

सतना : भारतीय सेना के जांबाज सैनिक, नायक सुनील कुमार मिश्रा (22 वर्ष की गौरवशाली सेवा, आर्मी सप्लाई कोर) के सेवानिवृत्त होकर सतना आगमन पर आज सुबह सतना रेलवे स्टेशन देशभक्ति, गर्व और उत्साह के रंग में सराबोर दिखाई दिया।
28 फरवरी 2026 (AN) को सेना से सेवानिवृत्त हुए नायक सुनील कुमार मिश्रा के स्वागत हेतु उनके पिता-माता, भाई-बहन, भाभियाँ, धर्मपत्नी, बच्चे एवं परिजन प्रातः से ही स्टेशन पर फूल-मालाएँ, चंदन तिलक, अक्षत, कलश, विविध उपहार, बैंड-बाजा और खुली जीप के साथ प्रतीक्षा कर रहे थे। जैसे ही ट्रेन प्लेटफॉर्म पर पहुँची, पूरा स्टेशन “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के नारों से गूंज उठा।
चंद्रशेखर आज़ाद पूर्व सैनिक संगठन, सतना के अध्यक्ष श्री सुनील सिंह परिहार, उपाध्यक्ष श्री मनोज कुमार मिश्रा, कोषाध्यक्ष श्री पवन कुमार सिंह, सह-कोषाध्यक्ष श्री लोकेन्द्र सिंह,
श्री कमलेश सिंह (SBI) – अनुशासन समिति,
श्री पी.डी. सिंह परिहार – अनुशासन समिति,
श्री सुरेन्द्र सिंह – संगठन मंत्री (नव नियुक्त),
श्री पुष्पराज सिंह – अध्यक्ष, नागौद इकाई,
तथा अनिल द्विवेदी, भोले सिंह (त्यौंधारी), सुरेन्द्र सिंह (सुहास), शिवम तिवारी, अशोक सिंह जी, नरेंद्र सिंह (SBI), बंसीलाल जी, पुनीत सिंह जी सहित 50 से अधिक सम्मानित सदस्यों ने भव्य उपस्थिति दर्ज कराई।
स्टेशन पर माल्यार्पण, चंदन तिलक, आरती एवं पुष्पवर्षा के साथ नायक मिश्रा जी का ऐतिहासिक स्वागत किया गया। बैंड-बाजे की धुन पर नृत्य करते हुए खुले वाहन में उन्हें सम्मानपूर्वक विदा किया गया। यह अद्भुत दृश्य देखकर स्टेशन पर मौजूद यात्री भी भावविभोर हो उठे और इस अनूठे स्वागत की खुलकर प्रशंसा की।
अध्यक्ष श्री सुनील सिंह परिहार ने खुले हृदय से माल्यार्पण कर नायक सुनील कुमार मिश्रा जी को सेवानिवृत्ति की बधाई दी और उन्हें संगठन का सम्मानित सदस्य बनाते हुए उनके द्वितीय कैरियर एवं पारिवारिक जीवन के लिए मंगलकामनाएँ व्यक्त कीं।
इस अवसर पर भावुक होकर नायक सुनील कुमार मिश्रा ने सुबह-सवेरे भारी संख्या में उपस्थित सभी साथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने अध्यक्ष महोदय एवं संगठन के प्रति कृतज्ञता जताते हुए कहा कि “मैं संगठन की गरिमा और विकास के लिए सभी नियमों का पालन करते हुए कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करूंगा।”
आज का यह स्वागत समारोह न केवल एक सैनिक के सम्मान का प्रतीक बना, बल्कि यह संदेश भी दे गया कि—
“जो देश के लिए जीता है, समाज उसे सिर आँखों पर बैठाता है।”












