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अल्ट्राटेक हिरमी-रावन संयंत्र में दो मासूमों की मौत से सनसनी, सवालों के घेरे में प्रबंधन और प्रशासन

मृत बच्चों को जल्दबाजी में उड़ीसा भेजे जाने की चर्चा, मौतों के आंकड़ों को दबाने का आरोप – स्थानीय लोगों में आक्रोश

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बलौदाबाजार।
जिले के सिमगा विकासखंड अंतर्गत स्थित अल्ट्राटेक सीमेंट संयंत्र हिरमी-रावन एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में आ गया है। संयंत्र परिसर के भीतर दो मासूम बच्चों की पानी में डूबने से मौत की खबर ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी है। घटना को लेकर जहां लोगों में भारी आक्रोश है, वहीं संयंत्र प्रबंधन और प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, संयंत्र के भीतर स्थित पानी से भरे क्षेत्र में दो बच्चों के डूबने की घटना सामने आई है। बताया जा रहा है कि दोनों बच्चों की मौत हो गई, लेकिन इस पूरे मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। चर्चा यह भी है कि मृत बच्चों के शवों को जल्दबाजी में सीधे उड़ीसा भेज दिया गया, जिससे मामले को सार्वजनिक होने से रोका जा सके।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि संयंत्र में पहले भी कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन अधिकतर मामलों को दबा दिया जाता है। कुछ लोगों का कहना है कि पिछले समय में भी कई मौतें हो चुकी हैं, जिनकी सही जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर संयंत्र के भीतर सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि संयंत्र में बाहरी राज्यों के कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि छत्तीसगढ़ के स्थानीय लोगों को प्रताड़ना, शिकायतों और धमकी भरे व्यवहार का सामना करना पड़ता है। इससे क्षेत्र में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है।
घटना के संबंध में जब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई तो बीएमओ पारस पटेल ने कहा, “मैं अभी छुट्टी में हूं, मुझे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है।”
वहीं एसडीएम सिमगा अतुल शेटे ने कहा, “मैं इस विषय में तहसीलदार से जानकारी लेकर बताता हूं।”
घटना के बाद क्षेत्र में यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि इतनी गंभीर घटना हुई है तो प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट बयान क्यों सामने नहीं आया। वहीं होली पर्व की व्यस्तता के बीच स्थानीय लोगों का कहना है कि बड़े अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस मामले से अनजान बने हुए हैं।
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, मृत बच्चों के परिवारों को न्याय मिले और संयंत्र के भीतर सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता से समीक्षा की जाए। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जिला प्रशासन इस संवेदनशील मामले में क्या कदम उठाता है और सच सामने लाने के लिए क्या कार्रवाई करता है।

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