
*मलेरिया विभाग की योजनाएं कागजों पर हो रही संचालित, शहर में बढ़ा मच्छरों का प्रकोप*
*मच्छर दिवस पर जनजागरूकता के दावे, लेकिन धरातल पर दवा छिड़काव और मच्छरदानी वितरण का अभाव*
*योजनाओं के क्रियान्वयन और खर्च की उच्चस्तरीय जांच की मांग*

जिला ब्योरों गोपाल मारु की रिपोर्ट 9993454360
धार। बारिश के मौसम के शहर और जिले में मच्छरों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। मच्छरों के कारण आम लोगों में मलेरिया, डेंगू सहित अन्य बीमारियों का खतरा बना हुआ है। ऐसे समय में मलेरिया विभाग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। विभाग को मच्छरों की रोकथाम के लिए दवा का छिड़काव, लार्वा नियंत्रण, मच्छरदानी एवं आवश्यक दवाओं का वितरण तथा व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाना चाहिए। इसके बावजूद शहर में इन व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
*मलेरिया विभाग द्वारा 20 अगस्त को मच्छर दिवस मनाया, पोस्टर-बैनर तक सीमित अभियान के आरोप*
जिला मलेरिया अधिकारी धर्मेंद्र जैन के नेतृत्व में 20 अगस्त को मच्छर दिवस मनाए जाने की बात सामने आई है। इस दौरान लोगों को मच्छरों से बचाव के उपायों की जानकारी देने और जनजागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है। आरोप है कि मलेरिया विभाग द्वारा पोस्टर-बैनर जिला अस्पताल में लगाकर कार्यक्रम की औपचारिकता पूरी कर दी गई है। फोटो और वीडियो तैयार कर समाचार प्रकाशित करवाने के बाद अभियान की इतिश्री कर ली जाती है, जबकि वास्तविक रूप से उन क्षेत्रों तक जागरूकता और बचाव की व्यवस्थाएं नहीं पहुंच रही हैं जहां मच्छरों का सबसे अधिक प्रकोप है।
*गरीब मलीन बस्तियों में मच्छरदानी और दवा वितरण की मांग*
बारिश के दिनों में गरीब मलिन बस्तियों और ऐसे क्षेत्रों में जहां पानी जमा रहता है, मच्छरों का प्रकोप अधिक रहता है। इन क्षेत्रों में नियमित रूप से दवा का छिड़काव, लार्वानाशक गतिविधियां और मच्छरदानी का वितरण किया जाना आवश्यक है। लोगों का कहना है कि शहर के अनेक क्षेत्रों में इस प्रकार की प्रभावी कार्रवाई दिखाई ही नहीं आ रही है। यदि विभाग द्वारा योजनाएं संचालित की जा रही हैं तो उनका लाभ आम नागरिकों तक पहुंचना भी दिखाई देना चाहिए।
*कागजों पर योजनाएं चलने के आरोप*
मलेरिया विभाग पर शासन की जनहितकारी योजनाओं को केवल कागजों पर संचालित करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप है कि अभियान के नाम पर पोस्टर-बैनर और अन्य गतिविधियां दिखाकर उनके बिल प्रस्तुत किए जाते हैं, जबकि धरातल पर अपेक्षित कार्य दिखाई नहीं देता। सरकारी धनराशि के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
हालांकि, फर्जी बिल लगाने अथवा शासकीय धनराशि के दुरुपयोग के आरोपों की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच के बाद ही उनकी पुष्टि हो सकती है। इसलिए विभाग द्वारा किए गए खर्च, बिल-वाउचर, दवा की खरीदी, छिड़काव का रिकॉर्ड, मच्छरदानी वितरण तथा जनजागरूकता कार्यक्रमों के दस्तावेजों की जांच किए जाने की मांग की गई है।
*रिकॉर्ड और धरातल की जांच से सामने आ सकता है सच*
यदि मलेरिया विभाग के रिकॉर्ड में पूरे जिले में दवा छिड़काव, मच्छरदानी वितरण और जनजागरूकता अभियान संचालित होना दर्शाया गया है, तो प्रशासन को संबंधित स्थानों का भौतिक सत्यापन भी कराना चाहिए। किस क्षेत्र में कब दवा का छिड़काव हुआ, कितनी दवा खरीदी गई, कितनी मच्छरदानियां वितरित की गईं और किन स्थानों पर अभियान आयोजित किए गए—इन सभी बिंदुओं की जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
*आम लोगों को शासन की योजनाओं का वास्तविक लाभ मिले* मच्छर दिवस केवल पोस्टर-बैनर और फोटो तक सीमित न रहकर वास्तविक जनजागरूकता का माध्यम बने, यही इसकी सार्थकता होगी। शहर में नियमित फॉगिंग और दवा छिड़काव, जलभराव वाले स्थानों पर लार्वा नियंत्रण, गरीब एवं संवेदनशील बस्तियों में मच्छरदानी वितरण तथा घर-घर जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है।
वर्तमान परिस्थितियों में मलेरिया विभाग के अधिकारी धर्मेंद्र जैन की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मैदानी सत्यापन और विभागीय खर्च की उच्चस्तरीय जांच कराई जाना आवश्यक है। जांच में यदि अनियमितता मिलती है तो जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।








