
एक से 3 एकड़ की जमीन वाले किसानों की जमीन को कूटरचना कर, बढ़ाकर किसानों के नाम से करोड़ों रूपये केसीसी ऋण निकालने का मामला प्रकाश में आया है। मामला सरायपाली जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक शाखा तोरेसिंहा से संबद्ध कृषि साख सह समिति केना का है। जिन किसानों के नाम पर ऋण निकाला गया उन किसानों को पता भी नहीं कि उनके नाम पर ऋण हैं। इस मामले को लेकर कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने अनुविभागीय अधिकारी को जाँच के निर्देश दिये हैं। आरोप है कि केसीसी लोन फर्जीवाड़ा का मामला सहकारी समिति केना के समिति प्रबंधक, तोरेसिंहा ब्रांच के सुपरवाइजर और शाखा प्रबंधक सभी की मिली-भगत से ये फर्जीवाड़ा हुआ है। मामला 2023-24 का बताया जा रहा है। आरोप है कि सहकारी समिति के कुछ किसानों के रकबे में फर्जीवाड़ा किया गया है। जिन किसानों के नाम पर 1 से 3 एकड़ तक खेती की जमीन है उसे कूटरचना कर 20-25 एकड़ तक बढ़ाया गया और बड़े हुये रकबे के हिसाब से केना सहकारी समिति से जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक शाखा तोरेसिंहा से केसीसी लोन निकाला गया है। किसानों को उनकी वास्तविक रकबा के आधार पर लोन का भुगतान किया गया। जबकि, रकबा बढ़ा कर जो लोन की राशि निकाली गई है। उसे अ धिकारी, कर्मचारी स्वयं उपयोग कर लिये। 2023-24 कई लोगों का केसीसी लोन के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया। आरोप है कि इस फर्जीवाड़ा में केना सहकारी समिति के प्रभारी भीष्मदेव पटेल, तोरेसिंहा ब्रांच के तत्कालीन सुपरवाइजर श्याम सुंदर पटेल वर्तमान में पदस्थ सुपरवाइजर राज कुमार प्रधान और तोरेसिंहा ब्रांच के ब्रांच मैनेजर युवराज नायक शामिल हैं। जिन्होंने किसानों को बिना कर्ज लिये कर्जदार बनाया ।
*किसानों को कैसे पता चला फर्जीवाड़ा*
जानकारी के अनुसार वर्ष 2024 की यह घटना बताई जा रही है। हर साल किसान कृषि के लिये ऋण सहकारी बैंक से निकालते हैं। बाद फसल कटाई के बाद ऋण की राशि बैंक को जमा करते हैं फिर दूसरे सीजन के लिये खाद, बीज तथा नगद रकम लेते हैं। बीते वर्ष का ऋण चुकता करने जब 1-2 किसान सहकारी बैंक केना पहुंचे तो उनके नाम पर पहले जमीन अधिक दिखाई दी। बाद देखा कि उनके नाम पर लाखों रूपये का कर्ज है जिसकी जानकारी ही उन्हें नहीं है। किसानों ने अपने अन्य किसान मित्रों को इसकी जानकारी दी। जब वे भी अपने ऋण अकाउंट को देखा तो उनके नाम पर भी लाखों का ऋण दिखाई दिया। वे समझ गये कि मामला गंभीर है और उनके नाम पर फर्जी तरीके से किसी और ने ऋण निकाला है। बाद इसकी शिकायत उन्होंने सहकारी बैंक से की। तब कहीं जाकर यह पता लग सका। बताया गया कि हर साल शॉर्टज के नाम पर सोसायटियों में धान इधर-उधर होता है। यदि, प्रशासन गंभीरता से जाँच कराये तो बड़ा मामला उजाकर हो सकता है ।
*एसडीएम को मामले की जाँच को लेकर दिये गये निर्देश- कलेक्टर*
इस सबंध में कलेक्टर विजय कुमार लंगेह का कहना है कि मीडिया के माध्यम से मामला संज्ञान में आया है। अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सरायपाली को पूरे मामले की जाँच करने निर्देश दिये गये हैं। जाँच में जो सामने आयेगा। मामले में कार्रवाई की जायेगी।














