

गंगा की तेज धारा के आगे 40 करोड़ की लागत से एसीबीएम (आर्टिकुलेटिंग कांक्रीट ब्लाक मैट्रेस) तकनीक से बनाया गया रावली-बैराज तटबंध लगातार बैठता जा रहा है।
शुक्रवार को तटबंध एक स्थान पर ऐसे बैठ गया जैसे वहां से टूट ही गया हो। गंगा की तेज धारा लगभग 100 मीटर के पैच पर तटबंध से तेजी से टकरा रही हैं। धारा को तटबंध से टकराने से रोकने के लिए सिंचाई विभाग यहां पर रेत की बोरी और सीमेंट के पिंजरों पर पेड़ों की शाखा बांधकर डाल रहा है। तटबंध को सुरक्षित रखने के पूरे प्रयास किया जा रहे हैं। गांव वाले भी गंगा किनारे आकर तटबंध की स्थिति को देख रहे हैं।
पहाड़ों पर बरसात रूकने से गंगा का जलस्तर थोड़ा थोड़ा कम हो रहा है। गुरुवार को तीन गांवों में मालन का पानी भर गया था लेकिन अब रात में पानी गांवों से निकल गया। हालांकि रावली-शहजादपुर रपटे पर अभी भी मालन का पानी चल रहा है। गंगा का जलस्तर भले ही कम हो रहा हो लेकिन उसकी धारा के प्रवाह की रफ्तार पहले की तरह बरकरार है।
गुरुवार को गंगा की तेज धारा से रावली बैराज तटबंध पर लगभग 100 मीटर तक टक्कर मार रही थी। तटबंध एक-दो जगह बैठ गया था और उसमें कई जगह दरार आ गईं थीं। वन विभाग ने तटबंध को तेज धारा से बचाने के लिए गुरुवार को ही रेत की बोरी, सीमेंट के पिंजरे आदि जुटा लिए थे। सिंचाई विभाग अब तटबंध की दरारों को भर रहा है।
शुक्रवार को तटबंध पर धारा और तेजी से टकराती रहीं। तटबंध एक जगह तो इस तरह से नीचे बैठ गया है जैसे वहां से टूट ही गया हो। पक्के तटबंध को गंगा की तेज धारा से बचाने के लिए अब सिंचाई विभाग पिछले साल की तरह रेत की बोरी और सीमेंट के पिलरों पर पेड़ों की शाखा बांधकर बनाए गए पिंजरों का सहारा ले रही है।
जेसीबी और क्रेन से वहां काम किया जा रहा है। सिंचाई विभाग के अधिकारी तटबंध पर ही डेरा डाले हैं। वहां आने वाले ग्रामीण तटबंध टूटने की आशंका जता रहे हैं। इस पर सिंचाई विभाग के अधिकारी उनसे तटबंध लचकदार होने और उसे कोई खतरा न होने की बात कह रहे हैं।









