पंखे के सहारे गमछे से लटकता हुआ मिला। घटना के वक्त कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। इस हृदयविदारक घटना से पूरे पुलिस महकमे में गहरा शोक फैल गया है। मौके से किसी प्रकार का सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, और पुलिस घटना के वास्तविक कारणों की जांच में जुटी हुई है।

दिनभर सामान्य रही दिनचर्या, शाम को उठाया कदम

प्राप्त विवरण के अनुसार, सूर्यप्रकाश सिंह शनिवार को वाल्टरगंज थाने में पूरी तरह सक्रिय रहे। सुबह उन्होंने थाने में स्टाफ मीटिंग आयोजित कर मातहत पुलिसकर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और रोजमर्रा के प्रशासनिक कामकाज निपटाए। इसके पश्चात, शाम को वह सरकारी वाहन से शहर पहुंचे। सिविल लाइन पुलिस चौकी के पास उन्होंने अपने हमराहियों को रुकने के लिए कहा और अकेले अपने सरकारी आवास चले गए। इसके कुछ ही समय बाद यहtragic घटना घटित हो गई।

जिंदादिल और मिलनसार छवि के थे अधिकारी

मूल रूप से आजमगढ़ जिले के अतरौलिया थाना क्षेत्र के भीलमपुर छपरा निवासी सूर्यप्रकाश सिंह अपनी जिंदादिली और मिलनसार स्वभाव के लिए जाने जाते थे। सिद्धार्थनगर जिले से स्थानांतरण के बाद बस्ती में उनकी पहली तैनाती पासपोर्ट कार्यालय में हुई थी। इसके बाद उन्हें पुलिस अधीक्षक (SP) का पीआरओ नियुक्त किया गया। उनकी कार्यकुशलता और बेहतर कार्यशैली को देखते हुए ही उन्हें वाल्टरगंज थाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

परिवार में छाया मातम, बेटी के फोन का जवाब देना था कठिन

रक्षाबंधन के त्योहारी सीजन से ठीक पहले उनका परिवार लखनऊ स्थित आवास पर चला गया था। पर्व के दौरान भी उन्होंने अवकाश नहीं लिया और अपने कर्तव्य पथ पर डटे रहे। घटना की सूचना मिलने के बाद परिजन देर रात लखनऊ से बस्ती पहुंचे। हर कोई इस बात से स्तब्ध है कि हमेशा दूसरों का हौसला बढ़ाने और संकट में ढांढस बंधाने वाले सूर्यप्रकाश सिंह खुद अंदर से इतने टूट चुके थे।

​साथी पुलिसकर्मियों के लिए उनके परिवार को इस अनहोनी की सूचना देना बेहद कठिन परीक्षा जैसा था। उनकी बेटी लगातार फोन कर पिता की सलामती पूछती रही, लेकिन सहकर्मियों के पास उसे सच बताने की हिम्मत नहीं थी। पुलिसकर्मी बस परिवार के बस्ती पहुंचने का इंतजार करते रहे। सूर्यप्रकाश सिंह के परिवार में दो बेटियां और एक बेटा हैं, जिनमें से एक बेटी और बेटे का विवाह हो चुका है।

38 साल के लंबे पुलिस करियर का दर्दनाक अंत

वर्ष 1988 में बतौर आरक्षी (Constable) पुलिस सेवा में कदम रखने वाले सूर्यप्रकाश सिंह ने करीब 38 वर्षों तक पूरी निष्ठा के साथ खाकी की शान बढ़ाई। वर्ष 2008 में वह हेड कांस्टेबल के पद पर और वर्ष 2016 में वरिष्ठता के आधार पर उपनिरीक्षक (Sub-Inspector) पद पर पदोन्नत हुए। बस्ती जनपद में उन्हें पहली बार किसी थाने की पूर्ण कमान मिली थी।

​वर्षों की सेवा और कर्तव्यनिष्ठा के बाद उनके जीवन का इस तरह अंत होना उनके परिजनों, सहकर्मियों और परिचितों को झकझोर गया है। वाल्टरगंज थाने में घटना के बाद से ही सन्नाटा पसरा हुआ है और साथी पुलिसकर्मी उन्हें याद कर भावुक नजर आ रहे हैं। फिलहाल, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और गहन जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस दुखद घटना के पीछे की असली वजह क्या थी।

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