सिद्धार्थनगर स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार का तांडव: एक लिपिक के पास दर्जन भर मलाईदार चार्ज, शासन तक गूंज
शिकायत मिलने के बाद जिला प्रभारी मंत्री अनिल राजभर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर कड़ी कार्रवाई की संस्तुति कर दी है।
अजीत मिश्रा (खोजी)
सिद्धार्थनगर स्वास्थ्य विभाग: भ्रष्टाचार के बेताज बादशाह और बाबुओं के खेल से शर्मसार जिला
- जेम पोर्टल में सेंधमारी और ब्लैकलिस्टेड फर्मों को फर्जी भुगतान: सीएमओ कार्यालय के दो बाबुओं पर खुली लूट का आरोप
- दागी और फरार आरोपियों से सीधी सांठगांठ: सिद्धार्थनगर के स्वास्थ्य महकमे को बाबुओं ने पहुंचाया वेंटिलेटर पर
- विधायक की शिकायत पर एक्शन मोड में शासन: प्रभारी मंत्री ने स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर की भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई की संस्तुति
सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर अपने कारनामों और भ्रष्टाचार के दलदल में घिर चुका है, और इस बार इसका मुख्य केंद्र सिद्धार्थनगर जिला बना है। जब एक या दो चुनिंदा कर्मचारियों के हाथों में तिजोरी की चाबी से लेकर विकास, निर्माण और तबादलों के तमाम द्वार सौंप दिए जाएं, तो यह समझ लेना मुश्किल नहीं है कि व्यवस्था बीमार नहीं बल्कि खुद वेंटिलेटर पर है। सिद्धार्थनगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय में मची खुली लूट और प्रशासनिक अराजकता की गूंज अब पड़ोसी जनपदों से लेकर सीधे शासन के गलियारों तक गूंज रही है।
सवाल यह है कि आखिर किस जादू या शह के बल पर सीएमओ कार्यालय के डीएएम राजेश मिश्रा और लिपिक विवेक त्रिपाठी को एक-दो नहीं बल्कि दर्जनों महत्वपूर्ण और मलाईदार चार्ज थमा दिए गए? एनएचएम (NHM) बजट, स्टेट बजट, सीएमएसडी (CMSD) स्टोर, आउटसोर्सिंग, कंटिंजेंसी, निविदा, निर्माण, जिला योजना, सीएसआर (CSR), चिकित्सा प्रतिपूर्ति से लेकर स्थापना, ट्रांसफर और पोस्टिंग जैसे अतिसंवेदनशील विभाग जब चंद हाथों में केंद्रित कर दिए जाएं, तो इसे महज प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित सांठगांठ कहा जाएगा।
इस कारगुजारी की भनक जब बाहर आई तो राजनीति भी गरमा गई। बलरामपुर के सदर विधायक पल्टू राम ने मामले की गंभीरता को समझते हुए जिले के प्रभारी मंत्री अनिल राजभर को पत्र लिखकर इन दोनों कर्मचारियों के काले कारनामों की पोल खोल दी। विधायक की शिकायत के केंद्र में सीएमओ कार्यालय के डीएएम राजेश मिश्रा और लिपिक विवेक त्रिपाठी रहे, जिन पर सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करने के गंभीर आरोप हैं।
जांच के दायरे में आए इन दोनों किरदारों के संबंध उन चेहरों से जुड़े हैं, जो पहले ही कानून की नजर में अपराधी साबित हो चुके हैं। भ्रष्टाचार के संगीन मामलों में जेल की हवा काट रहे पयागपुर के पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव और सीबीआई जांच में दोषी करार दिए जाने के बाद से फरार चल रहे उनके भाई अजय श्रीवास्तव के साथ इन दोनों आरोपियों के सीधे संपर्क में होने की बात सामने आने के बाद मामला और भी गंभीर हो गया है।
घोटाले की फेरिस्ता यहीं खत्म नहीं होती। जेम (GeM) पोर्टल में तकनीकी सेंधमारी कर चुनिंदा और पूरी तरह ब्लैकलिस्टेड फर्मों को धड़ल्ले से फर्जी भुगतान किए जाने का सनसनीखेज आरोप है। जिन कंपनियों का अस्तित्व कागजों में ही दम तोड़ चुका है या जिन्हें नियमों के तहत प्रतिबंधित किया गया था, उन्हें उपकृत कर सरकारी धन का खुलेआम बंदरबांट किया गया। जनता के गाढ़े पसीने की कमाई को किस तरह इन बाबुओं और उनके संरक्षकों ने मिलकर ठिकाने लगाया, यह अब किसी से छिपा नहीं है।
शिकायत मिलने के बाद जिला प्रभारी मंत्री अनिल राजभर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर कड़ी कार्रवाई की संस्तुति कर दी है। प्रशासनिक स्तर पर सुगबुगाहट तेज है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या कागजी संस्तुतियों और फाइलों के फेर से आगे बढ़कर इन भ्रष्टाचारियों पर कोई ठोस कानूनी डंडा चलेगा? दो बाबुओं के इस बेखौफ खेल ने एक बार फिर पूरे सिद्धार्थनगर जिले को शर्मसार कर दिया है, और अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन इस खुली लूट पर कितनी जल्दी और कितनी कड़ी कार्रवाई करता है।














