अंसल API दिवालिया घोषित, आशियाने का ख्वाब देखने वाले निवेशकों के हजारों करोड़ फंसे, अब आगे क्या होगा?
अंसल API के फ्लैट, प्लॉट, विला और कमर्शल इमारतों के प्रॉजेक्ट्स उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में भी हैं। दिवालिया घोषित किए जाने के बाद अंसल के इन प्रॉजेक्ट्स पर भी असर पड़ना तय माना जा रहा है।
लखनऊ: नैशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) ने अंसल API को दिवालिया घोषित करते हुए कंपनी के लखनऊ व नोएडा के प्रॉजेक्ट्स पर इंट्रिम रेजॉल्यूशन प्रफेशनल (IRP) बैठा दिया। इसके साथ ही इन प्रॉजेक्ट्स में प्लॉट, फ्लैट, विला और कमर्शल प्लॉटों के साथ दुकानों में निवेश करने वाले करीब तीन हजार से ज्यादा निवेशकों के हजारों करोड़ रुपये फंस गए हैं। इनमें सैकड़ों ऐसे हैं, जिन्हें कंपनी ने साल 2009 में प्लॉट और फ्लैट बेचे, लेकिन अब तक कब्जा नहीं दिया। इस बीच कंपनी के दिवालिया होने की सूचना मिलते ही लखनऊ स्थित दफ्तर पर शनिवार को सैकड़ों निवेशक जमा हो गए। कर्मचारी ऑफिस पर ताला जड़कर भाग निकले।
अंसल के लिए पिछली सरकार में बदले नियम
यूपी में हाईटेक टाउनशिप पॉलिसी के तहत साल 2003 में अंसल को करीब 1,335 एकड़ में टाउनशिप का लाइसेंस दिया गया था। डिवेलपर इसका विकास नहीं कर सका। इसके बावजूद साल 2008 में तत्कालीन सरकार ने टाउनशिप का दायरा बढ़ाकर 3,530 एकड़ कर दिया। टाउनशिप पॉलिसी के तहत केवल एक बार एक्सटेंशन मिल सकता था, लेकिन अंसल API के लिए यह नियम भी बदल दिया गया। दूसरा एक्सटेंशन देते हुए तत्कालीन सरकार ने टाउनशिप का दायरा साल 2012 में बढ़ाकर 6,500 एकड़ कर दिया।
वर्तमान सरकार ने टाउनशिप एरिया घटाया’
6,500 एकड़ की जमीन का लाइसेंस मिलने के बावजूद डिवलेपर आधी जमीन भी कभी खरीद ही नहीं सका। लेकिन उसने पूरी जमीन पर आशियाने का ख्वाब दिखाते हुए लोगों को प्लॉट, फ्लैट, विला और कमर्शल इमारतों में दुकानें बेंच दीं। डिवलेपर की इस मनमानी के खिलाफ निवेशक रेरा से लेकर हाई कोर्ट में शिकायत दर्ज करवाते रहे। इन्हीं शिकायतों को देखते हुए वर्तमान सरकार ने टाउनशिप का दायरा 6,500 एकड़ से घटाकर 4,500 एकड़ कर दिया था। इस बीच कंपनी ने डिवेलपमेंट के लिए जिस बैंक से लोन लिया, वह न चुका पाने के कारण एनसीएलटी कोर्ट से उसे दिवालिया घोषित कर दिया।
अब निवेशकों का क्या होगा?
निवेशकों को को IRP के प्रस्ताव का इंतजार करना पड़ेगा। IRP अंसल API के प्रॉजेक्ट्स का मूल्यांकन कर उसमें खाली पड़ी संपत्तियों के आधार प्रस्ताव तैयार करेगा। इस प्रस्ताव में आवंटियों की मांग का भी खयाल रखा जाएगा। इसमें काफी देर लगती है। रोहतास डिवलेपर के केस में IRP सात साल बाद भी ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं दे सका है, जिसे पर आवंटी एकमत हो सकें।
‘फैसले से बिल्डर को फायदा’
निवेशक मनीष मिश्रा का कहना है कि अंसल API को महज 83 करोड़ रुपये न देने पर दिवालिया घोषित कर दिया गया है, जबकि इसकी टाउनशिप की करीब 200 एकड़ जमीन एलडीए के पास बंधक है। इस जमीन का एक हिस्सा बेचकर आसानी से यह लोन चुकाया जा सकता था। आवंटियों के मुताबिक एनसीएलटी के इस फैसले से बिल्डर को फायदा ही फायदा हुआ। वह सारी देनदारी से बच गया, रेरा और हाई कोर्ट में चल रहे मामलों की सुनवाई भी रुक गई और उस पर लगे जुर्माने की वसूली भी फिलहाल नहीं हो सकेगी। वहीं, हजारों करोड़ निवेश कर चुके आवंटी और निवेशक सड़क पर आ गए हैं।
‘अब सीएम से ही न्याय की आस’
धरने पर बैठे आवंटी और निवेशकों के मुताबिक एनसीएलटी, रेरा और एलडीए से उन्हें कोई उम्मीद नहीं है। आवंटी डीपी मिश्रा और गगन टंडन के मुताबिक सीएम योगी आदित्यनाथ ही उन्हें न्याय दिला सकते हैं।


















