

🚨 मेरठ में “फर्जी IAS” का मामला पलटा: असली अधिकारी होने के सबूत सामने आते ही पुलिस को छोड़ना पड़ा राहुल कौशिक, जांच पर उठे बड़े सवाल ⚖️📄
उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद के नौचंदी थाना क्षेत्र में कथित “फर्जी IAS” को लेकर हुई पुलिस कार्रवाई अचानक उलट गई, जब आरोपी के परिवार ने ऐसे दस्तावेज और प्रमाण पेश किए, जिन्होंने पुलिस के दावों की हवा निकाल दी। पुलिस ने जिस व्यक्ति — राहुल कौशिक — को गिरफ्तार कर खुद को IAS अधिकारी बताकर लोगों को धमकाने वाला बताया था, उसे बाद में आनन-फानन में परिजनों की सुपुर्दगी में रिहा करना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यशैली और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 😮
पुलिस ने पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया था कि राहुल कौशिक खुद को IAS अधिकारी बताकर लोगों को फोन पर धमकाता था और कई अधिकारियों को भी झांसे में लेने की कोशिश करता था। आयुष विक्रम सिंह (SP सिटी) ने भी बताया था कि राहुल वर्तमान में किसी सरकारी पद पर कार्यरत नहीं है और उसके खिलाफ जांच की जा रही है। लेकिन मामला तब पलट गया जब आरोपी के परिजनों ने उसके चयन और सेवा से जुड़े कई आधिकारिक दस्तावेज पेश कर दिए। 📑
परिवार के अनुसार, राहुल कौशिक ने वर्ष 2008 में UPSC परीक्षा उत्तीर्ण की थी और उन्हें इंडियन पोस्टल सर्विस (IPS — Indian Postal Service) आवंटित हुई थी, जिसमें उनकी ऑल इंडिया रैंक 728 बताई गई। परिजनों ने प्रशिक्षण से जुड़े फोटो, तत्कालीन उपराष्ट्रपति के साथ स्पेशल फाउंडेशन कोर्स की तस्वीर, Bureau of Parliamentary Studies and Training का प्रमाणपत्र तथा UPSC परिणाम से संबंधित अखबार की कटिंग भी पुलिस को सौंपी। इतना ही नहीं, बताया गया कि राहुल ने Rafi Ahmed Kidwai National Postal Academy में दो वर्ष का प्रशिक्षण प्राप्त किया था और वर्ष 2010 में उनकी पहली तैनाती दिल्ली में हुई, जिसके बाद वे असम के गुवाहाटी और तमिलनाडु के चेन्नई में भी पदस्थ रहे। 🏛️
हालांकि परिजनों ने यह भी स्वीकार किया कि वर्ष 2017-18 में राहुल पर धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगे थे, जिसके बाद उन्हें पहले निलंबित और फिर 2019 में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। यह मामला वर्तमान में Central Administrative Tribunal (CAT) में विचाराधीन है, जहां राहुल अपनी बर्खास्तगी को चुनौती दे रहे हैं। परिवार का दावा है कि नौकरी छूटने और पारिवारिक समस्याओं के कारण राहुल मानसिक तनाव और अवसाद से गुजर रहे हैं। 🧠
बताया जा रहा है कि हाल ही में राहुल ने किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को फोन कर दिया था, जिसके बाद कहासुनी हुई और पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। परिजनों का आरोप है कि मामूली विवाद को बिना पूरी जांच के “फर्जी IAS” बताकर मीडिया में प्रचारित कर दिया गया। जब स्थानीय लोगों और परिवार ने थाने पहुंचकर दस्तावेज प्रस्तुत किए, तब पुलिस को अपनी कार्रवाई पर पुनर्विचार करना पड़ा और आखिरकार राहुल को छोड़ दिया गया। 🚔
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बिना पूरी जांच के किसी व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से अपराधी घोषित करना उचित है। फिलहाल पुलिस का कहना है कि परिवार द्वारा दिए गए दस्तावेजों की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं स्थानीय स्तर पर यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। ⚖️
✍️ रिपोर्ट: एलिक सिंह
संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़
ब्यूरो प्रमुख – हलचल इंडिया न्यूज़
ब्यूरो प्रमुख – दैनिक आशंका बुलेटिन, सहारनपुर
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