
कफ सिरप में डायथिलीन ग्लाइकॉल 500% अधिक, बच्चों के लिए दवा ही बन गई जहर: तमिलनाडु में तैयार कर MP में की सप्लाई, जानिए सब कुछ
8 October, 2025
मध्यप्रदेश में कफ सिरप कोल्ड्रिफ पीकर मरने वाले बच्चों की संख्या 19 हो गई है। इस सिरप की जाँच से पता चला है कि ये तमिलनाडु के श्रीसन फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरर के यहाँ तैयार किया गया है। चेन्नई के बाहरी इलाके में बैंगलुरु हाईवे पर ये फैक्ट्री मौजूद है।
जाँच के दौरान पूछताछ में फार्मास्युटिकल फैक्ट्री के मालिक रंगनाथ ने भी माना है कि उसने नॉन फार्मास्युटिकल ग्रेड के प्रोपलीन ग्लाइकॉल की 50-50 किलो के दो बैग मँगवाए थे। यानी 100 किलो जहरीला केमिकल मँगवाया गया था। हालाँकि दवाओं की एंट्री फैक्ट्री में दर्ज नहीं है। इसका भुगतान कैश के साथ-साथ ऑनलाइन जी-पे से किया गया था। दरअसल कंपनी ने सनराइज बायोटेक कंपनी से घटिया क्वालिटी का प्रोपलीन ग्लाइकॉल खरीदा था। इसका टेस्ट भी नहीं किया गया।
जाँच में ये भी सामने आया है कि सिरप में डाईएथिलीन ग्लाइकॉल और एथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा तय सीमा से 486 गुणा ज्यादा थी। यानी ये सिरप न सिर्फ बच्चे के लिए जानलेवा था, बल्कि बड़े से बड़ा जानवर, जैसे हाथी की भी किडनी खराब कर सकता था।
👉 मार्च 2025 में खरीदा था केमिकल—
जाँच में सामने आया कि मार्च 2025 में ये केमिकल कंपनी ने चेन्नई की सनराइज बायोटेक से खरीदा था। लेकिन ये नॉन फार्मास्युटिकल ग्रेड का था। यानी ये कारों के कूलेंट या एंटीफ्रीज में इस्तेमाल किया जाने वाला केमिकल था। इसकी शुद्धता की जाँच नहीं की गई थी। फार्मास्युटिकल ग्रेड केमिकल का उपयोग दवाओं में किया जाता है न की नॉन फार्मास्युटिकल ग्रेड का।
👉 कंपनी ने सबूत छिपाने की कोशिश की—
तमिलनाडु ड्रग्स कंट्रोल विभाग ने पाया कि इस घटिया केमिकल से कई दवाएँ तैयार की गई थी। जाँच टीम ने ये भी पाया कि अब प्रोपलीन ग्लाइकॉल का स्टॉक वहाँ मौजूद नहीं था। यानी कंपनी ने इसे छिपाने की कोशिश की। विभाग ने मंगलवार (7 अक्टूबर 2025) को फैक्ट्री के मालिक डॉ. जी रंगनाथन और कंपनी के मुख्य कैमिस्ट अधिकारी के. माहेश्वरी को कारण बताओ नोटिस जारी किया। साथ ही कंपनी की बाहर की दीवार पर दो अलग-अलग कारण बताओ नोटिस चिपकाए गए।
कंपनी पर औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के गंभीर उल्लंघन का आरोप है। नोटिस में कहा गया है कि दवाओं पर गुणवत्ता नहीं बताया गया है। इसमें मिलावट है। इसमें डायथिलीन ग्लाइकॉल (48.6% w/v) है, जो एक जहरीला पदार्थ है और सेहत के लिए नुकसानदेह है। रंगनाथन और माहेश्वरी दोनों को जवाब देने के लिए पाँच दिन का समय दिया गया है।
नोटिस में फर्म को यह बताने के लिए कहा गया है कि उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। फर्म को सारा स्टॉक वापस लेने, वितरण के पूरे रिकॉर्ड जमा करने और मास्टर फॉर्मूला रिकॉर्ड से लेकर प्रोपिलीन ग्लाइकॉल जैसे कच्चे माल के खरीद से उसके इस्तेमाल तक, सभी तरह के दस्तावेज जाँच दल के सामने रखने को कहा गया है।
👉 दवा बनाने वाली फैक्ट्री मानकों के अनुरूप नहीं थी—
दवा बनाने वाली कंपनी श्रीसन फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरर का गेट बंद है। कंपनी के अंदर जाँच में पाया गया है कि फिल्टर्ड हवा की यहाँ व्यवस्था नहीं थी। दवाओं को गंदगी में ही रख दिया जाता था, जिससे इसके खराब होने की आशंका रहती थी। उपकरण टूटे हुए, जंग लगे मिले। बाहर के बगैर ट्रीटेड पानी का इस्तेमाल किया जाता था। कमरे मे तापमान और नमी की निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं, जो दवाओं के निर्माण के लिए अति आवश्यक है। लिक्विड पदार्थ प्लास्टिक के बोतल में रखे गए थे। निर्माण प्रक्रिया खुले में होती थी, जिससे प्रोडक्ट के प्रदूषित होने का खतरा बना रहता था। कंपनी ने नॉन फॉर्मा ग्रेड केमिकल का इस्तेमाल किया था।
