

अमेरिका में Meta के खिलाफ चल रहे मुकदमे ने कंपनी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। Facebook और Instagram की पैरेंट कंपनी Meta पर बच्चों और किशोरों पर सोशल मीडिया के कथित नकारात्मक प्रभाव को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। मामले में पेश किए गए कंपनी के अंदरूनी दस्तावेजों ने विवाद को और गहरा कर दिया।
इन दस्तावेजों में Meta के कर्मचारियों की ऐसी टिप्पणियां सामने आईं, जिनमें बच्चों को सोशल मीडिया की लत लगने वाले कंपनी के बिजनेस मॉडल की तुलना ड्रग तस्करों के मॉडल से की गई थी। इन टिप्पणियों को लेकर Meta के संस्थापक और CEO मार्क जुकरबर्ग को जूरी के सामने सफाई देनी पड़ी।
जूरी के सामने क्यों मुश्किल में पड़े जुकरबर्ग?
अदालत में जुकरबर्ग ने बार-बार यह तर्क दिया कि उनके बयानों और कंपनी की नीतियों को संदर्भ से हटाकर पेश किया जा रहा है। लेकिन अंदरूनी दस्तावेजों में कर्मचारियों की टिप्पणियों ने कंपनी के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी।
रिपोर्ट के मुताबिक, जूरी के सामने Meta के बिजनेस मॉडल की तुलना ड्रग तस्करों से किए जाने को लेकर कंपनी को गंभीर कानूनी और छवि संबंधी नुकसान की आशंका थी। इसी बीच Meta पर संभावित रूप से 200 अरब डॉलर तक के जुर्माने का खतरा भी बताया गया।
17.1 अरब डॉलर के समझौते पर सहमति
कानूनी दबाव के बीच Meta ने अमेरिका के 47 राज्यों, डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया और अमेरिकी क्षेत्रों के साथ करीब 17.1 अरब डॉलर, यानी लगभग 1.42 लाख करोड़ रुपये, के समझौते पर सहमति जताई।
मुख्य मुकदमे की सुनवाई शुरू होने से करीब छह दिन पहले Meta के नए मुख्य कानूनी अधिकारी क्रिस महोनी ने राज्यों के अटॉर्नी जनरल के साथ बातचीत शुरू की। 6 अगस्त को वह टेनेसी की राजधानी नैशविले पहुंचे, जहां समझौते को लेकर बातचीत हुई।
इसके बाद 10 अगस्त को यूएस नाइंथ सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने Meta की अंतिम याचिका भी खारिज कर दी। इससे कंपनी पर समझौते का दबाव और बढ़ गया।
अब Facebook और Instagram में क्या बदलाव होंगे?
समझौते का सबसे बड़ा असर किशोर उपयोगकर्ताओं के लिए Meta के प्लेटफॉर्म के संचालन पर पड़ सकता है। समझौते के तहत 18 वर्ष से कम उम्र के यूजर्स के लिए कंपनी को अपने प्लेटफॉर्म और एल्गोरिदम में कई बदलाव करने होंगे।
बताए गए प्रमुख बदलावों में शामिल हैं:
• रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक किशोरों के खातों पर डिफॉल्ट प्रतिबंध।
• सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक स्कूल समय में पुश नोटिफिकेशन पर रोक।
• किशोरों के लिए रोजाना अधिकतम दो घंटे का स्क्रीन टाइम, जिसे माता-पिता की अनुमति से बढ़ाया जा सकेगा।
• किशोरों के लिए Reels और Feed में लगातार स्क्रॉल करते रहने वाले फीचर्स पर प्रतिबंध।
• 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के खातों की पहचान कर उन्हें बंद करने की व्यवस्था।
सिर्फ जुर्माना नहीं, प्लेटफॉर्म के काम करने के तरीके में भी बदलाव
Meta के लिए यह समझौता केवल अरबों डॉलर की आर्थिक देनदारी तक सीमित नहीं है। इसकी अहमियत इसलिए भी बड़ी है क्योंकि इसमें बच्चों और किशोरों के लिए Facebook और Instagram के इस्तेमाल के तरीके में बदलाव की शर्तें शामिल हैं।
यानी कंपनी को अब सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं उठाना पड़ सकता, बल्कि किशोर यूजर्स को प्लेटफॉर्म पर किस तरह का कंटेंट और नोटिफिकेशन मिलेगा, वे कितनी देर तक प्लेटफॉर्म इस्तेमाल कर पाएंगे और बच्चों के अकाउंट की निगरानी कैसे होगी—इन सभी पहलुओं पर बदलाव करने होंगे।
कुल मिलाकर, Meta के खिलाफ यह कानूनी लड़ाई सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और प्लेटफॉर्म के बिजनेस मॉडल पर चल रही बहस को एक बार फिर केंद्र में ले आई है।


