

🛑🚨 बड़ी ख़बर: हिंडन नदी के डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण की पोल खोलने वाले पत्रकार पर हमला, झूठे मुकदमों में फंसाने की साजिश – नोएडा पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल 🚨🛑
नोएडा। हिंडन नदी के डूब क्षेत्र में अवैध तरीके से बने बहुमंज़िला मकानों का खुलासा करने वाले पत्रकारों को अब सच बोलने की सज़ा मिल रही है। मामला न्यूज़ वन इंडिया चैनल के ब्यूरो चीफ निशांत शर्मा और उनके भाई उमेश शर्मा से जुड़ा है। आरोप है कि जब पत्रकारों ने हिंडन नदी के डूब क्षेत्र में बने 4-5 मंज़िला अवैध मकानों की कवरेज की और उनकी अवैध कमाई का पर्दाफाश किया, तो दोनों भाई बौखला गए। इसके बाद उन्होंने अपने परिजनों और कुछ साथियों के साथ मिलकर न केवल पत्रकारों पर हमला किया बल्कि उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने की साजिश भी रची।
पत्रकारों का कहना है कि उन्होंने कानून और पर्यावरण की खुली धज्जियां उड़ाते हुए डूब क्षेत्र में किए गए इस अवैध निर्माण का खुलासा किया था। यही वजह है कि निशांत शर्मा और उमेश शर्मा को गुस्सा आ गया और उन्होंने पत्रकारों को डराने-धमकाने की नीयत से शिकायतें दर्ज करानी शुरू कर दीं।
पत्रकारों का आरोप है कि इस पूरे मामले में थाना फेस-3, नोएडा के कुछ पुलिस अधिकारी पक्षपातपूर्ण रवैया अपना रहे हैं। विशेषकर प्रभारी निरीक्षक ध्रुव भूषण दुबे और विवेचक SI योगेन्द्र सिंह पर सवाल खड़े हुए हैं। आरोप है कि ये दोनों अधिकारी निशांत शर्मा और उमेश शर्मा के दबाव में काम कर रहे हैं और निष्पक्ष जांच के बजाय पत्रकारों पर कार्रवाई करने में जुटे हुए हैं।
सबसे अहम बात यह है कि निशांत शर्मा और उमेश शर्मा द्वारा पुलिस और कोर्ट को सौंपे गए CCTV फुटेज खुद इस मामले की सच्चाई उजागर कर रहे हैं। पत्रकारों का दावा है कि इन फुटेज को देखने के बाद साफ़ पता चलता है कि वे दोनों भाई झूठ बोल रहे हैं। फुटेज में कहीं भी ऐसा दृश्य नहीं दिखता जिसमें पत्रकार निशांत और उमेश शर्मा के घर के अंदर घुसते दिखाई दे रहे हों। इसके बावजूद उनके खिलाफ FIR दर्ज कराने की कोशिश की गई।
पत्रकारों ने इस मामले में सीधे @Uppolice, @dgpup, @CP_Noida, @dmgbnagar सहित प्रदेश और जनपद के वरिष्ठ अधिकारियों को ट्वीट कर निष्पक्ष जांच की मांग की है। पत्रकारों का कहना है:
“डूब क्षेत्र में बने अवैध निर्माण के फोटो और वीडियो लेना हर भारतीय नागरिक का अधिकार है। इसके लिए न तो किसी का पत्रकार होना जरूरी है और न ही किसी मीडिया क्लब का सदस्य होना अनिवार्य है।”
उन्होंने यह भी कहा कि जिनका कोई अवैध धंधा नहीं है, वे पुलिस से डरते नहीं हैं और न ही पुलिस की चमचागिरी करते हैं। जो लोग पुलिस का सम्मान करते हैं, इसका मतलब यह नहीं कि वे डरते भी हैं। पत्रकारों का साफ कहना है कि अवैध निर्माण और अवैध कमाई को उजागर करना लोकतंत्र में उनकी जिम्मेदारी है और इसके लिए उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाना न केवल प्रेस की आज़ादी पर हमला है बल्कि कानून के दुरुपयोग का भी उदाहरण है।
पत्रकारों का यह भी आरोप है कि पुलिस के कुछ अधिकारी निशांत शर्मा और उमेश शर्मा की “गुलामी” कर रहे हैं और इसी वजह से सच्चाई को दबाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि आखिर क्यों कुछ पुलिस अधिकारी इस पूरे मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करने से बच रहे हैं।
यह मामला अब सोशल मीडिया पर भी तेजी से तूल पकड़ रहा है। आम लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि पत्रकारों को अवैध निर्माण की रिपोर्टिंग करने पर इस तरह से डराया-धमकाया जाएगा और झूठे मुकदमों में फंसाया जाएगा, तो आम जनता के अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का क्या होगा।
🔥 बड़ी ख़बर यह है कि हिंडन नदी के डूब क्षेत्र में बने अवैध मकानों की कवरेज पर पत्रकारों को डराने-धमकाने की कोशिश ने न केवल नोएडा पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं बल्कि यह मामला प्रदेश की कानून व्यवस्था और प्रेस की स्वतंत्रता के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गया है।
✍️ रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – समृद्ध भारत समाचार पत्र एवं वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
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