A2Z सभी खबर सभी जिले कीअन्य खबरेताज़ा खबरदेशनागपुरमहाराष्ट्रसड़क परिवहनसबसे हाल की खबरेंसमाचारस्थानीय समाचार

*सामाजिक संवेदना का परचम: हितेश दादा बनसोड ने सोशल मीडिया से दिलाई बेनाम मृतक को पहचान!**

IMG 20250724 131154 scaled
Oplus_16908288

IMG 20250724 WA0030
सामाजिक संवेदना का परचम: हितेश दादा बनसोड ने सोशल मीडिया से दिलाई बेनाम मृतक को पहचान!

नागपूर जिल्हा प्रतिनिधी:सूर्यकांत तळखंडे

केळवद,माळेगाव जोगा: सोशल मीडिया का इस्तेमाल सिर्फ मनोरंजन या सूचना के लिए ही नहीं, बल्कि मानवता की सेवा के लिए भी एक शक्तिशाली माध्यम बन सकता है, इसका एक अद्भुत उदाहरण माळेगाव जोगा में सामने आया है। एक भीषण सड़क हादसे में मृत एक युवक की पहचान कर पाना लगभग असंभव लग रहा था, लेकिन हितज्योती फाउंडेशन के संचालक और सामाजिक कार्यकर्ता हितेश दादा बनसोड की सूझबूझ, संवेदनशीलता और सोशल मीडिया के सकारात्मक उपयोग ने इस चुनौती को आसान बना दिया। उनके अथक प्रयासों की आज हर कोई सराहना कर रहा है।
पहचान बनी सबसे बड़ी चुनौती, ‘राजा’ नाम बना सहारा
हाल ही में माळेगाव जोगा के पास एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना हुई। हादसे में मृतक का शरीर इतनी बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गया था कि उसकी पहचान कर पाना बेहद मुश्किल हो रहा था। ऐसे संकटपूर्ण समय में, हितेश दादा बनसोड ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए, मृतक का एक छोटा वीडियो अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा किया। इसके साथ उन्होंने एक मार्मिक अपील की: “अगर आपके आसपास कोई व्यक्ति लापता है, तो कृपया उन्हें यह वीडियो दिखाएं।”
यह अपील कुछ ही घंटों में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। व्हाट्सऐप ग्रुप्स के माध्यम से यह वीडियो दूर-दूर तक पहुँचा और आखिरकार मृतक के परिजनों तक जा पहुँचा। वीडियो देखने के बाद परिजनों ने तत्काल लापता व्यक्ति की खोजबीन शुरू की, जिससे इस जटिल मामले को सुलझाने में एक बड़ी मिली।
पुलिस का सराहनीय सहयोग और ‘राजा’ का रहस्य खुला
इस पूरी प्रक्रिया में, केळवद पुलिस स्टेशन के अधिकारी सूरज परमार ने भी सराहनीय काम किया। उन्होंने मृतक के कपड़ों को बड़ी सावधानी से सुरक्षित रखा था। जब परिजनों ने पुलिस से संपर्क किया, तो इन कपड़ों और मृतक के शरीर पर गुदवाए गए ‘राजा’ नाम के टैटू ने निर्णायक सबूत का काम किया। आखिरकार, मृतक की पहचान राजाराम रमेश धुर्वे (उम्र 26 वर्ष, निवासी पतपड़ा, उमरेठ, जिला छिंदवाड़ा) के रूप में हुई।
थानेदार अनिल राऊत और सूरज परमार ने भी इस जांच में पूरी लगन और समर्पण दिखाया, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में हितज्योती फाउंडेशन के संचालक हितेश दादा बनसोड की सक्रियता और मानवीय संवेदनशीलता ही कुंजी साबित हुई। उनकी पहल के कारण ही इस अनाम शव को न केवल पहचान मिल पाई, बल्कि वह अपने शोकाकुल परिजनों तक भी पहुँच सका, जिससे उन्हें अंतिम संस्कार करने और शांति प्राप्त करने में मदद मिली।
यह घटना स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि कैसे एक जागृत सामाजिक कार्यकर्ता और सोशल मीडिया का रचनात्मक उपयोग मिलकर कितनी बड़ी मदद कर सकते हैं। निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करने वाले हितेश दादा और उनके हितज्योती फाउंडेशन के इस अतुलनीय कार्य को हमारा शत-शत नमन!

[yop_poll id="10"]
Show More
Back to top button
error: Content is protected !!