
‘अर्दली कांड’ के बाद एडीएम कार्यालय में बड़ा फेरबदल, स्टेनो से लेकर पेशकार तक बदले गए
बस्ती: एडीएम कार्यालय में 'व्हाइटवाश', एक साथ हुए व्यापक तबादलों से मचा हड़कंप; प्रशासनिक सुधार या साजिश? एडीएम कार्यालय में तबादलों की चर्चा जोरों पर
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती: एडीएम कार्यालय में ‘व्हाइटवाश’ से मचा हड़कंप, अचानक हुए व्यापक तबादलों ने बढ़ाई सरगर्मी
- क्या अर्दली और पेशकार तय करते हैं कार्यालय की चाल? ‘व्हाइटवाश’ से खुला सिस्टम का राज
- बस्ती कलेक्ट्रेट में तबादलों का ‘ऑपरेशन क्लीन’: पटल पर जमे बाबूओं पर गिरी गाज
बस्ती। कलेक्ट्रेट स्थित एडीएम कार्यालय में हुए हालिया व्यापक प्रशासनिक फेरबदल ने जिले के प्रशासनिक गलियारों में खलबली मचा दी है। इस कार्रवाई को कार्यालय में जमी ‘गंदगी’ को साफ करने के ‘व्हाइटवाश’ अभियान के रूप में देखा जा रहा है।कलेक्ट्रेट स्थित एडीएम कार्यालय में हाल ही में किए गए व्यापक प्रशासनिक फेरबदल ने जिले में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। इसे कार्यालय को ‘व्हाइटवाश’ (साफ) करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
तबादलों का व्यापक स्तर
एडीएम कार्यालय में स्टेनो से लेकर पेशकार तक के स्तर पर एक साथ किए गए इन तबादलों ने पूरे कलेक्ट्रेट को हैरान कर दिया है। किसी ने भी इतनी बड़ी संख्या में एक साथ तबादलों की उम्मीद नहीं की थी। जानकारों का मानना है कि यद्यपि शिकायतों का सिलसिला पहले से जारी था, लेकिन ‘अर्दली कांड’ के सामने आने के बाद इन तबादलों ने और अधिक जोर पकड़ लिया।
- व्यापक स्तर पर कार्रवाई: एडीएम कार्यालय में स्टेनो से लेकर पेशकार तक, सभी को एक साथ बदल दिया गया है, जिसकी उम्मीद किसी ने नहीं की थी।
- ‘अर्दली कांड’ का असर: यद्यपि कार्यालय में शिकायतों का सिलसिला पहले से जारी था, लेकिन ‘अर्दली कांड’ के सामने आने के बाद इन तबादलों ने और अधिक जोर पकड़ लिया है।
- साजिश की आशंका: इस कार्रवाई को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं; कई लोग इसे महज एक तबादला न मानकर किसी बड़ी साजिश का हिस्सा मान रहे हैं और यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि इतने बड़े अधिकारियों के खिलाफ साजिश किसने रची।
प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल
लेख में सरकारी कार्यालयों की कार्यप्रणाली को लेकर कड़े सवाल उठाए गए हैं:
- गोपनीयता और पद का दुरुपयोग: साहबों के सबसे करीब होने के कारण अर्दली और पेशकार कार्यालय की गोपनीयता भंग करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं।
- पटल परिवर्तन की अनदेखी: नियमों के अनुसार ‘पटल परिवर्तन’ अनिवार्य है ताकि कोई कर्मचारी लंबे समय तक एक ही कुर्सी पर बैठकर सिस्टम का दुरुपयोग न कर सके। उदाहरण के तौर पर, पीडब्ल्यूडी के टेंडर बाबू जैसे कर्मचारी सालों से एक ही पटल पर जमे रहकर उसे अपनी ‘जागीर’ जैसा समझने लगते हैं।
- अधिकारियों की कार्यशैली: लेख में यह तीखा कटाक्ष किया गया है कि अक्सर अधिकारी भी ऐसे ही कर्मचारियों को तरजीह देते हैं जो उनकी सही-गलत जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हों।
साजिश और कार्यप्रणाली पर सवाल
- ‘अर्दली कांड’ और साजिश: कई लोग इसे महज प्रशासनिक प्रक्रिया न मानकर एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा मान रहे हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आखिर इतने बड़े अधिकारियों के खिलाफ साजिश किसने रची।
- गोपनीयता और पटल का दुरुपयोग: अर्दली और पेशकार कार्यालय के सबसे करीब होते हैं, जिससे कार्यालय की गोपनीयता भंग होने का खतरा बना रहता है। लेख के अनुसार, नियमों के तहत होने वाला ‘पटल परिवर्तन’ इसीलिए अनिवार्य है ताकि कोई कर्मचारी लंबे समय तक एक ही कुर्सी पर जमे रहकर उसका दुरुपयोग न कर सके।
- ‘जागीरदारी’ प्रथा: पीडब्ल्यूडी के टेंडर बाबू का उदाहरण देते हुए बताया गया है कि 16-17 वर्षों तक एक ही पटल पर जमे रहने के कारण कर्मचारी उसे अपनी ‘जागीर’ समझने लगते हैं और साहबों को भी ऐसे ही लोग पसंद आते हैं जो उनकी सही-गलत जरूरतों को पूरा कर सकें।
प्रशासनिक चुनौतियों का दौर
राजनीतिक गलियारों में इस तबादले की जमकर चर्चा है और अधिकारी भी राजनीतिक दखलंदाजी से परेशान नजर आते हैं। लेख में सुझाव दिया गया है कि गोपनीयता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अर्दली और पेशकार को निश्चित अंतराल पर बदलना अनिवार्य है।
फिलहाल, एडीएम कार्यालय में हुआ यह फेरबदल प्रशासनिक सुधार है या महज दिखावा, यह आने वाला समय ही स्पष्ट करेगा।
प्रशासन द्वारा की गई यह कार्रवाई कार्यालय की ‘गंदगी’ को साफ करने का एक प्रयास मानी जा रही है। अब देखना यह है कि यह ‘व्हाइटवाश’ व्यवस्था में वास्तविक सुधार लाएगा या यह केवल एक अस्थायी फेरबदल बनकर रह जाएगा। साथ ही, राजनीतिक गलियारों में इस तबादले को राजनीतिक दखलंदाजी के नजरिए से भी देखा जा रहा है।




















