
सागर।वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664 * मध्य प्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) 2026 के मसौदे को कैबिनेट की मंजूरी दे दी है। अब इस विधेयक को 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य में समानता और एक कानून की व्यवस्था लागू करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है। कटनी में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा, अगर राम एक शादी करेगा तो रहीम दो या चार शादियां क्यों करेगा? मध्य प्रदेश में वही रहेगा, जो एक ही शादी करेगा।” मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद UCC को लेकर प्रदेशभर में चर्चा तेज हो गई है। सरकार के अनुसार, मध्य प्रदेश का UCC ड्राफ्ट काफी हद तक उत्तराखंड मॉडल पर आधारित है, हालांकि इसमें कुछ बदलाव किए गए हैं ताकि इसे आम नागरिकों के लिए अधिक सरल बनाया जा सके। उत्तराधिकार से जुड़े कई जटिल प्रावधानों को कम किया गया है और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय को इस कानून के दायरे से बाहर रखने का प्रस्ताव है। ड्राफ्ट के अनुसार, किसी भी धर्म का व्यक्ति पहली शादी रहते हुए बिना कानूनी तलाक के दूसरी शादी नहीं कर सकेगा। यदि कानून लागू होता है तो सभी नागरिकों पर समान विवाह संबंधी नियम लागू होंगे। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य बहुविवाह जैसी व्यवस्थाओं पर समान कानून लागू करना है। प्रस्तावित ड्राफ्ट में लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य पंजीकरण कराने का प्रावधान किया गया है। यदि कोई जोड़ा लिव-इन में रहता है तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत रजिस्ट्रेशन कराना होगा। ड्राफ्ट के प्रमुख प्रस्ताव इस प्रकार हैं,लिव-इन संबंध का अनिवार्य पंजीकरण।, रजिस्ट्रेशन होने पर संबंधित अधिकारियों को सूचना देने की व्यवस्था। गलत जानकारी देने या आवश्यक पंजीकरण न कराने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान। यदि कोई पहले से विवाहित व्यक्ति लिव-इन संबंध में पाया जाता है तो प्रस्तावित कानून के तहत दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान। लिव-इन संबंध टूटने की स्थिति में महिला के भरण-पोषण (मेंटेनेंस) से जुड़े अधिकारों का भी उल्लेख किया गया है। UCC को लेकर लंबे समय से राष्ट्रीय स्तर पर बहस चल रही है। सरकार और विधि विशेषज्ञों के अनुसार, सरला मुद्गल मामले (1995) सहित कई न्यायिक टिप्पणियों में समान नागरिक संहिता की आवश्यकता पर विचार व्यक्त किए गए थे। मध्य प्रदेश सरकार का कहना है कि प्रस्तावित कानून सभी नागरिकों के लिए समान वैवाहिक नियम सुनिश्चित करने की दिशा में एक प्रयास है। फिलहाल यह केवल ड्राफ्ट विधेयक है। इसे विधानसभा में पेश किए जाने के बाद चर्चा होगी और सदन की मंजूरी मिलने पर ही आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी होगी।






