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।। स्वास्थ्य विभाग की मेहरबानी या अंधेरगर्दी? 300 अस्पतालों के खेल में जनता बेहाल।।

।। बस्ती का 'हेल्थ माफिया': मानकों की कब्र पर खड़े हैं आलीशान अस्पताल।।

अजीत मिश्रा (खोजी)

स्वास्थ्य के नाम पर ‘यमराज’ की गलियां: कब जागेगा प्रशासन?

सोमवार 19 जनवरी 26, उत्तर प्रदेश।

बस्ती।। शहर की तंग गलियों में खुले नर्सिंग होम आज इलाज के केंद्र कम और ‘मौत के जाल’ ज्यादा नजर आ रहे हैं। मालवीय रोड से लेकर पचपेड़िया रोड तक, आलीशान बोर्ड लगाकर चल रहे ये अस्पताल दरअसल उन रिहायशी मकानों में सिमटे हैं, जहां एक एंबुलेंस का पहुंचना भी दूभर है। सवाल यह है कि चंद रुपयों के लालच में क्या आम आदमी की जान इतनी सस्ती हो गई है?

🔥मानकों की ‘बली’ और फाइलों का खेल

अखबार की रिपोर्ट चौंकाने वाली है—जिले में करीब 300 संस्थान पंजीकृत हैं, जिनमें से दर्जनों ऐसे हैं जो बिना किसी सुरक्षा मानक के चल रहे हैं। न वहां आग से बचने के लिए ‘फायर एग्जिट’ है, न 15 मीटर से ऊंचे भवनों के लिए अनिवार्य एनओसी और न ही मरीजों को सुरक्षित निकालने के लिए रैंप। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे चल रहा यह खेल किसी बड़े हादसे को दावत दे रहा है। क्या विभाग किसी बड़े अग्निकांड का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद केवल जांच कमेटियां बैठाई जाएंगी?

🔥डिग्री नहीं, ‘जुगाड़’ से चल रहा इलाज

सबसे भयावह स्थिति यह है कि इन अस्पतालों में विशेषज्ञों के नाम केवल बोर्ड पर चमकते हैं। हकीकत में, ऑपरेशन थियेटर में ‘किराए के डॉक्टर’ बुलाए जाते हैं। एनेस्थीसिया (बेहोशी) जैसे संवेदनशील काम के लिए भी कोई स्थायी डॉक्टर नहीं है। जो पैथोलॉजी और एक्स-रे सेंटर बिना किसी मानक के धड़ल्ले से चल रहे हैं, वे मरीजों की रिपोर्ट के साथ-साथ उनकी जिंदगी से भी खिलवाड़ कर रहे हैं।

🔥दलालों का जाल और मोटी कमाई

इन ‘तंग गली’ वाले अस्पतालों की धड़कन वे दलाल हैं, जो जिला अस्पताल के बाहर से भोले-भाले मरीजों को फुसलाकर यहां लाते हैं। कमीशन का यह खेल इतना गहरा है कि गरीब आदमी अपना घर-बार बेचकर इन अस्पतालों की तिजोरियां भरता है और बदले में उसे मिलती है—असुरक्षा और अधूरी चिकित्सा।

🔥कड़े फैसले लेने का वक्त

👉सीएमओ द्वारा ऑडिट की बात करना स्वागत योग्य है, लेकिन यह केवल ‘नोटिस’ तक सीमित नहीं रहना चाहिए।

👉क्या उन अधिकारियों पर कार्रवाई होगी जिन्होंने बिना मानक देखे इन अस्पतालों को लाइसेंस जारी किए?

👉क्या उन भवनों को तुरंत सील किया जाएगा जहां आग लगने पर बाहर निकलने का रास्ता तक नहीं है?

स्वास्थ्य सेवा कोई व्यापार नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना से जुड़ा विषय है। अगर प्रशासन अब भी नहीं जागा, तो इन तंग गलियों से उठने वाली अर्थियां व्यवस्था की नाकामी का सबसे बड़ा प्रमाण होंगी। अब वक्त ‘जुगाड़’ का नहीं, ‘जवाबदेही’ का है।

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