

🚨 सहारनपुर विकास प्राधिकरण अब सक्रिय मोड़ पर, अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई में ढिलाई और संरक्षण देने पर सुपरवाइज़र को हटाया, अवर अभियंता से क्षेत्र छीनने का कारण बताओ नोटिस जारी
सहारनपुर: सहारनपुर विकास प्राधिकरण (SDA) अब थोड़ा‑थोड़ा सक्रिय मोड़ पर नजर आ रहा है। वैसे यह विभाग ज्यादातर इनएक्टिव रहता है और केवल अवैध वसूली या बड़े प्रोजेक्ट्स में ही कार्रवाई करता है। लेकिन हालिया घटनाओं ने दिखा दिया है कि प्रशासन ने अब कड़ी नज़र और जवाबदेही तय करने की ठानी है।
जानकारी के अनुसार, अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई न करने या कथित रूप से कॉलोनाइज़र को संरक्षण देने के आरोपों के चलते प्राधिकरण ने आज एक बड़ा कदम उठाया। जोन‑03 और जोन‑01 में कार्रवाई में लापरवाही के आरोपों के तहत संबंधित सुपरवाइज़र को सेवा से हटा दिया गया।
साथ ही, अवर अभियंता प्रदीप गोयल से संबंधित क्षेत्र छीनते हुए उन पर “कारण बताओ” नोटिस जारी किया गया है। प्राधिकरण का कहना है कि यह कदम उन अधिकारियों और कर्मियों के लिए स्पष्ट संदेश है जो नियमों और ध्वस्तीकरण आदेशों के बावजूद अवैध निर्माण और प्लॉटिंग को नजरअंदाज कर रहे हैं या किसी कॉलोनाइज़र को संरक्षण दे रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में प्राधिकरण की टीम ने कई अवैध कॉलोनियों, फैक्ट्री और व्यवसायिक निर्माण की पहचान की, लेकिन कुछ मामलों में अधिकारियों की ढिलाई और मिलीभगत के चलते कार्रवाई पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पाई। यही कारण है कि प्राधिकरण ने अब सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया।
प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, यह निर्णय केवल कानून का पालन और सिस्टम की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। सुपरवाइज़र की सेवा समाप्ति और अवर अभियंता को नोटिस जारी करना इस बात की निशानी है कि कोई भी अधिकारी नियमों से ऊपर नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध कॉलोनियों पर लापरवाही, संरक्षण या भ्रष्टाचार से न केवल प्राधिकरण की विश्वसनीयता प्रभावित होती है, बल्कि यह जनता के हित और शहरी नियोजन व्यवस्था को भी जोखिम में डालता है। ऐसे मामलों में सख्त प्रशासनिक कार्रवाई आवश्यक है ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी या कॉलोनाइज़र नियम तोड़ने की हिमाकत न करे।
लोकल सूत्रों का कहना है कि प्राधिकरण की इस कार्रवाई से क्षेत्र में स्पष्ट संदेश गया है: अब अवैध निर्माण पर कोई छूट नहीं होगी, और हर अधिकारी को अपने कार्यक्षेत्र की निगरानी पूरी तरह करनी होगी। यह भी साफ़ कर दिया गया है कि यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत साबित होती है तो विभागीय जांच, निलंबन और विजिलेंस कार्रवाई तक की जाएगी।
सहारनपुर विकास प्राधिकरण का यह कदम केवल सुपरवाइज़र और अवर अभियंता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे विभाग में सख्ती और जवाबदेही की संस्कृति बनाने की दिशा में लिया गया है। विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि आगे की कार्रवाई में रीयल‑टाइम ड्रोन सर्वे और GIS मॉनिटरिंग का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि अवैध कॉलोनियों और निर्माण गतिविधियों पर तुरंत निगरानी रखी जा सके।
इस बीच, प्राधिकरण ने आम जनता को भी चेतावनी दी है कि प्लॉट या मकान खरीदने से पहले हमेशा वैधता सुनिश्चित करें, क्योंकि अवैध कॉलोनियों से जुड़े मामले में खरीदारों को भी कानूनी और वित्तीय जोखिम का सामना करना पड़ सकता है।
संक्षेप में, सहारनपुर विकास प्राधिकरण अब धीरे‑धीरे सक्रिय मोड़ पर दिख रहा है। सुपरवाइज़र की सेवा समाप्ति और अवर अभियंता से नोटिस जारी करना प्रशासन की सख्त संदेशवाहक कार्रवाई है कि अवैध निर्माण और कॉलोनाइज़र संरक्षण के मामलों में कोई भी अधिकारी बख्शा नहीं जाएगा। जिले में जनता और खरीदारों के हित में यह कदम कानून और नियम का पालन सुनिश्चित करने वाली ठोस कार्रवाई माना जा रहा है।
✍️ रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
ब्यूरो चीफ – दैनिक आशंका बुलेटिन, सहारनपुर
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