
जशपुर। बाल मधुमेह यानी टाइप-1 डायबिटीज से जूझ रहे बच्चों और उनके परिवारों को बेहतर जीवन प्रबंधन की राह दिखाने जिला स्वास्थ्य समिति जशपुर ने मंगलवार को रोगी सहायता समूह – PSG की फॉलो-अप बैठक आयोजित की।
यूनिसेफ छत्तीसगढ़ एवं एकम फाउंडेशन के तकनीकी सहयोग से हुए इस कार्यक्रम में 6 बाल रोगियों और 8 अभिभावकों सहित कुल 32 लोगों ने भाग लिया। बैठक का उद्देश्य बच्चों को नियमित रक्त शर्करा जांच, समय पर इंसुलिन, संतुलित पोषण और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व को समझाना था।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी. एस. जात्रा ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि बाल मधुमेह में अनुशासन ही सबसे बड़ी दवा है। उन्होंने नियमित जांच, समय पर इंसुलिन और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने की अपील की और आश्वस्त किया कि स्वास्थ्य विभाग इन बच्चों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएगा।
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. जानकी भगत ने बताया कि उचित देखभाल से टाइप-1 डायबिटीज के बच्चे भी सामान्य और सक्रिय जीवन जी सकते हैं। उन्होंने इंसुलिन की नियमितता, शुगर मॉनिटरिंग, संतुलित आहार, खेल-कूद और संक्रमण से बचाव पर जोर दिया।
जिला कार्यक्रम प्रबंधक राजीव रंजन मिश्रा ने कहा कि PSG जैसी बैठकें परिवारों को मानसिक और सामाजिक संबल देती हैं। जिला एनसीडी नोडल अधिकारी डॉ. उदय भगत ने सरकारी जांच सुविधाओं और फॉलो-अप की जानकारी दी।
कार्यक्रम का संचालन यूनिसेफ स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गजेंद्र सिंह के मार्गदर्शन में हुआ। अंत में संकल्प लिया गया कि बाल मधुमेह के प्रति जागरूकता और प्रभावित बच्चों को नियमित परामर्श से जोड़ने के प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।











