
वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्ट 
देहरादून। उत्तराखंड के इतिहास का सबसे बड़ा चिटफंड घोटाला कहे जाने वाले LUCC फाइनेंशियल फ्रॉड ने 25 लाख से ज्यादा निवेशकों को सड़क पर ला दिया है। करोड़ों की गाढ़ी कमाई गंवाने वाले पीड़ित अब सरकार और प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते-लगाते थक चुके हैं। सोमवार को देहरादून के एकता विहार में हजारों पीड़ित एकजुट होकर आमरण अनशन पर बैठ गए। उनका कहना है कि जब तक सरकार ठोस कदम नहीं उठाती और उन्हें उनका पैसा नहीं लौटाया जाता, वे आंदोलन जारी रखेंगे।
कैसे हुआ इतना बड़ा घोटाला?
लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी (LUCC) की शुरुआत 2012 में कृषि मंत्रालय के अधिनियम के अंतर्गत पंजीकरण से हुई थी। 2014 से इस सोसायटी ने उत्तराखंड सहित देश के आठ राज्यों में अपने पैर पसारने शुरू किए। कंपनी का नेटवर्क उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, बिहार और पंजाब तक फैला था।
निवेशकों को दोगुना पैसा करने और बैंकों से ज्यादा ब्याज देने का लालच दिया गया।
37 शाखाएं उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों में खोली गईं।
स्थानीय लोगों को एजेंट और कर्मचारियों के रूप में जोड़कर विश्वास दिलाया गया।
प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की तस्वीरों का इस्तेमाल विज्ञापनों और सेमिनारों में कर लोगों को भरोसा दिलाया गया।
धीरे-धीरे करीब 25 लाख लोग निवेशक बन गए और लगभग 189 करोड़ रुपए जमा हो गए।
लेकिन 29 सितंबर 2024 को अचानक सभी शाखाएं बंद कर दी गईं और कंपनी के डायरेक्टर तथा ब्रांच मैनेजर फरार हो गए।
पीड़ितों की व्यथा
रोशनी गौड़ (रुद्रप्रयाग) : “मैंने 60 लाख रुपए लगाए। हजारों लोग बर्बाद हो चुके हैं। कंपनी का मालिक समीर अग्रवाल दुबई में बैठा है और हम सड़क पर।”
सुशीला नेगी : “मेरे 22 लाख डूब गए। सरकार को अब गंभीरता दिखानी होगी।”
बबीता भट्ट : “मेरे खुद के 35 लाख और मेरी टीम के कुल 1.89 करोड़ फंसे हैं। यह राजनीतिक संरक्षण के बिना संभव नहीं था।”
अब तक की कार्रवाई
उत्तराखंड पुलिस अब तक 10 चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
15 मुकदमे राज्य के अलग-अलग जिलों में दर्ज किए गए हैं।
विजिलेंस जांच जारी है और कई आरोपी पुलिस गिरफ्त में आ चुके हैं।
प्रदेश सरकार ने इस केस को सीबीआई को सौंपने का प्रस्ताव भेजा है, केंद्र से मंजूरी लंबित है।
विजिलेंस निदेशक मुरुगेशन के मुताबिक, “सीबीआई जांच को लेकर प्रदेश सरकार ने नोटिस जारी कर दिया है। केंद्र की मंजूरी मिलते ही जांच सीबीआई के हाथ में होगी। फिलहाल पुलिस जांच और गिरफ्तारी की कार्रवाई जारी है।”
राजनीतिक विवाद
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले में सरकार “बड़ी मछलियों” को बचा रही है। कांग्रेस प्रवक्ता प्रतिमा सिंह ने कहा – “बीजेपी की सरकार की नाक के नीचे इतना बड़ा घोटाला हो गया। हजारों गरीबों का पैसा लूट लिया गया। यह सरकार की सबसे बड़ी नाकामी है और इस घोटाले को राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है।”
👉 अब सवाल है कि 25 लाख पीड़ितों की गाढ़ी कमाई कब और कैसे वापस मिलेगी?
👉 क्या सीबीआई जांच के बाद इस देशव्यापी घोटाले की असली सच्चाई सामने आ पाएगी?
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निष्कर्ष
LUCC फाइनेंशियल फ्रॉड सिर्फ उत्तराखंड का नहीं बल्कि देशभर का घोटाला है। इसका नेटवर्क उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, बिहार और पंजाब तक फैला हुआ है। पीड़ितों का कहना है कि वे अब सरकार के वादों पर भरोसा नहीं करेंगे और आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक उन्हें न्याय और अपना पैसा नहीं मिल जाता।









