
बोले कटिहार : 5 साल से नहीं मिला मानदेय, कर्ज लेकर चला रहे हैं काम
ग्रामीण क्षेत्रों के पंप संचालकों की हालत खराब है। पिछले पांच वर्षों से उन्हें मानदेय नहीं मिला है, जिससे उनके परिवार की स्थिति गंभीर हो गई है। बारसोई प्रखंड में 300 पंप ऑपरेटरों ने प्रदर्शन किया और…
बोले कटिहार : 5 साल से नहीं मिला मानदेय, कर्ज लेकर चला रहे हैं काम
ग्रामीण क्षेत्र की बड़ी आबादी को पेयजल आपूर्ति करने वाले पंप संचालक या अनुरक्षक की हालत खराब है। पांच साल से बोरिंग का संचालन करने वाले मानदेय के लिए परेशान हैं। धरना-प्रदर्शन किया तो भुगतान का आश्वासन मिला, लेकिन पैसे नहीं मिले। परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है। पंप में तकनीकी खराबी को लेकर आवाज उठाते हैं, मगर कोई नहीं सुनता। जब जलापूर्ति में बाधा आती है तो फिर आक्रोशित ग्रामीणों का आक्रोश भी झेलना पड़ता है। हिन्दुस्तान के साथ संवाद के दौरान जिले के अनुरक्षकों ने अपनी समस्या बताई।
03 सौ हैं बारसोई अनुमंडल में पंप ऑपरेटर
01 सौ 89 पंप हैं, नहीं हो रहा नियमित मेंटेनेंस
01 लाख 89 हजार घरों तक हो रही जलापूर्ति
बीते दिनों बारसोई प्रखंड परिसर में नल-जल अनुरक्षकों पंचायत पंप ऑपरेटरों ने 5 वर्षों से बकाया मानदेय नहीं मिलने को लेकर प्रखंड परिसर के सामने प्रदर्शन किया। जल्द से जल्द भुगतान की मांग की। ऑपरेटर ने कहा कि अपनी मांगों को लेकर सबसे पहले पीएचईडी कार्यालय पहुंचे। वहां पदाधिकारी या कर्मी नहीं थे। आखिरकार हम लोगों की बात कौन सुनेगा? मजदूरी की राशि नहीं मिले तो परिवार कैसे चलेगा। थक हारकर प्रखंड मुख्यालय पहुंचकर अपनी मांग रखी। जदयू के रोशन अग्रवाल ने कहा कि पंचायत पंप ऑपरेटर की मांग पूरी तरह से जायज है। पंप ऑपरेटरों के 5 वर्षों के मानदेय का भुगतान करने की मांग करेंगे।
बारसोई पंचायत के 300 ऑपरेटर हैं परेशान
बारसाई पंचातय के 300 ऑपरेटर काफी परेशान हैं। उन्होंने कहा कि मानदेय के साथ-साथ पेयजल आपूर्ति में मिलने वाली सुविधाओं का भी बुरा हाल है। स्थिति ऐसी है कि अगर साल भर के अंदर टावर की मरम्मत नहीं होती है तो फिर समय लिकेज होने या फिर टॉवर गिरने की समस्या हो सकती है। इस दिशा में कई बार विभागीय अधिकारी व एजेंसी को जानकारी भी दी गयी है। मगर किसी भी तरफ से इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऑपरेटर ने कहा कि उनकी ड्यूटी सुबह तीन घंटे और शाम में तीन घंटे का होता है। अगर उपकरण खराब रहे और पानी की जलापूर्ति नहीं होती है तो फिर स्थानीय लोगों के गुस्से का सामना भी उन्हें ही करना पड़ता है। बोरिंग के रखरखाव की जिम्मेदारी एजेंसी को दी गयी है। बोरिंग में खराबी आने पर सूचना देने के बावजूद समय पर काम नहीं होने से जलापूर्ति बाधित हो जाती है। जलापूर्ति बाधित होने पर आक्रोशित ग्रामीण भला-बुरा कहते है। बिजली नहीं रहने पर भी जलापूर्ति बाधित होने पर लोगों का आक्रोश हम लोगों पर ही टूटता है।
हरेक को अलग-अलग मिल रहा वेतन
