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सुहागिनों ने वट वृक्ष की पूजा कर मांगा अखंड़ सौभाग्य

वट सावित्री: बरगद पेड़ की परिक्रमा कर महिलाएं ने की पति की लंबी उम्र की कामना

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महुली सोनभद्र (राकेश कुमार कन्नौजिया)_: पति की लंबी उम्र के लिए महिलाएं आज वट सावित्री का व्रत कर रही हैं. दुद्धी ,महुली,विंढमगंज की महिलाएं भी आज सुबह से वट वृक्षों के पास पूजा करने के लिए पहुंच रही हैं. वट सावित्री व्रत में बरगद के पेड़ का बहुत महत्व है. हिंदू पंचांग के मुताबिक जेष्ठ महीने की अमावस्या तिथि को ये व्रत किया जाता है. इसके अलावा आज ही के दिन शनि जयंती भी मनाई जाती है.IMG 20250526 084044

वट सावित्री की पूजा
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण बचाने के लिए इस व्रत को किया था. सावित्री से खुश होकर यमराज ने चने के रूप में सत्यवान के प्राण सौपे थे. चने लेकर सावित्री सत्यवान के शव के पास आई और सत्यवान में प्राण फूंक दिए. इस तरह सत्यवान जीवित हो गए. इसलिए वट सावित्री की पूजन में चने का भी उपयोग किया जाता है.IMG 20250526 084317

वट वृक्ष में होता है त्रि-देवों का वास

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक बरगद के पेड़ पर त्रि-देव यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास माना गया है. इस दिन शादीशुदा महिलाएं वट वृक्ष पर जल चढ़ाकर उसमें कुमकुम अक्षत लगाती हैं. पेड़ में मौली धागा बांधा जाता है. विधि विधान के साथ वट वृक्ष की पूजा की जाती है. वट सावित्री का व्रत त्रयोदशी तिथि से ही शुरू हो जाता है. हालांकि कुछ महिलाएं केवल अमावस्या के दिन ही व्रत रखती हैं. इस दिन वट वृक्ष की पूजा के साथ-साथ सावित्री और सत्यवान की पौराणिक कथा को भी सुना जाता है.IMG 20250526 084312

इसलिए पड़ा वट सावित्री नाम

कहा जाता है कि सावित्री ने वट वृक्ष के नीचे ही अपने मृत पति सत्यवान को जीवित किया था, इसलिए इस व्रत का नाम वट सावित्री पड़ा है. इस व्रत के लिए पूजन सामग्री थाली में प्रसाद, गुड़, भीगा चना, आटे से बनी मिठाई, कुमकुम, रोली, मौली धागा, फल, पान का पत्ता, धूप और घी का दीया के साथ वट वृक्ष की पूजा की जाती है. सुहागिन महिलाएं मौली धागा लेकर बरगद पेड़ की परिक्रमा लगाती हैं.

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