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इकोनॉमी मोड़ पर भारत: जापान को पीछे छोड़ बना दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

IMF के ताज़ा आंकड़ों में भारत की नाममात्र GDP जापान से आगे, तेज़ विकास दर और मजबूत घरेलू मांग बनी बड़ी वजह

 

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नईदिल्ली । भारत ने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए जापान को पीछे छोड़ दिया है और अब वह दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के नवीनतम अनुमानों के अनुसार भारत की नाममात्र सकल घरेलू उत्पाद (Nominal GDP) में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि जापान की अर्थव्यवस्था धीमी वृद्धि, कमजोर येन और जनसांख्यिकीय दबावों से जूझती रही।
अर्थशास्त्रियों के मुताबिक भारत की इस छलांग के पीछे कई अहम कारण हैं। मजबूत घरेलू खपत, बुनियादी ढांचे में बड़े पैमाने पर निवेश, मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाली PLI योजनाएं, डिजिटल इकोनॉमी का विस्तार और स्टार्टअप इकोसिस्टम की तेज़ रफ्तार ने आर्थिक वृद्धि को मजबूती दी है। सेवा क्षेत्र के साथ-साथ निर्माण, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला है।
वैश्विक रैंकिंग में भारत की स्थिति:
अब भारत अमेरिका, चीन और जर्मनी के बाद चौथे स्थान पर है। मौजूदा विकास दर को देखते हुए विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत आने वाले कुछ वर्षों में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है।
जापान क्यों पिछड़ा?
जापान की अर्थव्यवस्था पर कमजोर मुद्रा, वृद्ध होती आबादी, सीमित घरेलू मांग और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं का असर पड़ा है। इसके चलते उसकी GDP वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी रही, जिसका लाभ भारत को मिला।
सरकार और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया:
सरकारी हलकों ने इस उपलब्धि को आर्थिक सुधारों, आत्मनिर्भर भारत अभियान और दीर्घकालिक नीतिगत फैसलों का परिणाम बताया है। वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सुधारों की गति बनी रही और रोजगार सृजन, महंगाई नियंत्रण व कौशल विकास पर ध्यान दिया गया, तो भारत की आर्थिक स्थिति और सुदृढ़ होगी।
आगे की चुनौतियां:
हालांकि उपलब्धि बड़ी है, लेकिन महंगाई, वैश्विक मंदी की आशंका, भू-राजनीतिक तनाव और रोजगार सृजन जैसी चुनौतियों पर सतत निगरानी आवश्यक होगी। इसके बावजूद भारत का चौथे स्थान पर पहुंचना देश की आर्थिक क्षमता और वैश्विक प्रभाव में बढ़ोतरी का स्पष्ट संकेत है।
जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना भारत के लिए मील का पत्थर है। यह उपलब्धि न केवल आर्थिक मजबूती दर्शाती है, बल्कि आने वाले वर्षों में भारत की वैश्विक नेतृत्व भूमिका को भी मजबूत करती

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