जानकारी हो कि निश्चय योजना और पीएचईडी की बोरिंग से ग्रामीण इलाके के गांव और टोलों की बड़ी आबादी को जलापूर्ति की जा रही है। पंप संचालकों ने कहा कि मासिक वेतन में भी अंतर है। किसी को दो हजार, किसी को ढाई हजार, किसी को तीन हजार तक दिया जाता है। जबकि सबों का काम एक समान है तो एक समान ही वेतन मिलना चाहिए। इस दिशा में विभाग को एजेंसी को कहना चाहिए। इससे काम करने की क्षमता पर असर पड़ता है। खैर सबसे बड़ी चुनौती समय पर वेतन का मिलना है। इतनी कम राशि के बाद भी अगर राशि का भुगतान ससमय नहीं होता है तो फिर परेशानी काफी बढ़ जाता है।
शिकायतें
रंगाई-पुताई नहीं होने से लोहे में जंग लग रहा है।
किसी भी समय लिकेज हो सकती है या टंकी टूट सकती है।
साल में एक बार भी टंकी की सफाई नहीं होती है ।
बिजली उपकरण पुराने होने से परेशानी हो रही है।
मेंटेनेंस का काम ससमय नहीं किया जाता है।
सुझाव
पंप संचालकों को पहले की तरह सुरक्षा और मेडिकल किट उपलब्ध कराई जाए।
सरकार द्वारा तय की गई दैनिक मजदूरी के आधार पर मानदेय मिले।
जहां भी बोरिंग किया गया है उसकी घेराबंदी अवश्य होनी चाहिए।
नियमित रूप से मेंटेनेंस का काम होते रहना चाहिए ।
शौचालय की व्यवस्था की जानी चाहिए।
सुनें हमारी बात
लगभग 5 वर्षों से हम लोगों का मानदेय बकाया है जिसके चलते हम भुखमरी के कगार पर हैं। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पैसे के अभाव से प्रभावित हो रही है। सरकार से मांग करते हैं कि मानदेय भुगतान जल्द से जल्द किया जाए।
बापी पांडे
घर-घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचने का काम कर रहे हैं तथा मजदूरी का राशि नहीं दे रहे। आखिरकार हम लोग जाए तो कहां जाएं। पीएचईडी विभाग को भी कई बार लिख कर दिया गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं की गई।
कोरोना कल से अपना सेवा विभाग को दे रहे हैं तथा विभाग के गाइडलाइन पर शुद्ध पेयजल पंचायत के लोगों तक पहुंचा रहे हैं। लेकिन हम लोगों को लगभग 5 वर्षों से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है।
महिला ऑपरेटर के लिए शौचालय की विशेष व्यवस्था जरूरी है। सरकार द्वारा महिलाओं के लिए समुचित व्यवस्था करनी चाहिए ताकि महिला ऑपरेटर आराम से ड्यूटी कर सकें।
लंबे समय से मानदेय नहीं मिल रहा है। आर्थिक स्थिति खराब हो चुकी है। पंप के छोटे मानदेय से घर के खर्च भी नहीं चल पा रहे हैं। जिसके चलते काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। अन्य लोगों को भी छोटा काम करना पड़ता है।
365 दिन काम करना पड़ता है एक भी दिन विभाग द्वारा छुट्टी नहीं दी गई है। बाहर जाने के लिए घर के एक सदस्य को छोड़कर जाना पड़ता है। पूरा परिवार एक साथ नहीं जा सकते।
कई वर्षों से मानदेय मिलने के कारण कर्ज में डूब चुके हैं तथा आर्थिक स्थिति काफी बिगड़ चुकी है। बच्चे को अच्छी शिक्षा नहीं दे पा रहे हैं। वेतन बढ़े और ससमय मिले तो आर्थिक स्थिति बेहतर होगी
पंप संचालकों को सुरक्षा की गारंटी ले तथा किट उपलब्ध कराया जाए। अब तक विभाग द्वारा सुरक्षा का कोई व्यवस्था नहीं की गई है। मशीनें पुरानी और खराब हो चुकी है। आए दिन घटना घटने रहती है।
कभी किसी कारण से पंप खराब हो जाने से स्थानीय ग्रामीण आक्रोश हो जाता है तथा पंप संचालकों का कोई सुरक्षा नहीं है। जल्द से जल्द सुरक्षा मुहैया कराया जाए ताकि सरकार की गाइडलाइन का पालन करते हुए शुद्ध जल की आपूर्ति ससमय हो
