
मेरठ की जामा मस्जिद में जुम्मे की नमाज के दौरान कारी शफीकुर्ररहमान का बयान नहीं हुआ, लोगों में नाराजगी
📍 मेरठ: मेरठ की शहर जामा मस्जिद में इस बार का जुम्मे की नमाज का माहौल आम दिनों से अलग रहा। कारी शफीकुर्ररहमान का बयान नहीं हो सका, जिससे नमाजियों में नाराजगी और विरोध देखने को मिला।
📌 क्या है मामला?
शहर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद में हर जुम्मे की नमाज से पहले कारी शफीकुर्ररहमान का बयान होता था, जिसे सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटते थे। लेकिन इस बार उनका बयान नहीं हो सका, और इसकी कोई आधिकारिक वजह भी सामने नहीं आई।
🛑 लोगों ने किया विरोध
नमाज के बाद मस्जिद से बाहर आते ही लोगों में गुस्सा फूट पड़ा। कई लोगों ने प्रशासन और मस्जिद कमेटी से सवाल किए कि कारी साहब का बयान क्यों रोका गया?
🔹 एक स्थानीय नमाजी ने कहा – “हम हर जुम्मे को उनके बयान को सुनने आते हैं, लेकिन बिना किसी सूचना के इसे रोकना गलत है।”
🔹 दूसरे शख्स ने कहा – “अगर कोई प्रशासनिक दबाव है, तो हमें बताया जाए।”
⚠️ क्या प्रशासन का था कोई दबाव?
लोगों में इस बात की चर्चा है कि कारी शफीकुर्ररहमान को किसी प्रशासनिक कारण से बयान देने से रोका गया। हालांकि, अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
🚨 सवाल उठ रहे हैं:
🔸 क्या कारी शफीकुर्ररहमान के बयान को इच्छा से रोका गया या प्रशासन ने हस्तक्षेप किया?
🔸 क्या किसी नए नियम या सरकारी आदेश के तहत यह फैसला लिया गया?
🔸 क्या आने वाले जुम्मे की नमाज में फिर से बयान दिया जाएगा?
🔜 आगे क्या होगा?
📌 मस्जिद कमेटी और प्रशासन इस मामले पर जल्द ही स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं।
📌 स्थानीय लोगों ने अगले जुम्मे तक जवाब मांगा है।
(रिपोर्ट: एलिक सिंह, संपादक, वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज)
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📌 जिला प्रभारी (BJAC), भारतीय पत्रकार अधिकार परिषद्
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