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श्री शाकंभरी अवतार देवी भगवती ने असुरों का वध करने के लिए कई अवतार लिए। जिनमें से एक है माँ शाकंभरी अवतार। सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी का उल्लेख मार्कण्डेय पुराण, दुर्गा सप्तसती, पदम पुराण, कनक धारा स्रोत आदि में मिलता है।

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विजय कुमार बंसल  ब्यूरो चीफ हरिद्वार

श्री शाकंभरी अवतार देवी भगवती ने असुरों का वध करने के लिए कई अवतार लिए। जिनमें से एक है माँ शाकंभरी अवतार।FB IMG 1767878132744 सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी का उल्लेख मार्कण्डेय पुराण, दुर्गा सप्तसती, पदम पुराण, कनक धारा स्रोत आदि में मिलता है।

ये हैं इस सिद्ध पीठ के बारे में मान्यता

– मां भगवती का नाम शाकंभरी देवी होने के बारे में मान्यता है कि प्राचीन काल में दुर्ग नामक दैत्य ने ब्रह्मा जी की घोर तपस्या कर वरदान में चारों वेद मांग लिए।

– दैत्यों के हाथ चारों वेद लगने से सभी वैदिक क्रियाएं लुप्त हो गई।

– परिणाम स्वरूप 100 वर्षों तक वर्षा नहीं हुई। जिस कारण तीनों लोकों में अकाल पड़ गया। त्राहि-त्राहि मचने पर देवताओं ने शिवालिक

पर्वत की प्रथम शिखा पर मां जगदंबा की घोर तपस्या की।

– देवताओं की करुण पुकार सुनकर करुणामयी मां भगवती देवताओं के समक्ष प्रकट हो गई।

– देवताओं ने उनसे तीनों लोकों का अकाल मिटाने की प्रार्थना की।

– इस पर मां जगदंबा ने अपने शत नेत्रों से नौ दिन एवं नौ रात तक अश्रुवृष्टि की।

– इससे सूखी धरा तृप्त हो गई। सभी सागर एवं नदियां जल से भर गई।

– मां भगवती ने देवताओं की भूख मिटाने के लिए अपनी शक्ति से पहाड़ियों पर शाक व फल उत्पन्न किए। जिसके बाद माता शाकंभरी कहलाई।

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