पंप संचालक का मानदेय बैंक खातों में किया जाए। हमलोग सरकार से मांग करते है किसी एजेंसी के हाथों से पैसा नहीं दिया जाए। अगर सरकार द्वारा सीधे पैसा मिले तो हर माह सही से वेतन मिल जाएगा।
जल मीनार के नाम पर नौकरी दी गई थी लेकिन आज तक मानदेय का भुगतान कई वर्षों से लंबित है उसका भी भुगतान नहीं किया गया है। घर की माली स्थिति काफी खराब हो चुकी है ।
पंचायत पंप में हम लोग मजदूरी कर रहे थे मजदूरी का पैसा समय पर नहीं मिलने के कारण हम लोग को आर्थिक स्थिति काफी चरमरा गई है। विभाग द्वारा शौचालय की व्यवस्था भी नहीं की गई है।
सरकार द्वारा लगभग 5 वर्षों से हम लोगों का मानदेय नहीं दिया जा रहा है जिसके चलते हम लोगों के सामने भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। दुकानदार राशन देने से भी इनकार कर रहा है।
पंप संचालकों का मांग पूरी तरह से जायज है। इन लोगों की मांगों को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक पहुंचाएंगे तथा बकाया मानदेय राशि का भुगतान के लिए मांग करेंगे
बोले जिम्मेदार
अभी-अभी मेरी संज्ञान में यह बात आई है। संबंधित विभाग के पदाधिकारी से जानकारी प्राप्त कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अपार कार्ड के लिए कॉलेजों से मांगी छात्रों
बीआरए बिहार विवि प्रशासन ने सभी कॉलेजों से उन छात्रों की सूची मांगी है जिनका अपार आईडी नहीं बना है और जिनकी स्नातक थर्ड सेमेस्टर परीक्षा होनी है। कॉलेजों को 20 मार्च तक यह सूची भेजनी है। अपार आईडी के…
मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। बीआरए बिहार विवि प्रशासन ने बुधवार को पत्र जारी कर सभी कॉलेजों से अपार आईडी नहीं बनवा पाने वाले वैसे छात्रों की सूची मांगी जिनकी स्नातक थर्ड सेमेस्टर की परीक्षा होनी है। इसके लिए विवि प्रशासन ने एक फॉर्मेट भी कॉलेजों को भेजा है। कॉलेजों को 20 मार्च (गुरुवार) तक छात्रों की सूची विवि को भेज देनी है।
आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान ने 19 मार्च को ‘अपार आईडी के फेर में अटकी परीक्ष शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद विवि प्रशासन ने इस पर संज्ञान लेते हुए कॉलेजों को फॉर्मेट जारी कर छात्रों की सूची मांगी है। विवि में स्नातक थर्ड सेमेसटर सत्र 2023-27 की परीक्षा में परीक्षा फार्म भरने के लिए अपार आईडी अनिवार्य कर दिया गया है। लेकिन, कई छात्रों का अपार आईडी नहीं बनने से वे परीक्षा फॉर्म नहीं भर पा रहे हैं। इस बारे में आरडीएस कॉलेज ने विवि प्रशासन को पत्र भी लिखा है। सूत्रों ने बताया कि जब परीक्षा फॉर्म भरने की अधिसूचना जारी की गई तो उसमें अपार आईडी का जिक्र नहीं था, लेकिन पोर्टल पर अपार आईडी अनिवार्य कर दिया गया। कई कॉलेजों में छात्रों का फॉर्म तो भर लिया गया, लेकिन वह पोर्टल पर अपडेट नहीं हो रहा था। इस तरह से सैकड़ों छात्रों के सामने परीक्षा छूटने का खतरा पैदा हो गया। फॉर्मेट में कॉलेज को अपने यहां पढ़ने वाले छात्रों के नाम, मोबाइल नंबर, रजिस्ट्रेशन नंबर और सत्र की जानकारी देनी है।
Er Sabbir Alam barsoi katihar







