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“बस्ती वन विभाग में भ्रष्टाचार का ‘नंगा नाच’: दर्जन भर पेड़ों के कत्लेआम पर दरोगा ने लगाया महज 10 हजार का मरहम”

"वन दरोगा की गणित फेल या 'सुविधा शुल्क' का खेल? 12 पेड़ों की कटान, जुर्माना सिर्फ एक का!"

अजीत मिश्रा (खोजी)

वन विभाग में ‘सुविधा शुल्क’ का बोलबाला: रेंजर के आदेश को दरोगा ने ठेंगे पर रखा, कौड़ियों के भाव बिके प्रतिबंधित पेड़

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)

  • “साहब! आपकी नाक के नीचे बिक गई अगई भगाड़ की हरियाली; रेंजर के आदेश को दरोगा ने रद्दी की टोकरी में डाला”
  • “जुर्माना नहीं, यह तो ‘सेटिंग’ है! अगई भगाड़ वृक्ष कटान मामले में वन दरोगा और पुलिस की जुगलबंदी आई सामने”
  • “बस्ती: प्रतिबंधित पेड़ों पर चली कुल्हाड़ी, वन दरोगा ने ‘जुर्माने’ के नाम पर की सरकारी खानापूर्ति”

बस्ती। जनपद के बहादुरपुर विकासखण्ड अंतर्गत अगई भगाड़ गांव में हरे-भरे प्रतिबंधित पेड़ों पर चली कुल्हाड़ी ने वन विभाग के भ्रष्टाचार की पोल खोलकर रख दी है। जहाँ एक ओर उत्तर प्रदेश सरकार वृक्षारोपण के लिए करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं बस्ती वन विभाग के ‘कारिंदे’ चंद रुपयों की खातिर हरियाली का सौदा करने में मस्त हैं।

मामला: अगई भगाड़ में ‘खेला’ कर गए हल्का वन दरोगा

ग्राम पंचायत अगई भगाड़ में बिना किसी परमिट के एक-दो नहीं, बल्कि दर्जन भर से अधिक आम के प्रतिबंधित पेड़ों को भू-माफियाओं और ठेकेदारों ने काटकर धराशायी कर दिया। जब मामला सोशल मीडिया पर गर्माया, तो आनन-फानन में डीएफओ (DFO) ने संज्ञान लेते हुए कड़ी कार्यवाही के निर्देश दिए। डीएफओ के आदेश पर रेंजर कप्तानगंज राजू प्रसाद ने हल्का वन दरोगा को मौके पर जाकर विधिक कार्यवाही करने को कहा। लेकिन रेंजर साहब के ‘कड़े निर्देशों’ को हल्का दरोगा ने ‘सुविधा शुल्क’ की चादर ओढ़ाकर ठंडे बस्ते में डाल दिया।

भ्रष्टाचार का गणित: दर्जन भर पेड़ों पर मात्र 10 हजार का जुर्माना!

सरकारी शासनादेश और नियमावली के अनुसार, एक प्रतिबंधित पेड़ के अवैध कटान पर 10 हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान है। गणित सीधा है—अगर एक दर्जन (12) पेड़ कटे, तो जुर्माना कम से कम 1 लाख 20 हजार होना चाहिए था। परंतु, हल्का वन दरोगा की ‘जादुई कलम’ ने ऐसा करिश्मा किया कि पूरी कटान को महज 10 हजार रुपये के जुर्माने में समेट दिया।

बड़ा सवाल: क्या बाकी के 11 पेड़ों का अस्तित्व दरोगा जी की फाइलों में गुम हो गया या फिर ‘सेटेलमेंट’ की रकम ने दरोगा जी की आंखों पर पट्टी बांध दी?

उच्च अधिकारियों की आंखों में झोंकी धूल

हल्का वन दरोगा ने न केवल सरकार को राजस्व का चूना लगाया, बल्कि अपने ही उच्चाधिकारियों को गुमराह करने का दुस्साहस भी किया। कार्यवाही के नाम पर की गई यह ‘लीपापोती’ जिले भर में चर्चा का विषय बनी हुई है। सूत्रों की मानें तो वन दरोगा और स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से इस पूरे मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया गया है।

उठ रही है निष्पक्ष जांच की मांग

यदि जिले के जिम्मेदार अधिकारी वाकई भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन का दावा करते हैं, तो इस प्रकरण की किसी दूसरी टीम से पुन: जांच करानी अनिवार्य है। अगर मौके का भौतिक सत्यापन ईमानदारी से हुआ, तो हल्का वन दरोगा और विभागीय मिलीभगत का कच्चा चिट्ठा खुलना तय है।

देखना यह है कि क्या डीएफओ बस्ती अपने आदेशों की धज्जियां उड़ाने वाले मातहतों पर गाज गिराएंगे या फिर भ्रष्टाचार की यह ‘हरियाली’ इसी तरह फलती-फूलती रहेगी?

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