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कवि शंकर कैमूरी के कविता पाठ धाम से पूछो कि धर्म का अर्थ क्या होता है, प्रेम का अर्थ श्याम से पूछो, कि कितने मीठे हैं बेर शवरी के पूछना है तो राम से पूछो — से शुरू हुआ हिन्दी पखवाड़ा समारोह

हिन्दी पखवाड़ा समारोह पर कवि सम्मेलन आयोजित

अहमद आजमी की कविता पाठ मेरे भारत की शान है हिन्दी, भारतेन्दु की जान है हिन्दी —-, पर श्रोताओं ने बिखेरी तालियों की गुंज

कवयित्री पूनम श्रीवास्तव ने मान रखती हूँ शान रखती हूँ जान देकर इमान रखती हूँ —- कविता पाठ से श्रोताओं को झुमाया

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गडहनी। हिन्दी पखवाड़ा समारोह के अवसर पर प्रखण्ड परिसर मे कवि सम्मेलन सह हिन्दी पखवाड़ा का आयोजन किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ प्रखण्ड प्रमुख बिनोद सिंह, उपप्रमुख पुष्पा देवी, प्रखण्ड विकास पदाधिकारी अर्चना कुमारी, कार्यपालक पदाधिकारी नगर पंचायत गडहनी, समिति मोहन राम, उपप्रमुख प्रतिनिधि संजीत चन्द्रवंशी, मुख्य पार्षद प्रतिनिधि तस्लीम आरिफ, समिति प्रतिनिधि विनय पासवान, राधेश्याम, मुखिया मनीषा देवी, कवि शंकर कैमूरी, अहमद आजमी, डाॅ धर्म प्रकाश मिश्र एवं कवयित्री पुनम श्रीवास्तव के द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।

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इस अवसर पर कवि शंकर कैमूरी द्वारा हिन्दी के महत्व एवं उपयोगिता पर बिचार प्रकट करते हुए कहा कि हिन्दी हमारी मातृभाषा है, हिन्दी हमारी आन बान शान है।हमे हिन्दी बोलने लिखने पढने मे संकोच नही करना चाहिए। आइये आज हम सभी संकल्प लें कि हिन्दी अपनायेंगे और इसे मिटने से बचायेंगे।कार्यक्रम को आगे बढाते हुए उन्होंने अपनी कविता धाम से पूछो कि धर्म का अर्थ क्या होता है, प्रेम का अर्थ श्याम से पूछो, कि कितने मीठे हैं बेर शवरी के, पूछना है तो राम से पूछो — से महफिल को संजो दिया।

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वहीं उन्होंने कवि अहमद आजमी को कविता पाठ के लिए आमंत्रित किया।कवि अहमद आजमी ने अपनी कविता मेरे भारत की शान है हिन्दी, भारतेन्दु की जान है हिन्दी, ए है तुलसी कबीर की वाणी, है हरजवां से महान हिन्दी, और हम जो हिन्दी दिवस मनाते हैं, उर्दू वाले भी मुस्कुराते हैं, पर जब मैं हिन्दी हाथ मे लेकर शान भारत की हम बढाते हैं —- जैसे कविता पाठ पर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।

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वहीं कवयित्री पुनम श्रीवास्तव ने अपनी कविता दिल मे अपने तुम्हारा ही गम रख लिया, हमने उल्फत का तेरी भरम रख लिया, तुम अंधेरे बिछाते रहे राह मे, इसलिए नाम मैने पुनम रख लिया और मान रखती हूँ शान रखती हूँ जान देकर इमान रखती हूँ, सरजरे से प्यार है मुझको, दिल मे हिन्दुस्तान रखती हूँ, और एक नई जिन्दगी जो पाई है मेरे पुरखों की कमाई है, कितने माओं के धूल गये सिन्दूर तब चमन मे बहार आई है, वहीं बरसी आंख मेरी देख लो बादल की तरह तुम्हारे प्यार मे मै हो गई पागल की तरह — और यकीन रह गया सारे इरादे टुट गये — कविता पाठ ने महफिल मे समां बांधे रखा।

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इस अवसर पर डाॅ धर्म प्रकाश मिश्र ने अपनी कविता मंच को प्रणाम मंचकारो को प्रणाम मेरा राज भाषा हिन्दी कथन को प्रणाम है — और नारी की जप तप पर टिकी है वसुन्धरा ये नही रही नारी तो ये सृष्टि क्रम कट जायेगी — जैसे कई कविताओं से श्रोताओं को झुमाया।इस अवसर पर कविता पाठ कर कवियों ने श्रोताओं की खूब तालियाँ बटोरी।

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कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रखण्ड प्रमुख बिनोद सिंह एवं संचालन उपप्रमुख पुष्पा देवी के द्वारा किया गया।इस अवसर पर उपप्रमुख प्रतिनीधि संजीत चन्द्रवंशी व अन्य सहयोगियों के द्वारा कार्यक्रम मे आये अतिथि गण का सम्मान अंगवस्त्र व फूलमाला से किया गया। मौके पर उपप्रमुख प्रतिनिधि संजीत चन्द्रवंशी, प्रखण्ड शिक्षा पदाधिकारी, बीपीएम, अभिनव कुमार, अरूण कुमार सिंह, राम प्रवेश सिंह कुशवाहा, इमरान अहमद उर्फ सोनु, अमरेन्द्र यादव, यशवंत कुमार, मनु तिवारी, शहनवाज आलम, पंकज कुमार, विनय कुमार पाण्डेय अमजद हुसैन, कुमार गौरव, सहित प्रखण्ड स्तरीय कर्मी पदाधिकारीगण एवं स्थानीय जनता उपस्थित थे।

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