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ट्यूब के सहारे नदी पार कर पढ़ाई करने स्कूल पहुंचते हैं कमार जनजाति के बच्चे कुछ वर्ष पहले हो चुकी है एक छात्र की मौत l

ट्यूब के सहारे नदी पार कर पढ़ाई करने स्कूल पहुंचते हैं कमार जनजाति के बच्चे कुछ वर्ष पहले हो चुकी है एक छात्र की मौत l

ट्यूब के सहारे नदी पार कर पढ़ाई करने स्कूल पहुंचते हैं कमार जनजाति के बच्चे कुछ वर्ष पहले हो चुकी है एक छात्र की मौत l

गरियाबंद – जिले के दूरस्थ वनांचल ग्रामों में छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के 24 वर्ष बाद भी विशेष पिछड़ी कमार जनजाति आदिवासी बच्चों को हाईस्कूल की पढ़ाई करने जान जोखिम में डालकर स्कूल तक पहुंचना पड़ रहा है। तब कही जाकर उन्हे शिक्षा नसीब हो पाती है। तहसील मुख्यालय मैनपुर से महज 17 किमी दूर गरियाबंद विकासखण्ड के अंतिम छोर में बसा ग्राम जरण्डी, बोड़ापाला के दर्जनभर स्कूल के छात्र-छात्राएं बाकड़ी नदी को तैरकर या फिर वाहनों के ट्यूब के सहारे पारकर धवलपुर हाईस्कूल पहुंचते हैं तब उन्हे शिक्षा प्राप्त होती है। ज्ञात हो कि यह बाकड़ी नदी आगे चलकर सिकासार जलाशय में मिलता है और यह काफी चौड़ा नदी है यहां बारिश के पूरे चार माह कमर तक पानी चलते रहता है और बारिश होने पर जंगलो तथा पहाड़ी ईलाके के पानी आने से यह नदी अचानक उफान पर आ जाता है। कुछ वर्श पहले इस बाकड़ी नदी को ग्राम जरण्डी बोलापाला की एक छात्र जो हाईस्कूल धवलपुर पढ़ाई करने आ रही थी और अचानक नदी में बाढ़ आ जाने से नदी पार करते समय ट्यूब पलट जाने से छात्र की बह जाने से मौत हो गई थी तो मंत्री, विधायक, सांसद, उच्च अफसर यहां पहुंचकर इस नदी में पुल निर्माण करवाने का आश्वासन दिया था लेकिन अब तक इस नदी पुल निर्माण की मांग पर नहीं दे रहे ध्यान जनपद सदस्य चंदा बारले ने बताया जनसमस्या निवारण शिविर में कलेक्टर को आवेदन देकर बाकड़ी नदी में पुल निर्माण की मांग कर चूके है इसके पूर्व ही विधायक सासंद एवं मंत्र तक को आवेदन दे चूके हैं। श्रीमती बारले ने बताया की छात्र-छात्राओं को स्कूल तक आने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जन जोखिम में डाल कर छात्र स्कूल तक पहुंचते हैं।

जरण्डी स्कूल में 28 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत
तहसील मुख्यालय मैनपुर से 17 किलो मीटर दूर ग्राम पंचायत जंगल धवलपुर के आश्रित ग्राम जरण्डी बोड़ापाला, टोरीमुई की जनसंख्या लगभग 400 के आसपास है और ग्राम जरण्डी में प्राथमिक शाला तक की शिक्षा की व्यवस्था है। जहां वर्तमान में 28 छात्र-छात्राएं अध्ययनस्त है। इन्हें पढ़ाने के लिए एक मात्र शिक्षक की व्यवस्था किया गया है। यह क्षेत्र हाथी प्रभावित क्षेत्र भी है और हमेशा जंगली हाथियों का इस क्षेत्र में डेरा आम बात है इस क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिक एवं जंगलधवलपुर के पूर्व सरपंच कन्हैया ठाकुर, सरपंच बिन्देश्वरी, हबीब मेमन, केदार सिंह दाउ, लखनगिरी गोस्वामी, गोपालसिंह विष्णुराम देवीसिंह साडे, लक्ष्मण ओटी रामसिंह सोरी, बालकिशन ध्रुव, सोनधर मरकाम, रामनाथ सोरी, कन्हैया, हेमसिंह नेताम व क्षेत्र के ग्रामीणों ने बताया यह इस क्षेत्र के सबसे बड़ी नदी है और बारिश के इन दिनों में जुलाई, अगस्त व सितम्बर में यहां कमर तक तीन माह तक पानी चलता है और इसी नदी को पारकर स्कूली छात्र ट्यूब के सहारे या कभी तैरकर स्कूल तक पहुंचते है तो ग्रामीण राशन लेने भी इसी तरह आते है सबसे ज्यादा परेशान गर्भवती महिलाओं को होती है। उन्हें भी इस नदी को खाट के माध्यम से पार करा कर अस्पताल तक पहुंचाया जाता है। ग्रामीणों ने बताया जरण्डी, बोड़ापाला क्षेत्र से लगभग 15 से 20 छात्र हाईस्कूल व कॉलेज की पढ़ाई करने नदी पार कर आते है।

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