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रामगढ़ प्रखंड के विभिन्न छठ घाटों मे दी गई अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य

रामगढ़ प्रखंड के विभिन्न छठ घाटों मे दी गई अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य

 

रामगढ़: सूर्य उपासना का सबसे बड़ा महापर्व छठ पूजा पर सोमवार को प्रखंड मुख्यालय रामगढ़ स्थित सारमी तालाब, शिव पोखर जोगिया, नर्मदेश्वर मंदिर तट स्थित घाट लखनपुर, कडबिंधा, महुबना, ठाडीहाट,जवारी,भदवारी, खसिया, कांजो, कडबिंधा, सिलठा ए,हाट गम्हरिया, भालसुमर, डेली पाथर, मोची खमार,सिंदुरिया, छोटी रणबहियार, बौडिया, कन्हारा, केन्दुआ, अमडा पहाडी, बगबिंधा, सुहो दुहो, कारूडीह, आलूबाडा समेत रामगढ़ प्रखंड के अन्य कई गांवों में पूरी आस्था, श्रद्धा एवं विश्वास के साथ छठ पूजा का आयोजन किया गया और भक्तों ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर भगवान भास्कर से परिवारजनों की कुशलता का आशीर्वाद माँगा।छोटी रण बहियार, जोगिया, सारमी सहित कई गावों में छठ पूजा आयोजन समिति से जुड़े लोगों द्वारा संध्या अर्ध्य के लिये दूध तथा गंगाजल वितरण की व्यवस्था की गई।

बताते चलें की सूर्य की उपासना सभ्यता के अनेक क्रमों में देखी जा सकती है। महापर्व छठ हिंदू धर्म में एकमात्र ऐसा पर्व है जिसमें न केवल उदयाचल सूर्य की पूजा की जाती है बल्कि अस्ताचलगामी सूर्य को भी पूजा जाता है। मान्यता है कि छठ देवी सूर्य देव की बहन हैं और उन्हीं को प्रसन्न करने के लिए भगवान सूर्य की आराधना की जाती है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो
अस्ताचलगामी और उगते सूर्य को अर्घ्य देने के दौरान इसकी रोशनी के प्रभाव में आने से कोई चर्म रोग नहीं होता और इंसान निरोगी रहता है। ज्योतिषियों का कहना है कि ढलते सूर्य को अर्घ्य देकर कई मुसीबतों से छुटकारा पाया जा सकता है। इसके अलावा इससे सेहत से जुड़ी भी कई समस्याएं दूर होती हैं।

सभी छठ घाटों मे आकर्षक साज सज्जा की गई थी। सारमी तालाब मे पानी का फव्वारा आकर्षण का केंद्र रहा। घाटों की गहराई को देखते हुए आयोजन समिति द्वारा बैरियर लगाया गया था।छठ के भजते गीत भक्तों को और भी उत्साहित कर रहे थे। अप्रिय घटना से बचाव हेतु एनडीआरएफ टीम भी मौके पर मौजूद रही।संध्या अर्घ्य के दौरान छठ घाटों मे पुलिस बल की तैनाती देखी गई।

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