
अंबेडकर नगर
एकलव्य स्टेडियम को द्रोणाचार्य का इंतजार है। खेल प्रतिभाओं से भरे जिले में संसाधनों के साथ ही अभी कई प्रशिक्षकों की कमी अखर रही है। अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय व राज्य स्तर से लेकर मंडल तथा महाविद्यालय समेत जिलास्तर पर स्वयं के संसाधनों के बूते प्रतिभा का लोहा मनवा चुके खिलाड़ी जिले की चमक बिखेर रहे हैं।
इसके बाद भी स्टेडियम में वाॅलीबाॅल, बैडमिंटन और बास्केटबाॅल के प्रशिक्षकों के पद रिक्त चल रहे हैं।
वर्ष 2008 में एकलव्य स्पोर्ट्स स्टेडियम की सौगात मिली। एक करोड़ 74 लाख रुपये की लागत से बहुउद्देशीय हॉल का निर्माण कराया कराया गया। एक करोड़ रुपये की लागत से वेट लिफ्टिंग हॉल भी बना। डॉरमेट्री के निर्माण पर 56 लाख रुपये और तैराकी की प्रतिभा निखारने के लिए दो करोड़ 24 लाख रुपये की लागत से तरणताल का भी निर्माण हुआ।
एक करोड़ 53 लाख रुपये की लागत से बैडमिंटन हॉल भी बनवाया गया, लेकिन आज तक यहां बैडमिंटन के प्रशिक्षक की तैनाती नहीं हो सकी है। ऐसे में इस खेल के खिलाड़ी लखनऊ, सुल्तानपुर, अयोध्या जनपद में जाकर प्रशिक्षण लेने की मजबूर हैं। यहीं नहीं जिले को वॉलीबॉल के खिलाड़ियों की नर्सरी कहा जाता है। यहां कई खिलाड़ियों ने राज्यस्तर तक अपने खेल की चमक बिखेरी। वर्ष 2020 में यहां तैनात प्रशिक्षक विकास सिंह के स्थानांतरण के बाद से वॉलीबॉल प्रशिक्षक का भी पद खाली पड़ा है। खेल विभाग चार वर्ष बीत जाने के बाद भी कोच की तैनाती ही नहीं करा सका है।
बढ़ाई जा रहीं सुविधाएं
स्टेडियम में खेल सुविधाएं तेजी से बढ़ाई जा रही हैं। कई खेलों में कोच के मार्गदर्शन में खिलाड़ियों ने जिले के बाहर जाकर नाम रोशन किया है। कोशिश है कि जल्द ही अन्य सुविधाएं भी यहां बढ़ें। -शीला भट्टाचार्या, जिला खेल अधिकारी


