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भगवान श्रीकृष्ण का वांग्मय स्वरूप है, श्रीमद्भागवत -पं रामशिरोमणि

पूरे तुला उपाध्यायपुर में बह रही भागवत की रसधार

भगवान श्रीकृष्ण का वांग्मय स्वरूप है, श्रीमद्भागवत -पं रामशिरोमणि

लालगंज,प्रतापगढ़: सांगीपुर इलाके के पूरे तुला उपाध्यायपुर गांव में कैलाशनाथ उपाध्याय के संयोजन में आयोजित संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन कथा व्यास भागवत मर्मज्ञ पं रामशिरोमणि पांडेय जी महराज ने कहा कि परमात्मा की प्राप्ति निष्काम भाव व सच्चे मन से आराधना करने पर ही सम्भव है।भागवत सुख, समृद्धि व वैभव प्रदान करने के साथ ही मानव को मोक्ष प्रदान करता है।

कथा व्यास ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण भगवान श्रीकृष्ण का वांग्मय स्वरूप है।
उन्होंने पूतना चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि पूतना राक्षसी ने श्रीकृष्ण को उठा लिया और स्तनपान कराने लगी। भगवान श्रीकृष्ण ने स्तनपान करते-करते ही पूतना का वध कर उसका कल्याण किया। माता यशोदा जब भगवान श्री कृष्ण को पूतना के वक्षस्थल से उठाकर लाती है। उसके बाद पंचगव्य गाय के गोबर, गोमूत्र से भगवान को स्नान कराती है।कथा व्यास श्री पांडेय ने कहा कि सभी को गौ माता की सेवा, गायत्री का जाप और गीता का पाठ अवश्य करना चाहिए। गाय की सेवा से 33 करोड़ देवी देवताओं की सेवा हो जाती है।पृथ्वी ने गाय का रूप धारण करके श्रीकृष्ण को पुकारा तब श्रीकृष्ण पृथ्वी पर आये हैं। इसलिए वह मिट्टी में नहाते, खेलते और खाते हैं ताकि पृथ्वी का उद्धार कर सकें।
कथा व्यास ने कहा कि एक बार गोपबालकों ने जाकर यशोदामाता से शिकायत कर दी–’मां तेरे लाला ने माटी खाई है। यशोदामाता हाथ में छड़ी लेकर दौड़ी आयीं,अच्छा खोल मुख ,माता के ऐसा कहने पर श्रीकृष्ण ने अपना मुख खोल दिया। श्रीकृष्ण के मुख खोलते ही यशोदाजी ने देखा कि मुख में चर-अचर सम्पूर्ण जगत विद्यमान है। श्री कृष्ण ने देखा कि मैया ने तो मेरा असली तत्त्व ही पहचान लिया है। श्री कृष्ण ने सोचा यदि मैया को यह ज्ञान बना रहता है तो हो चुकी बाललीला, फिर तो वह मेरी नारायण के रूप में पूजा करेगी। न तो अपनी गोद में बैठायेगी, न दूध पिलायेगी और न मारेगी। जिस उद्देश्य के लिए मैं बालक बना वह तो पूरा होगा ही नहीं। यशोदा माता तुरन्त उस घटना को भूल गयीं।
कथा व्यास ने कथा को धार देते हुए कहा कि जब ब्रजवासियों ने इंद्र की पूजा छोड़कर कर गिरिराज जी की पूजा शुरू कर दी तो इंद्र ने कुपित होकर ब्रजवासियों पर मूसलाधार बारिश की, तब कृष्ण भगवान ने गिरिराज को अपनी कनिष्ठ अंगुली पर उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की और इंद्र का मान मर्दन किया। तब इंद्र को भगवान की सत्ता का अहसास हुआ और इंद्र ने भगवान से क्षमा मांगी व कहा हे प्रभु मैं भूल गया था की मेरे पास जो कुछ भी है वो सब कुछ आप का ही दिया है। कथा के दौरान कथा ने भगवान श्रीकृष्ण की विविध बाल लीलाओं का मनोहारी वर्णन कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। वहीं संगीतमयी भजन की प्रस्तुति से श्रोता मंत्रमुग्ध नजर आये।
आयोजक यजमान कैलाशनाथ उपाध्याय ने सभी के प्रति आभार जताया।मौके पर बद्रीनाथ मिश्र,रामकुबेर मिश्र,पं दिवाकर पांडेय,सुधांसु मिश्र, ओमप्रकाश उपाध्याय,वंशीधर उपाध्याय,कृष्णाशंकर पांडेय, राजेश पाण्डेय, अभिषेक उपाध्याय, संदीप उपाध्याय, राजेंद्र उपाध्याय, कृष्णपाल उपाध्याय आदि मौजूद रहे।

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