
सागर।वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664 * बंगाली भाषा बोलने वाले बुजुर्ग को सुरक्षित परिजनों तक पहुंचाया, तकनीक और संवेदनशील पुलिसिंग का उत्कृष्ट उदाहरण, अक्सर छोटे बच्चे ही नहीं, बल्कि उम्रदराज़ बुजुर्ग भी रास्ता भटककर अपने परिवार से बिछड़ जाते हैं। ऐसे समय में पुलिस केवल कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी नहीं निभाती, बल्कि परिवारों को फिर से मिलाने का मानवीय दायित्व भी निभाती है। ऐसा ही एक भावुक कर देने वाला मामला आज सागर पुलिस के सामने आया, जिसमें डायल-112, थाना गोपालगंज, पुलिस कंट्रोल रूम एवं सीसीटीवी शाखा की संयुक्त तत्परता से एक बुजुर्ग को सकुशल उनके परिवार तक पहुंचाया गया। डायल-112 को सूचना प्राप्त हुई कि जिला अस्पताल सागर परिसर में एक बुजुर्ग व्यक्ति काफी देर से भटक रहे हैं। वे अत्यंत परेशान हैं तथा ऐसी भाषा में बात कर रहे हैं जिसे आसपास मौजूद लोग समझ नहीं पा रहे हैं। सूचना मिलते ही डायल-112 की एफआरवी तत्काल मौके पर पहुंची और बुजुर्ग को सुरक्षित अपने साथ लेकर थाना गोपालगंज पहुंची। थाना प्रभारी घनश्याम शर्मा ने स्वयं बुजुर्ग से बातचीत कर उनकी पहचान एवं निवास संबंधी जानकारी प्राप्त करने का हरसंभव प्रयास किया, लेकिन भाषा अलग होने के कारण सफलता नहीं मिल सकी। इसके बाद उन्होंने आरक्षक दशरथ मालवीय एवं आरक्षक आनंद सिंधु के साथ तत्काल बुजुर्ग को पुलिस कंट्रोल रूम सागर भेजा, ताकि तकनीकी एवं अन्य उपलब्ध संसाधनों की सहायता से उनकी पहचान की जा सके। पुलिस कंट्रोल रूम में सीसीटीवी शाखा की टीम एवं गोपालगंज आरक्षको ने धैर्य, संवेदनशीलता और सूझबूझ के साथ बुजुर्ग से लगातार बातचीत करने का प्रयास किया। काफी देर तक संवाद करने के बाद यह समझ आया कि वे बंगाली भाषा बोल रहे हैं। भाषा की बाधा के बावजूद पुलिस टीम ने हार नहीं मानी और लगातार उनसे संपर्क बनाए रखा।
इसी दौरान बातचीत में बुजुर्ग के मुंह से शनि मंदिर शब्द सुनाई दिया। यह पुलिस के लिए एक महत्वपूर्ण सुराग साबित हुआ। इसके बाद पुलिस कंट्रोल रूम की सीसीटीवी टीम ने शहर के विभिन्न सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से शनि मंदिर क्षेत्र के दृश्य उन्हें दिखाए। जैसे ही बुजुर्ग ने वह स्थान देखा, उनके चेहरे के हाव-भाव बदल गए और पुलिस को विश्वास हो गया कि यही स्थान उनके घर तक पहुंचने का रास्ता बन सकता है। तत्काल थाना गोपालगंज के आरक्षक दशरथ मालवीय एवं आरक्षक आनंद सिंधु बुजुर्ग को शनि मंदिर लेकर पहुंची। वहां पहुंचते ही उन्होंने अपने घर का रास्ता बताना शुरू कर दिया। पुलिस टीम उनके बताए मार्ग पर आगे बढ़ी और अंततः उनके निवास तक पहुंच गई। पता चला कि बुजुर्ग के परिजन आर्मी अस्पताल में कार्यरत हैं तथा आर्मी क्षेत्र में निवास करते हैं। परिवार के सदस्य पिछले लगभग चार घंटे से उनकी तलाश में परेशान होकर इधर-उधर खोजबीन कर रहे थे, हालांकि अभी तक उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। जैसे ही पुलिस बुजुर्ग को सुरक्षित घर लेकर पहुंची, परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने भावुक होकर सागर पुलिस का आभार व्यक्त किया। इस पूरे घटनाक्रम में डायल-112, एफआरवी स्टाफ, थाना प्रभारी घनश्याम शर्मा एवं थाना गोपालगंज पुलिस, पुलिस कंट्रोल रूम सागर तथा सीसीटीवी शाखा ने लगभग चार घंटे तक लगातार अथक प्रयास किए। भाषा की कठिनाई, पहचान का अभाव और कोई स्पष्ट जानकारी न होने के बावजूद पुलिस ने धैर्य, मानवीय संवेदनशीलता, तकनीकी संसाधनों और टीमवर्क का उत्कृष्ट परिचय देते हुए एक बिछड़े बुजुर्ग को उनके परिवार से मिलाने में सफलता प्राप्त की।
यह घटना एक बार फिर सिद्ध करती है कि सागर पुलिस केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि हर जरूरतमंद व्यक्ति के लिए विश्वास, सुरक्षा और संवेदनशीलता का पर्याय है। डायल-112 की त्वरित प्रतिक्रिया, थाना गोपालगंज की सक्रियता, पुलिस कंट्रोल रूम के समन्वय तथा सीसीटीवी तकनीक के प्रभावी उपयोग ने एक परिवार को फिर से अपने बुजुर्ग से मिलाकर उनके चेहरे पर मुस्कान लौटा दी।







