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न्यायालय के आदेश के बाद भी नहीं हटा अतिक्रमण, संखापार माफी में बढ़ी ग्रामीणों की मुसीबत

न्यायालय के आदेश के बाद भी नहीं हटा अतिक्रमण, संखापार माफी में बढ़ी ग्रामीणों की मुसीबत


सुकरौली बाजार कुशीनगर, सुकरौली विकासखंड अंतर्गत ग्राम सभा संखा पार माफी में इन दिनों ग्रामीणों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। गांव की सार्वजनिक पोखरी पर हुए अतिक्रमण के चलते जल निकासी पूरी तरह बाधित हो गई है, जिससे घरों से निकलने वाला गंदा पानी सड़कों पर जमा हो रहा है। हालात ऐसे हैं कि गांव की गलियां तालाब में तब्दील हो चुकी हैं और लोगों का आना-जाना दूभर हो गया है।


ग्रामीणों का कहना है कि पहले घरों से निकलने वाला पानी नालियों के माध्यम से पोखरी में चला जाता था, लेकिन पोखरी पर अवैध कब्जा होने और नालियों को जाम कर दिए जाने के कारण अब पानी पोखरी तक नहीं पहुंच पा रहा है। नतीजतन गंदा पानी सड़कों और घरों के सामने फैल रहा है, जिससे बदबू के साथ-साथ मच्छरों का प्रकोप भी तेजी से बढ़ गया है।


इस गंभीर समस्या को लेकर ग्रामीणों ने तहसील और न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया था। मामले की सुनवाई के बाद तहसील न्यायालय ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत पोखरी की भूमि पर हुए अवैध अतिक्रमण को हटाने का आदेश जारी किया। साथ ही अतिक्रमणकारियों पर जुर्माना भी लगाया गया, लेकिन आदेश जारी होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि गंदा पानी घरों के दरवाजे तक भर जाता है। बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। स्कूली बच्चों को गंदे पानी से होकर स्कूल जाना पड़ता है, जिससे गिरने और चोटिल होने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। कई बच्चे बीमार पड़ रहे हैं, जिससे अभिभावकों की चिंता और बढ़ गई है। वहीं ग्राम प्रधान संजय पटेल ने बताया कि आराजी संख्या 207, जिसे चमरहिया पोखरी के नाम से जाना जाता है, उस पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण किया गया है। पोखरी की खुदाई के लिए कई बार प्रयास किए गए, लेकिन अतिक्रमण के कारण काम नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि यदि न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए अतिक्रमण हटाकर पोखरी का समुचित स्वरूप बहाल कर दिया जाए, तो गांव की जलभराव की समस्या स्वतः समाप्त हो सकती है। फिलहाल ग्रामीण न्यायालय के आदेश पर जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि उन्हें इस गंभीर समस्या से राहत मिल सके |

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