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भुमका संघ के नेतृत्व में सर्व संगठन के लोगों की उपस्थिति में पंडित धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ मंडला कोतवाली में ज्ञापन सौंपा गया।

मंडला में पंडित धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ ज्ञापन सौंपा गया

IMG 20250130 WA0005 2वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़ 🌐 

मंडला MP हेमंत नायक✍️

Breaking news mandla–आज मंडला कोतवाली में भुमका संघ के नेतृत्व में सर्व संगठन के लोगों की उपस्थिति में एक ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें पंडित धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। यह ज्ञापन आदिवासी समुदाय के विभिन्न संगठनों द्वारा एकजुट होकर प्रस्तुत किया गया।

युवा आदिवासी नेता सुरेन्द्र सिंह सिरश्याम, जो भारत आदिवासी पार्टी के संभागीय अध्यक्ष भी हैं, ने इस ज्ञापन के माध्यम से अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पंडित धीरेंद्र शास्त्री और कमला मरावी द्वारा आदिवासी समुदाय पर दिए गए विवादित बयानों से आदिवासी समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। सुरेन्द्र सिंह ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि कमला मरावी द्वारा गोंडवाना और राम पार्टी के संदर्भ में की गई टिप्पणियों से आदिवासी संस्कृति और परंपराओं पर सवाल उठाया गया है, जो स्वीकार्य नहीं है।

सुरेन्द्र सिंह सिरश्याम ने आगे कहा, “पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने आदिवासी समुदाय के खिलाफ जो बयान दिए हैं, उससे हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को नुकसान पहुंचा है। वे कभी भी मूलनिवासी बहुजन समाज की स्थिति और अधिकारों के बारे में बात नहीं करते। हमें उनके बयान का विरोध करना चाहिए और जल्द से जल्द इस मामले में कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।”

इस ज्ञापन के दौरान भुमका संघ और अन्य सर्व संगठन के नेताओं ने भी अपनी एकजुटता दिखाई और पंडित धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इन नेताओं ने कहा कि इस प्रकार के बयान समाज में विघटन और अशांति उत्पन्न करने के लिए हैं, और इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

मंडला कोतवाली के अधिकारियों ने ज्ञापन को स्वीकार किया और आश्वासन दिया कि मामले की जांच की जाएगी और जल्द से जल्द उचित कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में आदिवासी समुदाय के धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रशासन को तत्परता से कदम उठाने का भरोसा दिया गया।

यह घटना मंडला जिले के आदिवासी समाज के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुकी है, जहां समाज के विभिन्न वर्गों ने मिलकर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाई है। अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और आदिवासी समाज की धार्मिक भावनाओं की रक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है।

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