
🚨”नौकरी दो… 4 बेटियाँ कैसे पालूँगी?” मुरादाबाद में बूथ लेवल अधिकारी सर्वेश सिंह की आत्महत्या से हड़कंप, पत्नी बबली ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप!🚔🗳️💥
उत्तर प्रदेश के जनपद मुरादाबाद के भोजपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बहेड़ी के बहेड़ी गाँव में 28 नवंबर 2025 को एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहाँ लोकतंत्र की चुनावी ड्यूटी में तैनात बूथ लेवल अधिकारी और शिक्षक सर्वेश सिंह ने संदिग्ध परिस्थितियों में अपने घर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस दुखद घटना ने शिक्षा विभाग से लेकर जिला प्रशासन तक में गंभीर हलचल पैदा कर दी है।
मृतक सर्वेश सिंह कंपोजिट विद्यालय जाहिदपुर में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत थे और बूथ लेवल अधिकारी के रूप में निर्वाचन कार्य में भी तैनात थे। परिजनों और खासकर उनकी पत्नी बबली का आरोप है कि “साहब फार्म” (जिसे परिवार ‘एसआईआर फॉर्म’ कह रहा है) के लक्ष्य का लगातार दबाव, बार–बार अधिकारी और पर्यवेक्षकों के संदेश, और कार्रवाई की धमकियों से उत्पन्न मानसिक तनाव ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया था।
पत्नी बबली ने उठाया दर्द और लगाया आरोप
घटना के बाद पत्नी बबली (बबली), विलाप के बीच बेहद भावुक और न्याय की मांग करती हुई कह उठीं—
“नौकरी दो… 4 बेटियाँ कैसे पालूँगी?”
पत्नी का आरोप है कि जिला प्रशासन के स्तर से संदेश आते रहते थे—
“कितना काम हुआ? जल्दी पूरा करो। नहीं करोगे तो कार्रवाई होगी!”
बबली का कहना है कि लक्ष्य पूरा न होने की स्थिति में उनके पति को जेल भेजने और नौकरी छीनने तक की धमकी दी गई थी, जिससे वे भय और मानसिक दबाव में आ गए थे। बबली ने यह भी दावा किया—
“मेरे पति डर गए थे कि नौकरी न चली जाए या उन पर जेल की कार्रवाई न हो जाए। इसी घबराहट और तनाव ने उनकी जान ले ली।”
प्रपत्र लक्ष्य या तंत्र में तालमेल की चूक?
इस मामले ने कई बड़े प्रश्न खड़े कर दिए हैं—
- क्या प्रपत्र वितरण के लक्ष्य की निगरानी संचार बेहद कठोर और संवेदनशून्य हो गया है?
- क्या अधिकारी स्तर पर समन्वय की कमी के कारण वास्तविक प्रक्रिया को परिवार ‘व्यक्तिगत दबाव’ समझ बैठा?
- क्या ड्यूटी पर तैनात कर्मियों की मानसिक सुरक्षा, संवाद शैली और दबाव प्रबंधन नीति में सुधार जरूरी नहीं?
प्रशासन और पुलिस की कार्यवाही
सूचना मिलते ही उत्तर प्रदेश पुलिस की स्थानीय जिला जांच दल मौके पर पहुँची और शव को कब्जे में लेकर आगे की जांच शुरू कर दी। इस प्रकरण के बाद जिला निर्वाचन कार्यालय मुरादाबाद से जुड़े अधिकारियों की भूमिका, संचार संदेशों और ड्यूटी दबाव के पहलू पर भी आंतरिक रिपोर्ट तैयार किए जाने की बात सामने आई है।
पुलिस का कहना है कि—
सभी आरोपों और परिस्थितियों की निष्पक्ष जाँच की जा रही है। किसी भी अधिकारी या व्यक्ति द्वारा सरकारी कार्य में गलत संचार, दुर्व्यवहार या दबाव का प्रमाण मिलता है, तो विधिक और विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
जनता में व्याप्त भय और व्यवस्था में सुधार की मांग
घटना की वजह भले जांच के बाद ही स्पष्ट हो, लेकिन नागरिकों में चर्चा आम है—
“फॉर्म की निगरानी जरूरी है, लेकिन कर्मियों की मानसिक जान की निगरानी कौन करेगा?”
सामाजिक संगठनों, शिक्षक संघों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि चुनावी कार्य में तैनात BLO जैसे कर्मियों के लिए—
✅ मानसिक स्वास्थ्य संरक्षण नीति
✅ सौम्य, स्पष्ट और संवेदनशील संवाद
✅ दबाव प्रबंधन पर प्रशिक्षण
✅ और कार्यवाही की धमकी की बजाय समाधान आधारित निगरानी तंत्र
…को तत्काल लागू किया जाना चाहिए।
✍🏼 रिपोर्ट:
विश्वसनीय स्रोतों, पारिवारिक बयान और मौके की परिस्थिति पर आधारित।
✒ एलिक सिंह — संपादक, वंदे भारत लाइव टीवी समाचार









