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विधि के विद्यार्थीयो ने आभासी न्यायालय में न्यायाधीश, अधिवक्ता, गवाह, स्टेनोग्राफर, प्लीडर की निभाई भूमिका

विधि संकाय में आभासी न्यायालय (मूट कोर्ट) का प्रस्तुतीकरण

IMG 20241130 WA0007श्रवण साहू,धमतरी। बीसीएस शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय धमतरी के विधि संकाय में मूट कोर्ट एक्सरसाइज एवं इटर्नशीप विषय के अन्तर्गत अभासी न्यायालय मूट कोर्ट का आयोजन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विनोद कुमार पाठक के निर्देशानुसार तथा विधि विभागाध्यक्ष दुर्गेश प्रसाद तथा विषय संयोजक श्रीमती गायत्री लहरे तथा डॉ. सपना ताम्रकर, प्रो. पंकज जैन, प्रो. कोमल प्रसाद यादव, डॉ. प्रेमनाथ भारती के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।

प्रथम काल्पनिक मामला भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 103 हत्या से संबंधित था जिसमें अभियुक्त पर आरोप था कि उससे मृतक की हत्या गला दबाकर किया था तथा हत्या के आरोप से बचने तथा उस आत्महत्या साबित करने हेतु मृतक के गले में गमछा बांधकर म्यार टाँग दिया था। सत्र न्यायालय ने अभियोजन पक्ष तथा बचाव पक्ष के गवाहों, सबूतो तथा तर्कों को सुनने के उपरांत न्यायालय ने साक्ष्य के अभाव में अभियुक्त को दोषमुक्त कर दिया तथा उसे तत्काल रिहा करने का आदेश जारी किया। प्रथम मामले में टिकेश्वर सिन्हा अभियोजन की अधिवक्ता अंकिता बंछोर, चमेली, माधुरी साहू, वर्षा साहू, दशरथ सिन्हा, सुभाष, तुमेश सिन्हा, तरूण साहू, दोपेश, थे तथा बचाप पक्ष के अधिवक्ता ज्योति सोनी, गीतांजली यादव, हीना यादव, मीनू कोल, तुषार देवांगन, फलेश निर्मलकर, करण, हेमचरण साहू। सिविल मामले के अन्तर्गत हिन्दू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 13 (1) के अंतर्गत विवाह-विच्छेद संबंधी मामला प्रस्तुत किया गया जिसमें वादी अपने वैवाहिक जीवन से तंग आकर विवाह-विच्छेद हेतु न्यायालय में वाद प्रस्तुत किया था, इस मामले में प्रतिवादिनी ने कहा विवाह सात जन्मों का संबंध है इसको ध्यान में रखकर न्यायालय से निवेदन है कि प्रार्थिनी के दो बच्चों को, पिता की छत्र छाया में रखा जाय अर्थात् न्यायालय विवाह विच्छेद की याचिका निरस्त कर दे।

IMG 20241130 WA0006 1माननीय न्यायालय ने वादी तथाा प्रतिवादिनी के अधिवक्ता के तर्कों साक्ष्य, सबूतों तथा गवाहो के बयान के उपरान्त विवाह-विच्छेद की याचिका पारित करते हुये विवाह-विच्छेद की अनुमति प्रदान किया। इस मामले न्यायाधीश की भूमिका डिगेश्वरी थी तथा वादी के अधिवक्ता टिकेन्द्र सिन्हा, अजय कुमार, तथा प्रतिवादिनी की अधिवक्ता चित्रमाला साहू, थानेश्वर साहू, पुखराज, आदि थे। उपरोक्त दोनो प्रकरण गवाहो, स्टेनोग्राफर, टाइपिस्ट की भूमिका में विधि भाग तीन के विद्यार्थी थे इस अवसर पर प्रो. पी.सी. चौधरी, जिला न्यायालय के अधिवक्ता शंकर कुमार देवांगन तथा विधि भाग तीन, दो तथाा एक के विद्यार्थी उपस्थित थे प्राचार्य डॉ. विवके कुमार पाठक ने विद्यार्थी के प्रस्तुतीकरण की सराहना की।

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