
सुरेन्द्र दुबे (सीधी) मध्य प्रदेश के सीधी जिले में वर्तमान प्रशासनिक नेतृत्व शहर को एक नई दिशा देने की ओर अग्रसर दिखाई दे रहा है। वर्ष 2026 में पदस्थ हुए जिला कलेक्टर श्री विकास मिश्रा अपने निर्णयों और कार्यशैली के माध्यम से प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार लाने के लिए सक्रिय नजर आ रहे हैं।
कलेक्ट्रेट परिसर में हेलमेट अनिवार्य करने का निर्णय हो, शहर में मीट की दुकानों को निर्धारित स्थानों पर स्थानांतरित करने की पहल हो, या फिर पुराने बस स्टैंड को बंद करने जैसा कदम—ये सभी प्रयास इस बात का संकेत हैं कि प्रशासन शहर को अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और अनुशासित बनाने के लिए गंभीर है। ऐसे निर्णय न केवल वर्तमान व्यवस्था को सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं, बल्कि भविष्य के लिए एक सुदृढ़ आधार भी तैयार करते हैं।
इन पहलों से आमजन में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जगी है। यदि इन आदेशों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाता है, तो सीधी शहर एक बेहतर, सुरक्षित और व्यवस्थित नगर के रूप में विकसित हो सकता है।
हालांकि, इस सकारात्मक तस्वीर के बीच एक कड़वी सच्चाई भी सामने आती है। कुछ सत्ताधारी दल से जुड़े लोगों पर समय-समय पर कमीशनखोरी के आरोप लगते रहे हैं, जिसके चलते प्रशासनिक निर्देशों के पालन में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं। यह स्थिति न केवल चिंताजनक है, बल्कि विकास की गति को भी प्रभावित करती है।
ऐसे समय में जिले की जनता की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। एक ईमानदार और सक्रिय प्रशासनिक नेतृत्व के प्रयासों को सफल बनाने के लिए जनसमर्थन अत्यंत आवश्यक है। यदि नागरिक जागरूक होकर प्रशासन के सकारात्मक निर्णयों का समर्थन करें, तो निश्चित ही सीधी जिला विकास और सुशासन की दिशा में एक नई मिसाल कायम कर सकता है।






