
समीर वानखेड़े ब्यूरो चीफ:
चंद्रपुर जिले के चर्चित अंतरराष्ट्रीय किडनी तस्करी मामले में बड़ा मोड़ आया है। सुप्रीम कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद एक महीने से फरार दिल्ली के डॉ. रविंद्रपाल सिंह ने मंगलवार को ब्रह्मपुरी कोर्ट में सरेंडर कर दिया। कोर्ट ने उसे 2 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
क्या है पूरा मामला:
चंद्रपुर जिले के नागभीड तहसील के मिंथूर गांव के किसान रोशन कुडे ने साहूकार का कर्ज चुकाने के लिए कंबोडिया में किडनी बेची थी। इस खुलासे के बाद पूरे रैकेट का पर्दाफाश हुआ।
अब तक की कार्रवाई:
शुरुआत: पुलिस ने पहले 6 साहूकारों को पकड़ा। फिर तत्कालीन SP मुम्मका सुदर्शन, एडिशनल SP ईश्वर कातकडे और LCB के PI अमोल काचोरे ने जांच संभाली।
देशभर में जाल: जांच में पता चला कि रैकेट के तार अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैले हैं। सोलापुर से डॉ. कृष्णा उर्फ रामकृष्ण सुंचू की गिरफ्तारी के बाद खुलासा हुआ कि इस गिरोह ने करीब 70 लोगों की किडनी अवैध तरीके से निकालकर बेची है।
गिरफ्तारियां: कोलकाता से हिमांशु भारद्वाज को पकड़ा गया। तमिलनाडु के त्रिची के डॉ. राजरत्नम गोविंदस्वामी और दिल्ली के डॉ. रविंद्रपाल सिंह के अस्पतालों में ये ऑपरेशन होने के तकनीकी सबूत और पैसों के लेन-देन के रिकॉर्ड पुलिस के हाथ लगे।
सरेंडर क्यों किया:
राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता देखते हुए SIT गठित की। डॉ. गोविंदस्वामी अभी भी फरार है। डॉ. सिंह को दिल्ली कोर्ट, सेशन कोर्ट और हाईकोर्ट से राहत मिल गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस के सबूत मानकर जमानत खारिज कर दी।
इधर, जांच में सामने आया कि किडनी तस्करी के कुछ आर्थिक लेन-देन डॉ. सिंह की डॉक्टर पत्नी के बैंक खाते से हुए हैं। पुलिस उसे भी सह-आरोपी बनाने की तैयारी में थी। 19 जून को सिंह की पत्नी और पिता ने चंद्रपुर SP से मुलाकात की थी। पत्नी के फंसने की भनक लगते ही डॉ. सिंह ने ब्रह्मपुरी कोर्ट में सरेंडर कर दिया।
आगे क्या:
पुलिस ने आरोपी की कस्टडी के लिए ब्रह्मपुरी कोर्ट में अर्जी दी है, जिस पर देर रात तक फैसला नहीं हुआ था। फिलहाल डॉ. सिंह चंद्रपुर जिला केंद्रीय कारागृह में है। सरकारी वकील का पक्ष न आने के कारण कोर्ट ने जमानत याचिका पर सुनवाई 29 जून तक टाल दी है। डॉ. गोविंदस्वामी की जमानत याचिका भी मदुराई कोर्ट से खारिज हो चुकी है, पर वह अब तक हाथ नहीं लगा है।












