

हरिद्वार। राजनीति व प्रशासनिक व्यवस्था में प्रतिनिधित्व बढ़ाने की मांग को लेकर पिछड़ा वर्ग संयुक्त मोर्चा ने आगामी 5 जुलाई को विशाल ओबीसी महापंचायत करने का ऐलान कर दिया। प्रदेश सरकार से उत्तराखंड में पिछड़ा वर्ग को आरक्षण 14 प्रतिशत से 21 प्रतिशत करने की मांग की गई।
हरिद्वार। धर्मपाल सिंह ठेकेदार की अध्यक्षता में हरिद्वार के विभिन्न पिछड़े वर्ग संगठनों ने प्रेसवार्ता की। इस अवसर पर सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि हरिद्वार जिले में पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समाज की लगभग 50 प्रतिशत आबादी होने के बावजूद राजनीतिक, सामाजिक एवं प्रशासनिक स्तर पर समाज को उसका उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि हरिद्वार जिले की अधिकांश विधानसभा सीटों पर ओबीसी समाज चुनावी परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है तथा जीत-हार तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है एवं पर्वतीय क्षेत्रों में ओबीसी समाज को टिकट नहीं मिलता है। इसके बावजूद विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा समाज की लगातार उपेक्षा की जा रही है। इसी अन्याय एवं उपेक्षा के विरोध में तथा पिछड़े वर्ग के अधिकारों की रक्षा और उत्थान के उद्देश्य से “पिछड़ा वर्ग संयुक्त मोर्चा हरिद्वार” का गठन किया गया है। मोर्चा की मांग है कि हरिद्वार विधानसभा और रानीपुर विधानसभा ओबीसी समाज बाहुल्य क्षेत्र है। इन दोनों विधानसभाओं से ओबीसी समाज के लोगों को टिकट मिलना चाहिए।
मोर्चा के नेतृत्व में आगामी 5 जुलाई 2026 को शुभारंभ बैंकेट हॉल ज्वालापुर में 11 बजे से एक विशाल ओबीसी महापंचायत एवं जनसभा आयोजित की जाएगी, जिसमें सभी राजनीतिक पार्टियों के ओबीसी समाज के नेता सादर आमंत्रित है और जिले भर से हजारों लोगों के शामिल होने की संभावना है। इस कार्यक्रम में समाज की राजनीतिक भागीदारी, सामाजिक न्याय, आरक्षण और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
विजयपाल सिंह एवं संजय सैनी ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य गठन के समय पिछड़े वर्ग को 14 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त था. लेकिन वर्ष 2014 में पर्वतीय गांवों में रहने वाले गंगाडी समुदाय, राठ समुदाय, मारछा और तोलछा समुदाय, खांसी/खस राजपूत, शिल्पकार/ लोहार/ताम्रकार को जातिगत और सामाजिक पिछड़ेपन के आधार पर ओबीसी श्रेणी में शामिल किए जाने के बाद मूल पिछड़े वर्ग के हित प्रभावित हुए हैं। उन्होंने मांग की कि मंडल आयोग की संस्तुतियों एवं उत्तर प्रदेश की व्यवस्था के अनुरूप उत्तराखण्ड में भी पिछड़े वर्ग को 21 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया जाए।
पार्षद अनुज सिंह एवं धनीराम सैनी ने कहा कि जिस प्रकार अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया है, उसी प्रकार विधानसभा एवं लोकसभा में भी ओबीसी समाज के लिए आरक्षण लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने घोषणा की कि यदि समाज की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो हरिद्वार से लेकर दिल्ली तक एक व्यापक जनआंदोलन चलाया जाएगा।
इस अवसर पर एडवोकेट धर्मवीर कश्यप, मदनपाल गुर्जर, सुधीर ठेकेदार, डाक्टर प्रेम प्रकाश सतेलवाल, विजय प्रजापति आदि भी उपस्थित रहे।











