

हरदोई इस समय भय, आक्रोश और असुरक्षा के माहौल से गुजर रहा है। महज़ 72 घंटों के भीतर पांच हत्याओं की सनसनीखेज वारदातों ने पूरे जिले को हिला कर रख दिया है। ताज़ा मामला पाली थाना क्षेत्र के मुडरामऊ गांव से सामने आया है, जहां एक डिप्टी कमिश्नर के भाई की चाकुओं से गोदकर निर्मम हत्या कर दी गई। शनिवार सुबह ग्रामीणों ने युवक को खून से लथपथ हालत में पड़ा देखा। शरीर पर कई गहरे जख्म थे, जो हमले की बर्बरता को बयां कर रहे थे। परिजन और गांव के लोग उसे तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों ने काफी प्रयास किया, मगर युवक को बचाया नहीं जा सका।
इस घटना के बाद गांव में सनसनी फैल गई। भारी संख्या में लोग मौके पर जुट गए। परिवार में कोहराम मच गया और ग्रामीणों में आक्रोश साफ दिखाई दिया। लगातार हो रही हत्याओं से लोग दहशत में हैं और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। तीन दिनों के भीतर पांच हत्याओं की घटनाएं अलग-अलग क्षेत्रों में सामने आई हैं, जिससे यह सवाल उठने लगा है कि आखिर जिले में कानून-व्यवस्था की स्थिति क्या है?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और उन्हें कानून का कोई भय नहीं रह गया है। रात के समय गश्त व्यवस्था कमजोर बताई जा रही है। कई नागरिकों का कहना है कि पुलिस की मौजूदगी सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आती है। हालांकि पुलिस प्रशासन का दावा है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है, आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं और संदिग्धों से पूछताछ जारी है। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए गए हैं और आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं।
लेकिन जनता अब सिर्फ आश्वासन नहीं, परिणाम चाहती है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या खुफिया तंत्र फेल हो चुका है? क्या जिले में अपराधियों के खिलाफ पहले से कोई ठोस रणनीति नहीं थी? क्या हाल के दिनों में बढ़ती आपराधिक गतिविधियों के बावजूद पर्याप्त सतर्कता नहीं बरती गई? इन सवालों का जवाब प्रशासन को देना होगा।
राजनीतिक गलियारों में भी इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है, जबकि प्रशासन का कहना है कि किसी भी सूरत में दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। जिले में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किए जाने और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने की बात भी सामने आई है।
हरदोई की जनता आज भय के साये में जी रही है। बाजारों में चर्चा का एक ही विषय है—लगातार हो रही हत्याएं और असुरक्षित माहौल। माता-पिता अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, व्यापारी वर्ग भी बेचैन है। अगर जल्द ही अपराधियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—हरदोई में आखिर कब थमेगा यह खूनी सिलसिला? क्या पुलिस अपराधियों को जल्द पकड़कर जनता का विश्वास बहाल कर पाएगी? क्या प्रशासन कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कड़े कदम उठाएगा? पूरे प्रदेश की नजरें अब हरदोई पर टिकी हैं और जनता को न्याय व सुरक्षा का इंतजार है।






