
शिक्षा की ज्योति से समाज को आलोकित करने वाली सावित्रीबाई फुले की 195वीं जयंती, बघाडू में नारी सशक्तिकरण का भव्य संदेश
दुद्धी सोनभद्र (राकेश कुमार कन्नौजिया)_
सोनभद्र के दुद्धी तहसील अंतर्गत कल्पना विकास बालिका इंटर कॉलेज, बघाडू में भारत की प्रथम महिला शिक्षिका, समाज सुधार की अग्रदूत एवं नारी चेतना की अमर प्रतीक सावित्रीबाई फुले की 195वीं जयंती अत्यंत श्रद्धा, गरिमा और उत्साह के साथ मनाई गई। यह आयोजन केवल एक जयंती समारोह नहीं, बल्कि बालिका शिक्षा, सामाजिक समानता और महिला सम्मान के प्रति दृढ़ संकल्प का सशक्त मंच बना।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला पंचायत सदस्य बघाडू जुबेर आलम ने अपने ओजस्वी संबोधन में कहा कि 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के पुणे में जन्मी सावित्रीबाई फुले ने उस अंधकारमय दौर में शिक्षा की मशाल जलाई, जब महिलाओं और दलितों को ज्ञान से दूर रखने की साजिशें रची जाती थीं। उन्होंने कहा कि अपने पति महान समाज सुधारक ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर उन्होंने देश का पहला बालिका विद्यालय खोलकर न केवल इतिहास रचा, बल्कि करोड़ों बेटियों के भविष्य की नींव रखी।
श्री आलम ने कहा कि दलित परिवार में जन्म लेकर भी सावित्रीबाई फुले ने सती प्रथा जैसी अमानवीय कुरीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की, विधवा विवाह को सामाजिक स्वीकृति दिलाने का साहसिक प्रयास किया और महिलाओं-बालिकाओं को शिक्षा के माध्यम से आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का मार्ग दिखाया। उन्होंने सावित्रीबाई फुले को नारी मुक्ति आंदोलन की प्रथम मशालवाहक बताया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य श्याम कुमार गौतम ने कहा कि सावित्रीबाई फुले का जीवन संघर्ष, साहस और सेवा की अनुपम मिसाल है। आज की छात्राएं यदि उनके विचारों को आत्मसात कर लें, तो समाज से असमानता स्वतः समाप्त हो जाएगी।
बनवासी सेवा आश्रम के सामाजिक कार्यकर्ता इंद्रदेव कुशवाहा ने कहा कि सावित्रीबाई फुले केवल इतिहास नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की दिशा हैं।
वहीं सेवा संस्था संचालक वर्मा जी ने कहा कि महिलाओं को शिक्षित करना ही सच्चा राष्ट्र निर्माण है।
इस गरिमामय अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाएं, छात्र-छात्राएं एवं अभिभावक उपस्थित रहे। सभी ने सावित्रीबाई फुले के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके आदर्शों—शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय—को जीवन में उतारने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन हिंडालको जनसेवा ट्रस्ट के कोऑर्डिनेटर एवं वरिष्ठ समाजसेवी हरिहर यादव ने किया। उन्होंने कहा कि सावित्रीबाई फुले की विचारधारा आज भी समाज को नई दिशा देने की क्षमता रखती है।
समारोह का समापन “शिक्षित नारी—सशक्त समाज” के संकल्प के साथ हुआ, जहाँ हर मन में सावित्रीबाई फुले के संघर्ष और आदर्शों को आगे बढ़ाने की प्रेरणा साफ झलकती रही।









