

भिलाई । पुणे के वाकड़ क्षेत्र में 8 फरवरी 2026 को पुणे में निवासरत देवांगन समुदाय द्वारा परमेश्वरी महोत्सव बड़े ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। यह पुणे में परमेश्वरी महोत्सव का बारहवां वर्ष था जिसे समाजजनों ने अत्यंत श्रद्धा और एकता के भाव से संपन्न किया , जिसमें पुणे के विभिन्न क्षेत्र से लगभग 100 लोग शामिल हुए, ।
कार्यक्रम की शुरुआत पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) से हुई, जिसकी जिम्मेदारी अश्वनी देवांगन ने संभाली। इसके पश्चात माता परमेश्वरी की विधिवत पूजा-अर्चना की गई, जिसका संचालन प्रीति देवांगन, दिव्या देवांगन एवं काव्या देवांगन द्वारा किया गया। पूजा उपरांत प्रीति देवांगन ने मंच संचालन का कार्यभार संभाला|

इसके बाद परिचय सत्र आयोजित किया गया, जिसमें सभी देवांगन परिवारों ने अपना-अपना परिचय दिया, जिससे आपसी संबंध और भी मजबूत हुए। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का संचालन मिथलेश देवांगन एवं नितिन देवांगन ने किया, जिसमें बच्चों और युवाओं ने आकर्षक प्रस्तुतियाँ दीं। खेलकूद कार्यक्रम की जिम्मेदारी जयेश देवांगन एवं मिथलेश देवांगन ने संभाली, जिसमें सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। दिव्यांश एवं अक्षत ने फोटोग्राफी की जिम्मेदारी लिया|
पूरे आयोजन का प्रबंधन देवेंद्र देवांगन द्वारा सफलतापूर्वक संभाला गया। कार्यक्रम के अंत में देवेंद्र देवांगन ने आभार व्यक्त करते हुए सभी उपस्थित अतिथियों एवं परिवारों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सुरेश देवांगन, अजय गढ़वाल एवं रोहित देवांगन उपस्थित रहे। साथ ही अनेक प्रमुख देवांगन परिवार अपने-अपने परिवारजनों के साथ शामिल हुए, जिनमें महेश्वर देवांगन, कमल किशोर देवांगन, कमल देवांगन, रोहित देवांगन, धनेंद्र देवांगन, राहुल देवांगन, यश देवांगन एवं परिवार, योगेश देवांगन एवं परिवार, राजकुमार देवांगन एवं परिवार, कमलेश देवांगन, नेहा देवांगन, राजेंद्र देवांगन, आशीष देवांगन, पंकज देवांगन, अभिनव मेहर, रूपेश चित्रानि देवांगन, मनोहर देवांगन, चंद्रप्रकाश देवांगन, अश्विनी लेखा देवांगन, मृणाल देवांगन, रिकेश देवांगन, भूषण पूजा देवांगन , स्वप्निल देवांगन,नवनीत देवांगन एवं अन्य समाजजन शामिल रहे। परमेश्वरी महोत्सव में सहयोग राशि के लिए नरेंद्र देवांगन रायपुरा, धर्मेश देवांगन और जयंती देवांगन का विशेष रूप से धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

देवांगन परिवार द्वारा आयोजित यह परमेश्वरी महोत्सव समाज की एकता, संस्कृति और परंपरा का सशक्त प्रतीक बनकर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।






