
🔴 गाजियाबाद में झुग्गी-झोपड़ियों पर बड़ा सर्च ऑपरेशन: बांग्लादेशी तलाशने पहुंची पुलिस, लेकिन पासपोर्ट देख रह गई दंग
गाजियाबाद।
गाजियाबाद में पुलिस और आरएफ (रेलवे फोर्स) की संयुक्त टीम ने मंगलवार को झुग्गी-झोपड़ियों में सघन सर्च ऑपरेशन चलाया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान और सत्यापन करना था। सुबह से शुरू हुए इस ऑपरेशन में कई इलाकों की झुग्गियों को खंगाला गया, जहां पहले से ही संदिग्ध गतिविधियों की शिकायतें मिल रही थीं।
ऑपरेशन के दौरान जो हकीकत सामने आई, उसने सुरक्षा एजेंसियों को भी चौंका दिया। जिन झुग्गी-झोपड़ियों में लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करते नजर आए, वहीं कई निवासियों ने पुलिस के सामने पासपोर्ट, आधार कार्ड, वोटर आईडी, राशन कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज पेश कर दिए।
👉 हैरानी की बात यह रही कि जिन लोगों के पास अपने देश, निवास या भारत में प्रवेश से जुड़े ठोस प्रमाण नहीं थे, उनके पास भी कागजों की पूरी फाइल मौजूद थी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से यहां बाहरी लोग आकर बसते रहे हैं और धीरे-धीरे उन्होंने स्थानीय पहचान भी हासिल कर ली। सवाल यह उठ रहा है कि
क्या झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोगों के लिए भी पासपोर्ट बनवाना अब इतना आसान हो गया है?
और अगर हां, तो इसके पीछे कौन सा नेटवर्क काम कर रहा है?
सूत्रों के मुताबिक, पुलिस को शक है कि इस पूरे मामले में फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाला संगठित गिरोह सक्रिय हो सकता है, जो पैसों के बदले पहचान पत्र और अन्य सर्टिफिकेट उपलब्ध कराता है। इसी आशंका के चलते पुलिस ने कई दस्तावेजों को जब्त कर जांच के लिए संबंधित विभागों को भेज दिया है।
सर्च ऑपरेशन के दौरान कुछ संदिग्ध लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि ये लोग कब और कैसे भारत में आए, कहां-कहां काम किया और किसके संरक्षण में रह रहे थे। वहीं, सुरक्षा एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि कहीं यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा तो नहीं है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर दस्तावेज़ी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आम नागरिक जहां एक प्रमाण पत्र के लिए महीनों सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटता है, वहीं झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले कई लोगों के पास हर जरूरी सर्टिफिकेट मौजूद होना व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
फिलहाल पुलिस और अन्य एजेंसियां मामले की गहराई से जांच में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं, तो न केवल अवैध रूप से रह रहे लोगों पर कार्रवाई होगी, बल्कि दस्तावेज बनाने वाले नेटवर्क और इसमें शामिल सरकारी तंत्र के लोगों पर भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।
यह ऑपरेशन अब सिर्फ अवैध घुसपैठ का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह सिस्टम में छिपी खामियों और संभावित साजिशों का आईना बनकर सामने आया है।
✍️ रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक: Vande Bharat Live TV News
ब्यूरो चीफ: दैनिक आकांक्षा बुलेटिन, सहारनपुर
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