👉 फैक्ट्री के दवा बनाने वाली जगह पर क्या-क्या मिला—
जाँच टीम ने पाया कि कमरे जल्दी बाजी में खाली किए गए थे। यहाँ से गंध आ रही थी। प्लास्टिक के जार के ढेर थे। कमरे का फर्श काफी दागदार था। खिड़कियाँ कसकर बंद की गई थी। ये खिड़की काफी छोटी थी। सफेद और नीले प्लास्टिक के कंटेनरों के ढेर दीवार से सटे हुए थे।
जमीन पर काली बाल्टियाँ, धातु के फ्रेम और विशाल ड्रमों के बिखरे ढक्कन पड़े थे। राख और मलबे के बीच में प्रोनिक आयरन सिरप के अधजले लेबल और साइप्रोहेप्टाडाइन हाइड्रोक्लोराइड सिरप आईपी की 200 मिलीलीटर की बेकार बोतलें खुले में पड़ी थीं। नीले रंग के बैरल के लेबल पर लिखा था ‘लिक्विड ग्लूकोज, 300.80 किलोग्राम’। साथ ही लिखा था ‘खुदरा बिक्री के लिए नहीं’, इस पर जून 2025 में निर्मित और जून 2027 में एक्सपायर डेट लिखा था।
👉 आस-पास के लोगों ने क्या कहा—
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, कंपनी के नजदीक रहने वाले सरवन ने बताया कि वह अक्सर हरी वर्दी पहने करीब 10 महिलाओं को सुबह 9:30 बजे के आसपास आते देखता था, ये महिलाएँ शाम 5 बजे जाती थी।” महिलाओं ने उसे बताया था कि ये फैक्ट्री दिसंबर में बंद हो जाएगा, क्योंकि इसका लाइसेंस खत्म हो रहा है।” ये फैक्ट्री पिछले 13 सालों से चल रहा था। लेकिन किसी भी आसपास रहने वाले व्यक्ति को आज तक अंदर जाने का मौका नहीं मिला। पास के एक ऑटोमोबाइल शोरूम में काम करने वाले वेंकटेश ने कहा, “सभी कर्मचारी बस से आते थे – इस मोहल्ले से कोई नहीं था।”
इंडियन एक्सप्रेस ने पाया है कि जब तमिलनाडु के औषधि नियंत्रण विभाग के निरीक्षकों की टीम ने भवन संख्या 787, जो इकाई के लिए खाली थी, का दरवाज़ा खटखटाया, तो उन्हें 364 उल्लंघनों की एक सूची मिली।
👉 2009 में बंद कंपनी से जुड़ा था श्रीसन फार्मास्युटिकल लिमिटेड—
कंपनी के मालिक रंगनाथन ने 27 अक्टूबर, 2011 को विनिर्माण लाइसेंस प्राप्त किया था। यह 2026 तक वैध था। ये रंगनाथ की पहली फैक्ट्री नहीं थी। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (IOC) के दस्तावेजों से पता चलता है कि रंगनाथन श्रीसन फार्मास्युटिकल लिमिटेड के निदेशक थे। इसका गठन 25 दिसंबर 1990 को हुआ था। कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) के रिकॉर्ड के अनुसार, कंपनी का दर्जा 2009 में रद्द कर दिया गया था, जिसका अर्थ है कि इसने उसी वर्ष किसी समय परिचालन बंद कर दिया था।
आरओसी दस्तावेजों के अनुसार, उस वर्ष फर्म का कारोबार और कुल व्यय दोनों शून्य थे। छिंदवाड़ा के पुलिस अधीक्षक अजय पांडे ने कहा, “जब हमने (श्रीसन फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरर के) निदेशकों के बारे में पता लगाने की कोशिश की, तो हमने पाया कि वे एक ऐसी कंपनी का भी हिस्सा थे जो 2009 से बंद है। उनसे पूछताछ के बाद हमें और जानकारी मिलेगी।”
जाँच दल को श्रीसन फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरर में कोल्ड्रिफ सिरप 60 एमएल के 570 बॉटल मिले हैं जो छिंदवाड़ा भेजने के लिए तैयार की गई थी। इसी बैच नंबर के सिरप पीने से मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा, बैतूल, नागपुर और पांढुणों में 19 बच्चों की मौत हुई है।













