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नाबालिग पीड़िता को अब तक न्याय नहीं, शिकायतकर्ताओं को मिला नोटिस

बरगी प्रकरण में पुलिस कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल, संगठन ने ठोका ₹10 करोड़ का मानहानि दावा

जबलपुर | विशेष रिपोर्ट

जिला जबलपुर के बरगी थाना क्षेत्र से जुड़े एक अत्यंत गंभीर मामले में पुलिस कार्रवाई को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
एक अनुसूचित जाति की नाबालिग बालिका के साथ दुष्कर्म के प्रयास के प्रकरण में, जहां कानूनन त्वरित जांच और पीड़िता के न्यायिक बयान आवश्यक माने जाते हैं, वहीं आज दिनांक तक पीड़िता के धारा 164 CrPC के कथन न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किए जाने का विषय सामने आया है।

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इसी बीच, मामले में शिकायत करने वाले संगठन का आरोप है कि निष्पक्ष जांच की मांग करने के स्थान पर, संबंधित चौकी प्रभारी द्वारा संगठन को कानूनी नोटिस भेजा गया, जिसे संगठन ने “दबाव बनाने का प्रयास” बताया है।


164 के बयान में देरी पर उठे सवाल

कानूनी जानकारों के अनुसार, नाबालिग पीड़िता के 164 CrPC बयान न्यायिक प्रक्रिया का अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं, जिससे जांच की दिशा और पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।
संगठन का कहना है कि जब यह प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई, उसी दौरान संगठन पर नोटिस भेजा जाना कई तरह की शंकाओं को जन्म देता है

हालांकि, पुलिस की ओर से इस विषय में अब तक कोई विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।


संगठन पर दबाव बनाने का आरोप

अखिल भारतीय इंजीनियरिंग छात्र संगठन (ESO INDIA) के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण सिंह तथा विधि छात्र संगठन के प्रदेश अध्यक्ष पवन सिंह देवक ने संयुक्त बयान में कहा कि—

“हमारा उद्देश्य केवल पीड़िता को न्याय दिलाना है।
लेकिन न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाने के बाद हमें नोटिस भेजा गया, जिसे हम संगठन पर दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देखते हैं।”

संगठन का दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम से उनकी सामाजिक एवं सार्वजनिक प्रतिष्ठा को क्षति पहुंची है


₹10 करोड़ का मानहानि दावा, हाईकोर्ट से आयोगों तक भेजी गई प्रतियां

संगठन ने उक्त नोटिस के जवाब में कानूनी उत्तर सह प्रतिनोटिस भेजते हुए ₹10 करोड़ का मानहानि दावा प्रस्तुत किया है।
इस कार्रवाई की प्रतिलिपि—

  • माननीय उच्च न्यायालय

  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग

  • राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग

  • बाल अधिकार एवं महिला आयोग

  • वरिष्ठ पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों

को भी भेजी गई है।

संगठन का कहना है कि यह कदम कानूनी अधिकारों की रक्षा एवं निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।


पुलिस पक्ष का इंतज़ार

बरगी चौकी प्रभारी एवं पुलिस विभाग की ओर से

  • 164 CrPC बयान में देरी

  • नोटिस भेजने के कारण

  • संगठन के आरोपों

पर समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी


मामला अब केवल स्थानीय नहीं

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रकरण अब केवल एक थाना या क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पीड़िता के अधिकार, निष्पक्ष जांच और संस्थागत जवाबदेही से जुड़ा एक व्यापक मुद्दा बन गया है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि
👉 पीड़िता के बयान कब दर्ज होते हैं,
👉 जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है,
👉 और सभी पक्षों को कानून के अनुसार समान अवसर मिलता है या नहीं

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