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बस्ती का ‘नटवरलाल’: जिला पंचायत सदस्य ने सीएसपी की आड़ में जनता को लूटा, अब फांसी का फंदा दिखा कर रच रहा प्रपंच!

गजब है हरैया का ये 'माननीय' नेता: पहले गरीबों के खाते किए 'साफ', अब पुलिस से बचने के लिए खेल रहा 'सुसाइड' का ड्रामा!

अजीत मिश्रा (खोजी)

🧭गबन’ का ‘माननीय’ मॉडल: जनता का पैसा साफ़, अब ‘इमोशनल अत्याचार’ का विलाप!🧭

  • मुलायमगंज में महाघोटाला: बैंक सखी नहीं, यहाँ ‘नेताजी’ ने मारी डकैती; पिता-पुत्र फरार, जनता का पैसा डकार!
  • साहब! ये सीएसपी है या डकैती का अड्डा? जिला पंचायत सदस्य के ‘डिजिटल हाथ की सफाई’ से केशवपुर बैंक में मचा हड़कंप!
  • खाता ‘निल’, नेता ‘गुम’ और पीड़ित ‘बेहाल’— हरैया में सीएसपी संचालक का करोड़ों का खेल!

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)

बस्ती। राजनीति में सेवा का मेवा तो सबने सुना था, लेकिन बस्ती के हरैया क्षेत्र में एक ‘माननीय’ ने सेवा का ऐसा ‘पॉइंट’ खोला कि ग्राहकों की मेहनत की गाढ़ी कमाई ही ‘पॉइंट-ब्लैंक’ पर गायब कर दी। मामला हरैया के मुलायमगंज बाजार का है, जहाँ एक जिला पंचायत सदस्य महोदय ‘कस्टमर सर्विस पॉइंट’ (CSP) के नाम पर जनता के पैसों से अपनी राजनीति की ‘सर्विस’ चमका रहे थे। अब जब खाते खाली हुए और जनता सड़कों पर आई, तो नेता जी को अचानक ‘प्रताड़ना’ याद आ गई और उन्होंने ‘आत्महत्या’ की धमकी वाला पुराना फिल्मी पैंतरा चल दिया।

खाते हुए ‘नील बटे सन्नाटा’, साहब! मेरा पैसा कहाँ गया?

एसबीआई (SBI) शाखा केशवपुर के बाहर खड़ी भीड़ किसी सरकारी योजना का लाभ लेने नहीं, बल्कि अपनी लूटी हुई उम्मीदों की शिकायत करने आई थी। उपभोक्ताओं का आरोप है कि मुलायमगंज बाजार के इस सीएसपी संचालक ने, जो कि जिला पंचायत सदस्य भी हैं, उनके खातों में सेंध लगा दी है। लोग बैंक मैनेजर के सामने गिड़गिड़ा रहे हैं— “साहब! हमने तो दाने-दाने जोड़कर जमा किए थे, यहाँ तो पूरा का पूरा खाता ही गोल हो गया!”

गबन, धमकी और गायब होने का ‘मास्टर स्ट्रोक’

इस पूरे घोटाले की पटकथा बड़ी दिलचस्प है। पहले जनता का पैसा उड़ाया गया, और जब हिसाब देने की बारी आई तो नेता जी ने ‘विक्टिम कार्ड’ खेल दिया। संबंधित विभाग के अधिकारियों पर प्रताड़ना का आरोप मढ़ते हुए और ‘ब्याज पर पैसा लेने’ का रोना रोते हुए उन्होंने आत्महत्या की धमकी भरा पत्र लिख डाला। शायद नेता जी को लगता है कि ‘इमोशनल ब्लैकमेलिंग’ की चादर में गबन के दाग छिप जाएंगे।

मजेदार बात यह है कि अब ‘पिता-पुत्र’ दोनों ही घर से लापता हैं। पैकोलिया थाने में गुमशुदगी दर्ज है। इसे ‘फरार’ होना कहें या ‘गायब’ होना, यह तो पुलिस तय करेगी, लेकिन जनता की नजर में यह सीधा-सीधा ‘हिसाब’ से बचने का जुगाड़ है।

बस्ती में ‘सीएसपी’ यानी ‘चपत लगाओ पैसा’ केंद्र?

यह कोई पहला मामला नहीं है। बस्ती मंडल में सीएसपी संचालकों द्वारा गबन करना अब एक परंपरा बनती जा रही है। सवाल यह है कि आखिर इन केंद्रों पर बैंक और प्रशासन की लगाम कितनी ढीली है? क्या कोई भी ‘माननीय’ कुर्सी की रसूख और बैंक की आईडी लेकर जनता की जेब काट सकता है?

व्यवस्था पर कुछ तीखे सवाल:

  • बैंक प्रशासन: जब खाते से पैसा गायब हो रहा था, तब आपकी मॉनिटरिंग प्रणाली क्या ‘कुंभकर्णी नींद’ में थी?
  • प्रशासन: क्या आत्महत्या की धमकी मात्र देने से गबन का अपराध धुल जाता है?
  • जनता: क्या अब हम अपने पैसे की सुरक्षा के लिए बैंक जाने के बजाय ‘माननीयों’ के रहमोकरम पर जिएं?IMG 20260416 WA0493

नेता जी, पत्र लिखकर धमकी देना आसान है, लेकिन उन गरीबों के आंसुओं का हिसाब देना मुश्किल होगा जिनकी खून-पसीने की कमाई आपके ‘डिजिटल’ खेल की भेंट चढ़ गई। फिलहाल, पुलिस और बैंक जांच की फाइलें पलट रहे हैं, और जनता अपने खाली पासबुक को देख कर लोकतंत्र के इस ‘अनोखे’ जनसेवक को कोस रही है।

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