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बस्ती विकास भवन में ‘महाघोटाला’: करोड़ों डकार गई ‘लापता’ फर्म, भ्रष्टाचारियों को बचा रहे ‘साहब’!

बीडीओ-सीडीओ की 'डील' या भ्रष्टाचारियों से यारी? 4 साल से फाइलों में दफन है गबन की रिपोर्ट!

अजीत मिश्रा (खोजी)

विकास भवन की ‘फाइलों’ में दफन हुआ करोड़ों का घोटाला, ‘मुखिया’ की सरपरस्ती में फल-फूल रहा भ्रष्टाचार!

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)

  • वाह रे बनकटी ब्लॉक! जहाँ बीडीओ से लेकर रोजगार सेवक तक… सब ‘चोरों की मंडली’ में शामिल!
  • कागजों पर करोड़ों का भुगतान, जमीन पर सिर्फ 4 \times 2 का बोर्ड; जीएसटी चोरी पकड़ी पर अफसर मौन!
  • भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग लड़ रहे 70 साल के बुजुर्ग पर जानलेवा हमला, पुलिस-प्रशासन ने फेरा मुंह!

बस्ती। सुनने और पढ़ने में भले ही अजीब लगे, लेकिन यह उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के विकास तंत्र का कड़वा और नंगा सच है—जहाँ विकास के ‘मुखिया’ ही भ्रष्टाचार के सबसे बड़े ‘मददगार’ बन बैठे हैं! शासन की मंशा चाहे भ्रष्टाचार पर ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यहाँ करोड़ों के गबन के पुख्ता सबूतों को भी विकास भवन के साहबान डस्टबिन में डाल चुके हैं। अगर ऐसा नहीं होता, तो चार साल से फाइलों में तैर रही बीडीओ की जांच रिपोर्ट पर अब तक आन्वी कांस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स के प्रोपराइटर और प्रधान मीरा देवी के बेटे रजनीश शर्मा के खिलाफ विधिक कार्रवाई और गबन के पैसों की वसूली हो चुकी होती।

कागजों पर करोड़ों का भुगतान, जमीन पर ‘लापता’ है फर्म!

​भ्रष्टाचार की क्रोनोलॉजी को समझिए। बनकटी ब्लॉक के ग्राम सूरापार के एक जागरूक नागरिक राजेंद्र प्रसाद शुक्ल ने मनरेगा में करोड़ों के गोलमाल की शिकायत की थी। बीडीओ ने जब जांच की, तो परतें उखड़ती चली गईं। रिपोर्ट में साफ लिखा है कि जिस ‘आन्वी कांस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स’ को मनरेगा के तहत करोड़ों रुपये ट्रांसफर कर दिए गए, वह बताए गए पते (छतौरा) पर कहीं अस्तित्व में ही नहीं है!

फर्जीवाड़े की हद देखिए: मौके पर सिर्फ 4 \times 2 फीट का एक बोर्ड टंगा मिला। मकान मालिक ने साफ कह दिया कि इस फर्म का काम यहाँ नहीं, बल्कि कहीं और से होता है और यह सिर्फ निजी लाभ के लिए बनाई गई है। इस फर्जी फर्म का प्रोपराइटर कोई और नहीं, बल्कि ग्राम प्रधान का बेटा है, जो मनरेगा में वेंडर के रूप में रजिस्टर्ड है। बड़े से बड़े भ्रष्टाचारी को जेल भेजने के लिए क्या इससे बड़ा कोई सबूत हो सकता है?

 

साहबों की ‘डील’ या भ्रष्टाचारियों से यारी?

​वाह रे सीडीओ साहब! इतने पुख्ता सबूतों को आपने ठंडे बस्ते में डाल दिया। आखिर क्यों? यह जांच और कौतूहल का विषय है। शिकायतकर्ता का सीधा आरोप है कि इस पूरे मामले में विकास भवन के बड़े साहब और प्रधान पुत्र के बीच ‘मोटी डील’ हुई है। जब विकास के रखवाले ही डील करने लगें, तो अपराधियों के हौसले बुलंद होना लाजिमी है।

​तमाशा तो तब हुआ जब सीडीओ साहब ने बीडीओ से इस बाबत पूछा। बीडीओ साहब ने झूठ का सहारा लेते हुए कह दिया कि “सर, मामला हाईकोर्ट में पेंडिंग है।” लेकिन जब शिकायतकर्ता ने पोल खोली कि कोई मामला पेंडिंग नहीं है, तो बीडीओ साहब बगलें झांकने लगे और ‘सॉरी’ बोलते हुए रिपोर्ट लाने की बात कही। इसके बाद 24 पन्नों की अकाट्य रिपोर्ट साक्ष्यों के साथ सीडीओ को सौंपी गई, लेकिन नतीजा? ढाक के तीन पात! जब बीडीओ से लेकर सीडीओ तक भ्रष्टाचारियों की ढाल बन जाएं, तो कार्रवाई की उम्मीद किससे की जाए?

जीएसटी की चोरी पकड़ी, पर साहबान आंखें मूंदे रहे

​इस घोटाले की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा इससे लगाइए कि जीएसटी विभाग ने इस फर्जीवाड़े में 4 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी पकड़ी है और 16 लाख रुपये जमा करने का आदेश भी दिया। जब जीएसटी की टीम मौके पर जांच के लिए गई, तो प्रधान और उसके दबंग बेटे ने इतना बवाल काटा कि टीम को उल्टे पैर वापस लौटना पड़ा। यही नहीं, शिकायतकर्ता पर जानलेवा हमला तक किया गया।

70 साल के बुजुर्ग पर हमला, पुलिस भी मौन!

​एक तरफ सूबे के मुख्यमंत्री अपराधियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हैं, वहीं बस्ती में एक 70 साल से अधिक उम्र का बुजुर्ग पिछले चार साल से अकेले भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग लड़ रहा है। मदद तो दूर, उस बुजुर्ग पर जानलेवा हमला कराया जाता है। बुजुर्ग ने थाने में तहरीर दी, एसपी साहब से भी गुहार लगाई, लेकिन मजाल है कि कोई एफआईआर दर्ज हुई हो! आखिर भ्रष्टाचारियों के हाथ कितने लंबे हैं?

ब्यूरो की टिप्पणी: चोरों की मंडली से कैसे बनेगा ‘मॉडल गांव’?

​ जिस ब्लॉक और ग्राम में चोरों की पूरी की पूरी मंडली ही सक्रिय हो, वह ब्लॉक और गांव आखिर ‘मॉडल’ कैसे बनेगा? बनकटी ब्लॉक में निजाम बदला, चेहरे बदले, लेकिन नहीं बदला तो भ्रष्टाचार का यह घिनौना खेल। इस नए निजाम को विरासत में इतना भ्रष्टाचार मिला है कि अगर नए ‘नकली प्रमुख’ सिर्फ इस ब्लॉक के भ्रष्टाचार को ही सुधार लें, तो यह उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।

 

​अब जनता पूछ रही है—साहब! इस खुली लूट पर आपकी चुप्पी कब टूटेगी? या फिर फाइलों का पेट भरकर करोड़ों की इस डकैती को दबा दिया जाएगा?

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