
*“प्रशासन की घोर लापरवाही उजागर: न्याय न मिलने पर भूख हड़ताल की चेतावनी, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन”*
हरदोई जनपद के शाहाबाद क्षेत्र से एक बार फिर प्रशासनिक निष्क्रियता और कानून व्यवस्था की विफलता का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। विश्व मानव संगठन आध्यात्मिक भारत वर्ष के राष्ट्रीय अध्यक्ष संत कुमार सिंह एडवोकेट द्वारा मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन में स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है। इस ज्ञापन में न केवल क्षेत्र में फैली अव्यवस्थाओं का खुलासा किया गया है, बल्कि चेतावनी दी गई है कि यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो 1 जून 2026 से भूख हड़ताल शुरू कर दी जाएगी।
ज्ञापन में स्पष्ट शब्दों में आरोप लगाया गया है कि प्रशासनिक अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ चुके हैं। आम जनता की सुरक्षा, न्याय और मूलभूत सुविधाओं को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। क्षेत्र में कानून का डर खत्म होता जा रहा है, जिससे असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद हैं।
सबसे गंभीर आरोप हाल ही में हुए एक सड़क हादसे को लेकर लगाया गया है। ज्ञापन के अनुसार, 4 अप्रैल 2026 को ग्राम न्यायालय से तहसील न्यायालय जाते समय एक तेज रफ्तार मोटरसाइकिल ने टक्कर मार दी, जिसे एक नाबालिग चला रहा था। बाइक पर तीन नाबालिग सवार थे और वाहन पर फर्जी नंबर प्लेट लगी हुई थी। इतना ही नहीं, वाहन का बीमा भी वर्षों से नहीं कराया गया था। इस हादसे में पीड़ित गंभीर रूप से घायल हो गया और उसकी जान तक खतरे में पड़ गई।
हैरानी की बात यह है कि इतने गंभीर मामले के बावजूद प्रशासन ने अब तक कोई कठोर कार्रवाई नहीं की। न तो आरोपी की गिरफ्तारी हुई और न ही वाहन के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाया गया। पुलिस की इस ढिलाई को लेकर ज्ञापन में कड़ी आपत्ति जताई गई है और इसे कानून व्यवस्था की खुली विफलता बताया गया है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि हादसे के बाद पीड़ित को समय पर उचित चिकित्सा सुविधा और प्रशासनिक सहयोग नहीं मिला। कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं और अधिवक्ताओं की मदद से उसे अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई संवेदनशीलता नहीं दिखाई गई। इस उदासीन रवैये ने जनता के आक्रोश को और बढ़ा दिया है।
इसके अलावा, क्षेत्र में बढ़ती अव्यवस्थाओं को लेकर भी कई गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं। सड़कों पर स्पीड ब्रेकर का अभाव, वाहनों की अनियंत्रित गति, नाबालिगों द्वारा खुलेआम वाहन चलाना, और फर्जी नंबर प्लेट वाली गाड़ियों का संचालन—ये सभी समस्याएं प्रशासन की नाकामी को उजागर करती हैं।
ज्ञापन में साफ तौर पर कहा गया है कि यदि शासन और प्रशासन ने अब भी आंखें मूंदे रखीं, तो इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा। संगठन ने चेतावनी दी है कि अब सहनशीलता की सीमा समाप्त हो चुकी है और यदि जल्द ही कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन उग्र रूप ले सकता है।
📌 प्रमुख मांगे:
1. ब्लॉक से कोतवाली तक 10 स्पीड ब्रेकर तत्काल प्रभाव से लगाए जाएं, ताकि सड़क हादसों पर रोक लग सके।
2. तहसील के सामने स्थायी वाहन चेकिंग पोस्ट स्थापित किया जाए, जिससे नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके।
3. ग्राम न्यायालय, तहसील और कोतवाली गेट पर उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, ताकि हर गतिविधि की निगरानी हो सके।
4. नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए और पकड़े जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई कर वाहन सीज किए जाएं।
5. फर्जी नंबर प्लेट, अवैध रूप से लिखे पदनाम (जैसे अधिवक्ता, पत्रकार, पुलिस आदि) वाली गाड़ियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर कठोर कार्रवाई की जाए।
6. शाहाबाद तहसील में पिछले 26 वर्षों से लंबित मुंसिफ न्यायालय को तत्काल प्रभाव से चालू किया जाए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यदि इन मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो 1 जून 2026 को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की जाएगी। भूख हड़ताल सोमवार सुबह 10:00 बजे से शुरू होगी।
*स्थान* : प्रभुजी की कोठी नं.-185, दो मंजिल, मोहल्ला खत्ता जमाल खां, शाहाबाद, हरदोई।,
संगठन ने स्पष्ट किया है कि इस आंदोलन के दौरान यदि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
ज्ञापन का लहजा बेहद कठोर और आक्रोशपूर्ण है, जिसमें साफ तौर पर प्रशासन को चेतावनी दी गई है कि अब जनता चुप बैठने वाली नहीं है। “क्या यही सुशासन है?” जैसे सवाल उठाते हुए संगठन ने शासन की नीतियों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को उजागर किया है।
अंत में, यह मामला केवल एक दुर्घटना या कुछ मांगों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है। यदि समय रहते इन मुद्दों का समाधान नहीं किया गया, तो यह आंदोलन व्यापक जनसमर्थन के साथ एक बड़े विरोध का रूप ले सकता है, जो प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।









