

“पद का घमंड, अहंकार और मगरूरी नहीं चलेगी”
लोणी, प्रतिनिधि :राजनीति में पद से ज्यादा जनता का विश्वास महत्वपूर्ण होता है और सत्ता का उपयोग जनसेवा के लिए होना चाहिए, ऐसा स्पष्ट संदेश देते हुए डॉ. सुजय विखे पाटील ने विरोधियों पर जोरदार निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें विधायक बनना होता तो वे दो महीने पहले ही बन गए होते, लेकिन पद प्राप्त करना उनका उद्देश्य कभी नहीं रहा।
प्रवरा बैंक की यूपीआई बैंकिंग सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम में बोलते हुए डॉ. विखे ने कहा कि आज कुछ लोग जिन पदों का आनंद ले रहे हैं, वे पद हमने स्वेच्छा से छोड़े हैं। पद मिलने के बाद उसका उपयोग जनहित के लिए होना चाहिए, न कि अहंकार, घमंड और सत्ता प्रदर्शन के लिए।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग चेयरमैन बनने की दौड़ में हैं, कुछ विधायक बनने की इच्छा रखते हैं, लेकिन जनता के बीच रहने और समाजसेवा के लिए किसी पद की आवश्यकता नहीं होती। जनता का प्यार और विश्वास ही सबसे बड़ी ताकत है।
अपने राजनीतिक अनुभवों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पद स्थायी नहीं होता, लेकिन जनता से जुड़ा रिश्ता हमेशा कायम रहता है। इसलिए जमीन से जुड़े रहकर काम करना ही असली राजनीति है।
विखे परिवार की सामाजिक और राजनीतिक विरासत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दशकों से जनता का जो प्रेम मिला है, वही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है। सत्ता के कारण जनता से दूरी बनाना उचित नहीं है।
विरोधियों पर व्यंग्य करते हुए उन्होंने कहा, “पिछले छह महीनों में हमने अपनी ताकत दिखा दी है। अब ज्यादा बोलने की जरूरत नहीं। दिमाग का डॉक्टर कुछ समय बाहर था, इसलिए कुछ मनोरोगी बाहर आने लगे थे। अब डॉक्टर वापस आ रहा है और सबका इलाज करेगा।” उनके इस बयान से कार्यक्रम स्थल पर हंसी और राजनीतिक हलचल दोनों देखने को मिली।
अहिल्यानगर जिले में आगामी सहकारी संस्थाओं और स्थानीय निकाय चुनावों की पृष्ठभूमि में डॉ. सुजय विखे के इस आक्रामक और राजनीतिक संदेश की चर्चा तेज हो गई है।









