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आरजी कर : न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान 

सर्मिष्ठा नाग-कोलकाता                                                                                                                                  आरजी कर : न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान                                                                                अभया के जन्मदिन के मौके पर अभया मंच की ओर से आयोजित मौन जुलूस में वेस्ट बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फ्रंट, सर्विस डॉक्टर्स फोरम, मेडिकल सर्विस सेंटर, नर्सेस यूनिटी सह अन्य चिकित्सक संगठनों के सदस्यों ने हिस्सा लिया. मौन जुलूस के आरजी कर पहुंचने पर कॉलेज परिसर में पीड़िता की याद में स्थापित मूर्ति के सामने उसे श्रद्धांजलि दी गयी. इस दौरान चिकित्सकों की ओर से सफेद गुब्बारे उड़ा कर न्याय की मांग की गयी. इस संबंध में डॉ बिप्लब चंद्र ने बताया कि 100 गुब्बारे उड़ा कर न्याय की मांग की गयी. जब तक न्याय नहीं मिल जाता, तब तक आंंदोलन जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि पीड़िता को न्याय दिलवाने के लिए कॉलेज परिसर में शपथ भी ली गयी. उन्होंने कहा कि पहले लोगों को कॉलेज परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया गया था. पर बाद में सभी को प्रवेश करने दिया गया. शांतिपूर्ण तरीके से अभया का जन्मदिन मनाया गया. अभया के जन्मदिन पर सोदपुर में लगा हेल्थ कैंप: कोलकाता. वेस्ट बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फ्रंट ने रविवार को आरजी कर कांड की मृतका के जन्मदिन पर रविवार को उत्तर 24 परगना जिले के सोदपुर में ‘अभया क्लिनिक’ नाम से हेल्थ कैंप लगाया. एक जूनियर डॉक्टर ने बताया कि 110 से अधिक मरीजों ने कैंप में स्वास्थ्य सेवा प्राप्त की. साथ ही प्रत्येक मरीज को एक-एक पौधा भी दिया गया. हमारी बहन (अभया) को पौधों से बहुत लगाव था. उसने अपना जीवन लोगों की सेवा के लिए समर्पित किया था. जन्मदिन पर अभया खाती थी गुड़ का खीर : मृतका के माता-पिता ने कहा कि अपराधियों ने हमारी खुशियां हमसे छीन लीं. पहले हम हर साल रात में उसकी ड्यूटी खत्म होने के बाद जन्मदिन मनाते थे. अब हमारे जीवन का एकमात्र लक्ष्य न्याय प्राप्त करना है. काश! हमने उसका एडमिशन आरजी कर मेडिकल कॉलेज में न कराया होता. वरना आज वह हमारे साथ होती. मृत महिला चिकित्सक की मां ने बताया कि उनकी बेटी को जन्मदिन पर गुड़ से बनी खीर खाना पसंद था. वह हर साल बेटी के जन्मदिन पर उसकी स्पेशल खीर बनाती थीं. वह पहले अपना जन्मदिन कार्यस्थल पर मनाती थी. रात को जब घर लौटती थी, तो केक काटती थी. पिछले साल उन्होंने 22,000 रुपये की एक घड़ी अपनी बेटी को दी थी. उन्होंने कहा कि उसका जन्मदिन तो हर साल आयेगा, लेकिन मेरी बेटी मुझे अब कभी वापस नहीं मिलेगी.

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