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कांठ: जाम्भाणी संस्कार शिविर का शुभारंभ, संतों ने जाम्भाणी साहित्य एवं व्यक्तित्व निर्माण पर दिया मार्गदर्शन

संतों के सानिध्य में बच्चों और श्रद्धालुओं ने हवन कर दी आहुतियां, बच्चों ने लिया जाम्भाणी संस्कृति एवं संस्कारों को जीवन में अपनाने का संकल्प

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जाम्भाणी संस्कार शिविर में मौजूद संत।
कांठ (मुरादाबाद)। कांठ नगर के श्री बिश्नोई मंदिर ​विशनपुरा में पांच दिवसीय जाम्भाणी संस्कार शिविर के प्रथम दिवस के अवसर पर बुधवार, 17 जून को प्रातः में जाम्भाणी संतों के सानिध्य में हवन का आयोजन किया गया। हवन के उपरांत शिविर में उपस्थित बच्चों को जलपान कराया गया। इसके बाद संतों द्वारा गुरु जाम्भोजी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर शिविर का विधिवत शुभारंभ किया गया।

शिविर के दौरान बिश्नोई संतों ने जाम्भाणी साहित्य, गुरु जाम्भोजी के जीवन-दर्शन एवं बिश्नोई पंथ की शिक्षाओं पर अपने विचार व्यक्त किए। संत स्वामी रामेश्वरानंद जी ने गुरु जाम्भोजी के अवतार लेने के कारण, बिश्नोई पंथ की स्थापना तथा पंथ के आधारभूत सिद्धांतों पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं आचार्य सत्यदेवानंद जी ने व्यक्तित्व निर्माण, नैतिक मूल्यों एवं संस्कारों के महत्व पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं और बच्चों ने संतों के विचारों को ध्यानपूर्वक सुना तथा जाम्भाणी संस्कृति एवं संस्कारों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। प्रथम दिवस के कार्यक्रम में संत स्वामी रामेश्वरानंद जी महाराज, आचार्य सत्यदेवानंद जी, स्वामी जगदेवानंद जी, स्वामी अशोकानंद जी, ऋषिदानंद जी सहित प्रतिनिधियों में कुंवर सुरेंद्र सिंह बिश्नोई, चंद्रप्रकाश सिंह बिश्नोई, डॉ. ओमराज सिंह, प्रदीप बिश्नोई एडवोकेट, विष्णुदास बिश्नोई, राजकुमार सेवक, राजस्थान से शिविर प्रभारी के रूप में योगाचार्य सुभाष उपस्थित रहे। शिविर का संचालन एवं संयोजन राजू राम जी महाराज के द्वारा किया गया।

रिपोर्ट: पंकज कुमार, कांठ।
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